Inspiring journey of Divyang Khushi: कानपुर से लखनऊ पैदल चलकर सीएम योगी तक पहुँची, मिला सम्मान और नया जीवन
Inspiring journey of Divyang Khushi: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उस दिन कुछ ऐसा हुआ जो हर किसी के दिल को छू गया। कानपुर की एक दिव्यांग बालिका खुशी, जो न तो बोल सकती है और न ही सुन सकती, अपने बनाए चित्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देने के लिए सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर पहुंच गई। यह घटना न सिर्फ इंसानी हौसले की मिसाल है, बल्कि संवेदनशील प्रशासन की भी जीती-जागती तस्वीर पेश करती है। मुख्यमंत्री ने न केवल खुशी से मुलाकात की, बल्कि उसके पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठाते हुए कई बड़े ऐलान किए।

घर से बिना बताए निकली थी खुशी
22 नवंबर की सुबह कानपुर के ग्वालटोली क्षेत्र में रहने वाली खुशी बिना किसी को बताए घर से निकल पड़ी। उसके पास सिर्फ एक बैग था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथ से बने कुछ खूबसूरत चित्र थे। उसका इरादा साफ था – ये चित्र खुद सीएम को देना है। दिव्यांग होने के बावजूद उसने हाइवे के किनारे-किनारे पैदल चलना शुरू कर दिया। कई दिन की यात्रा के बाद जब वह लखनऊ पहुंची तो रास्ता भटक गई और लोकभवन के बाहर बैठकर रोने लगी। हजरतगंज पुलिस ने उसे संभाला और परिजनों को सूचना दी।
परिवार की आर्थिक तंगी और संघर्ष
खुशी का परिवार बेहद गरीब है। पिता कल्लू गुप्ता पहले संविदा पर गार्ड की नौकरी करते थे, जो अब छूट चुकी है। मां गीता गुप्ता दूसरों के घरों में काम करके जैसे-तैसे गुजारा चलाती हैं। छोटा भाई जगत भी परिवार के साथ रहता है। घर में पढ़ने-लिखने की सुविधा नहीं होने के बावजूद खुशी ने खुद से ही पेंसिल और कागज लेकर चित्र बनाना सीख लिया। वह प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम तक लिख लेती है, जो उसकी लगन को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री का संवेदनशील कदम
खुशी की खबर जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, उन्होंने तुरंत परिवार को अपने सरकारी आवास पर बुलाया। बुधवार को खुशी अपने माता-पिता और भाई के साथ सीएम हाउस पहुंची। योगी जी ने खुशी को पास बुलाया, उसके बनाए हर चित्र को बड़े ध्यान से देखा और भावुक हो गए। खुशी ने जो पीएम मोदी का पोर्ट्रेट बनाया था, उसे देखकर सीएम ने उसकी पीठ थपथपाई और ढेर सारा प्यार दिया।
खुशी के भविष्य के लिए बड़े ऐलान
मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:
- कानपुर के मूक-बधिर विद्यालय में खुशी की निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था
- पढ़ाई और स्किल डेवलपमेंट के लिए नया मोबाइल फोन और टैबलेट
- कान के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में पूरा खर्च
- परिवार को लखनऊ या कानपुर में सरकारी आवास उपलब्ध कराना
- परिवार की आर्थिक मदद के लिए तत्काल सहायता
ये सारी घोषणाएं मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश देकर की गईं।
परिवार की खुशी, शब्दों में बयां नहीं हो रही
परिजनों ने बताया कि इतना बड़ा सम्मान मिलने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। मां गीता गुप्ता की आंखों में आंसू थे तो पिता कल्लू गुप्ता बार-बार सीएम योगी के पैर छू रहे थे। खुशी के चेहरे पर जो मुस्कान थी, वह लाखों लोगों को प्रेरणा दे रही है। उसने साबित कर दिया कि अगर इरादे पक्के हों तो दिव्यांगता भी बाधा नहीं बन सकती।
यह कहानी सिर्फ एक मुलाकात की नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि संवेदनशील शासन में आम आदमी की पुकार सुनी जाती है। खुशी आज हजारों दिव्यांग बच्चों के लिए मिसाल बन गई है। उसकी हिम्मत और मुख्यमंत्री का संवेदनशील रवैया दोनों ही काबिल-ए-तारीफ हैं।



