Kidney – पैरों का दर्द और सूजन बीमारी का शुरुआती चेतावनी संकेत
Kidney – मानव शरीर में किडनी केवल अपशिष्ट छानने वाली मशीन नहीं है, बल्कि यह तरल संतुलन, रक्तचाप और रक्त निर्माण जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है। इसके बावजूद, इसके खराब होने के शुरुआती संकेत अक्सर इतने सामान्य लगते हैं कि लोग उन्हें रोजमर्रा की थकान समझकर टाल देते हैं। पैरों में लगातार दर्द और सूजन ऐसा ही एक लक्षण है, जो देखने में साधारण लग सकता है, लेकिन कई मामलों में यह किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर इशारा करता है। चिकित्सकों का कहना है कि समय रहते इन संकेतों को समझना भविष्य की बड़ी जटिलताओं से बचा सकता है।

तरल जमा होने से क्यों बढ़ती है सूजन
जब किडनी की कार्यक्षमता कमजोर पड़ने लगती है, तो शरीर अतिरिक्त पानी और नमक को सही ढंग से बाहर नहीं निकाल पाता। इसका सीधा असर पैरों, टखनों और पंजों पर दिखाई देता है, जहां भारीपन और खिंचाव जैसा दर्द महसूस होता है। कई मरीजों में सुबह आंखों के आसपास हल्की सूजन दिखती है, जबकि दिन ढलने तक पैरों में भारीपन बढ़ जाता है। यह स्थिति धीरे-धीरे विकसित होती है, इसलिए लोग अक्सर इसे उम्र, खड़े रहने या लंबी यात्रा से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं।
पिटिंग एडिमा की पहचान कैसे करें
डॉक्टर इस तरह की सूजन को परखने के लिए एक सरल तरीका बताते हैं। अगर सूजे हुए हिस्से को अंगूठे से दबाने पर गड्ढा बन जाए और वह कुछ सेकंड तक बना रहे, तो इसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है। यह इस बात का संकेत है कि शरीर में तरल पदार्थ सामान्य से अधिक रुक रहा है। हालांकि हर सूजन किडनी की बीमारी नहीं होती, लेकिन अगर यह लगातार बनी रहे या बढ़े, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
पेशाब में बदलाव और त्वचा की परेशानी
किडनी से जुड़ी समस्या बढ़ने पर पेशाब की मात्रा, रंग या गाढ़ेपन में अंतर दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों को पेशाब में झाग नजर आता है, जो प्रोटीन के रिसाव का संकेत हो सकता है। इसके साथ ही शरीर में विषाक्त पदार्थों के जमा होने से त्वचा में खुजली भी बढ़ सकती है, जो खासकर रात के समय परेशान करती है। यह खुजली सामान्य मॉइस्चराइजर से ठीक नहीं होती और बार-बार लौट आती है, जिससे नींद और दिनचर्या प्रभावित होती है।
खून की कमी और मांसपेशियों की ऐंठन
किडनी एक ऐसे हार्मोन का निर्माण करती है जो लाल रक्त कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है। जब किडनी कमजोर होती है, तो इस हार्मोन का स्तर गिरने लगता है और व्यक्ति में खून की कमी के लक्षण दिखने लगते हैं। थकान, कमजोरी और सांस फूलना इसके सामान्य संकेत हैं। इसके अलावा, शरीर में खनिजों का संतुलन बिगड़ने पर पैरों की मांसपेशियों में अचानक ऐंठन या तेज दर्द भी हो सकता है।
किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए
उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीजों में किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा तुलनात्मक रूप से अधिक होता है। इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में पहले से किडनी रोग का इतिहास रहा है, उन्हें भी नियमित जांच करानी चाहिए। लगातार दर्द निवारक दवाओं का सेवन, अधिक नमक वाला भोजन और पर्याप्त पानी न पीना भी जोखिम बढ़ाने वाले कारक माने जाते हैं।
समय पर जांच और बचाव के उपाय
किडनी से जुड़ी बीमारियों को अक्सर “शांत” रोग कहा जाता है, क्योंकि इनके लक्षण बहुत देर से स्पष्ट होते हैं। इसलिए पैरों की लगातार सूजन, दर्द या पेशाब में बदलाव दिखे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सरल रक्त और मूत्र परीक्षण से किडनी की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। संतुलित आहार, सीमित नमक, नियमित शारीरिक गतिविधि और पर्याप्त पानी पीना किडनी को स्वस्थ रखने में मददगार माना जाता है।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
विशेषज्ञों का मानना है कि पैरों का हल्का सा दर्द भी कभी-कभी शरीर के अंदर चल रही बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। इसलिए लक्षणों को अनदेखा करने के बजाय उन्हें समझना और सही समय पर जांच कराना ज्यादा सुरक्षित रास्ता है।
नोट: यह रिपोर्ट विभिन्न चिकित्सीय अध्ययनों और विशेषज्ञों की सार्वजनिक राय पर आधारित जानकारी का संक्षिप्त संकलन है।
अस्वीकरण: इस लेख का उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना है। इसमें दी गई जानकारी किसी भी तरह से पेशेवर चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी लक्षण या बीमारी की स्थिति में योग्य डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है।



