Form-7 – अखिलेश यादव ने भाजपा पर वोट कटवाने का आरोप लगाया
Form-7 – उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में एक बार फिर मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्तारूढ़ दल के समर्थक कथित रूप से फर्जी तरीके से फार्म 7 भरकर खास वर्गों के मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि यह मामला इतना गंभीर है कि माननीय न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। उनके अनुसार, पीडीए समाज और विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरे की घंटी है।

मीडिया से लोकतांत्रिक भूमिका निभाने की अपील
अखिलेश यादव ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों से आग्रह किया कि वे निष्पक्षता के साथ इस मुद्दे को सामने लाएं और लोकतंत्र की रक्षा में अपनी जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि चाहे ग्रामीण स्तर का स्थानीय मीडिया हो या जिला, मंडल और राज्य स्तर के बड़े समाचार संस्थान, जो भी इस कथित अनियमितता को उजागर करेगा, समाजवादी पार्टी उसके साथ खड़ी रहेगी। उनके शब्दों में, लगभग सभी संबंधित पक्ष इस गड़बड़ी से अवगत हैं, लेकिन निर्वाचन आयोग को छोड़कर बाकी लोग इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार शिकायतों और अपीलों के बावजूद मतदाता सूची सुधार प्रणाली (SIR) में फार्म 7 से जुड़ी कथित धांधली थमने का नाम नहीं ले रही है।
SIR और फार्म 7 पर जारी विवाद
फार्म 7 का उपयोग आमतौर पर उन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जाता है जो मृत हो चुके हैं, स्थानांतरित हो गए हैं या अन्य कारणों से पात्र नहीं हैं। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि इसे हथियार बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। अखिलेश यादव का कहना है कि कई जगहों से ऐसी शिकायतें मिल रही हैं जहां बिना उचित जांच-पड़ताल के बड़े पैमाने पर आवेदन दाखिल किए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है और निष्पक्ष चुनाव की नींव कमजोर होती है।
फार्म 7 के दुरुपयोग पर कड़ी चेतावनी की मांग
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष ने फार्म 7 के कथित दुरुपयोग को “बहुत बड़ा अपराध” बताते हुए निर्वाचन आयोग से स्पष्ट कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि आयोग को सार्वजनिक विज्ञापन जारी कर यह बताना चाहिए कि इस तरह के गैरकानूनी इस्तेमाल पर क्या कानूनी दंड हो सकता है। साथ ही, उन्होंने आयोग से भाजपा और उससे जुड़े लोगों को औपचारिक रूप से चेतावनी देने की अपील की। उनके अनुसार, अगर ऐसे मामलों पर समय रहते सख्ती नहीं दिखाई गई तो चुनावी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
पीडीए पहरेदारों की सक्रियता और आयोग से उम्मीद
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि पीडीए समाज के कार्यकर्ता और जागरूक मतदाता अपने स्तर पर इस कथित फर्जीवाड़े को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह जिम्मेदारी केवल नागरिकों की नहीं है, बल्कि निर्वाचन आयोग की भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आयोग अपनी निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएगा और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करेगा।
संवैधानिक भरोसे पर सवाल
अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी भरे स्वर में कहा कि कहीं ऐसा न हो कि मुख्य चुनाव आयुक्त को सचेत करने के लिए कोई उनके ही नाम से फार्म 7 का दुरुपयोग कर दे। उनका आशय था कि अगर प्रणाली में खामियां हैं तो उनका दुरुपयोग कोई भी कर सकता है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थानों की गरिमा को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने दोहराया कि निष्पक्ष और भरोसेमंद चुनाव व्यवस्था बनाए रखना केवल राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की भी साझा जिम्मेदारी है।



