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CBSE Board Exam 2026: टाइप-1 डायबिटीज वाले छात्रों को मिली बड़ी राहत, नई गाइडलाइंस जारी

CBSE Board Exam 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2026 की परीक्षाओं में बैठने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एक संवेदनात्मक पहल की है। बोर्ड ने टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे परीक्षार्थियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि लंबी परीक्षा के दौरान उन्हें किसी भी तरह की शारीरिक समस्या का सामना न करना पड़े। अक्सर देखा गया है कि तनाव और लंबे अंतराल के कारण इन छात्रों का शुगर लेवल अचानक गिर सकता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया कहा जाता है। इसे रोकने के लिए सीबीएसई ने अब परीक्षा हॉल के भीतर खाने-पीने की जरूरी वस्तुएं और महत्वपूर्ण मेडिकल उपकरण ले जाने की अनुमति प्रदान कर दी है।

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तनाव मुक्त परीक्षा के लिए बोर्ड का मानवीय दृष्टिकोण

सीबीएसई का यह निर्णय छात्रों की सेहत और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। बोर्ड का स्पष्ट मत है कि कोई भी बीमारी किसी मेधावी छात्र के भविष्य के आड़े नहीं आनी चाहिए। इस विशेष छूट का उद्देश्य डायबिटीज पीड़ित बच्चों को मानसिक रूप से शांत रखना है, ताकि वे बिना किसी डर के अपनी परीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकें। हालांकि, परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए बोर्ड ने कुछ सख्त नियम भी बनाए हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।

परीक्षा हॉल में ले जाने योग्य वस्तुओं की सूची

नए नियमों के तहत टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित छात्र अब अपने साथ कुछ चुनिंदा खाद्य और पेय पदार्थ रख पाएंगे। इनमें मुख्य रूप से शुगर कैंडी, चॉकलेट, सैंडविच और ताजे फल जैसे केला या सेब शामिल हैं। पीने के पानी के लिए छात्रों को केवल पारदर्शी बोतल इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, स्वास्थ्य की निगरानी के लिए ग्लूकोज मीटर (ग्लूकोमीटर), इंसुलिन पंप और निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) जैसे आधुनिक मेडिकल उपकरण भी छात्र अपने पास रख सकेंगे। यह सुनिश्चित किया गया है कि आपात स्थिति में छात्र तुरंत दवा या ग्लूकोज का सेवन कर सकें।

अनिवार्य दस्तावेज और आवेदन की प्रक्रिया

इन विशेष सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए अभिभावकों और छात्रों को कुछ औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। छात्र को एक विशेषज्ञ डॉक्टर (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट) द्वारा जारी किया गया वैध पर्चा और बीमारी की गंभीरता को प्रमाणित करने वाला मेडिकल सर्टिफिकेट स्कूल में जमा करना होगा। स्कूल प्रबंधन की यह जिम्मेदारी होगी कि वे इन सभी दस्तावेजों को सीबीएसई के आधिकारिक पोर्टल पर समय रहते अपलोड करें। बिना पूर्व सूचना और दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षा केंद्र पर इन वस्तुओं को ले जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

परीक्षा केंद्रों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश

सीबीएसई ने सभी परीक्षा केंद्र अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे डायबिटीज पीड़ित छात्रों की जांच अत्यंत संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ करें। खाने-पीने का सामान केवल पारदर्शी पाउच में ही स्वीकार किया जाएगा। इसके साथ ही, केंद्र पर तैनात निरीक्षकों (Invigilators) को इन नियमों के प्रति जागरूक रहने को कहा गया है ताकि किसी भी छात्र को टोकने या रोकने से उनका कीमती समय बर्बाद न हो। बोर्ड ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यदि परीक्षा के दौरान किसी छात्र की तबीयत बिगड़ती है, तो केंद्र पर तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन सेवाएं उपलब्ध रहें।

स्कूलों और शिक्षकों की बढ़ी जिम्मेदारी

बोर्ड ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां पढ़ रहे टाइप-1 डायबिटीज वाले छात्रों की पहचान पहले ही कर लें। आवेदन प्रक्रिया के दौरान ऐसे छात्रों की मदद करना और उन्हें इन नियमों के बारे में विस्तार से समझाना शिक्षकों का कर्तव्य होगा। स्कूलों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्र के एडमिट कार्ड पर इस विशेष श्रेणी का उल्लेख हो, जिससे परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय किसी भी तरह की गलतफहमी या मानसिक दबाव की स्थिति पैदा न हो।

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