अंतर्राष्ट्रीय

Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध पर अरब लीग का बड़ा बयान, रूस को हराना नामुमकिन…

Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक सक्रियता तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया है कि दोनों देशों के बीच सुलह का रास्ता लगभग साफ हो चुका है और युद्धविराम की घोषणा जल्द ही संभव है। इसी बीच, नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल घेइत ने वैश्विक भू-राजनीति और सुरक्षा संतुलन पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यूक्रेन की सरजमीं पर रूस को सैन्य रूप से पराजित करना असंभव है। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया को शीत युद्ध के उस संतुलन को याद रखना चाहिए, जहां परमाणु शक्तियों ने आपसी टकराव से परहेज किया था।

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रूसी सैन्य क्षमता और रणनीतिक यथार्थ

इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स (ICWA) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए अबुल घेइत ने वैश्विक शांति और स्थिरता पर गहरा विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि रूस, अमेरिका और चीन के बीच शांति बने रहना वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है, जैसा कि शीत युद्ध के दौरान देखा गया था। उन्होंने तर्क दिया कि मास्को लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और अपनी सैन्य क्षमता में इजाफा कर रहा है।

अरब लीग प्रमुख ने उदाहरण देते हुए समझाया कि रूस को अफगानिस्तान जैसे सुदूर क्षेत्रों में हराना संभव हो सकता था क्योंकि वह मास्को से हजारों मील दूर था, लेकिन यूक्रेन के मामले में भौगोलिक परिस्थितियां और रूसी प्रतिबद्धता अलग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में अमेरिका की रणनीति रूस को चीन के करीब जाने से रोकने की है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।

नाटो और रूस के ऐतिहासिक संबंधों का जिक्र

अपने संबोधन के दौरान अबुल घेइत ने इतिहास के कुछ अनछुए पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 1993-94 के दौरान पुतिन के उदय से पहले, रूस ने स्वयं नाटो (NATO) में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उस समय के राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने पश्चिमी सुरक्षा ढांचे के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश की थी। येल्तसिन ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के साथ नाटो के विस्तार को लेकर चिंताएं भी साझा की थीं। अरब लीग महासचिव के अनुसार, उस दौर में रूस ने टकराव के बजाय सहयोग का मार्ग तलाशा था, लेकिन नाटो के पूर्व की ओर विस्तार ने भविष्य के संघर्षों की नींव रख दी।

ईरान पर सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर चेतावनी

पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा करते हुए अहमद अबुल घेइत ने ईरान के खिलाफ किसी भी संभावित सैन्य कदम को लेकर आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर ईरान पर हमला होता है, तो यह केवल क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की शांति के लिए एक ‘आपदा’ साबित होगा। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा खाड़ी क्षेत्र में जंगी बेड़ा भेजने के फैसले के संदर्भ में आया है। घेइत ने जोर देकर कहा कि खाड़ी देश सैन्य टकराव के सख्त खिलाफ हैं और वे केवल कूटनीतिक समाधान का समर्थन करते हैं।

गाजा शांति पहल और अमेरिका की भूमिका

गाजा में जारी मानवीय संकट और युद्ध को लेकर भी अरब लीग प्रमुख ने अपनी राय रखी। उन्होंने अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘शांति बोर्ड’ का समर्थन करने के अरब देशों के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि बार-बार विफल हो रहे राजनयिक प्रयासों के बीच यह शांति की एक दुर्लभ उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने पिछली अमेरिकी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान सुरक्षा परिषद में चार बार युद्धविराम के प्रस्ताव लाए गए, लेकिन अमेरिका ने हर बार वीटो का इस्तेमाल कर उन्हें रोक दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि वर्तमान कूटनीतिक प्रयास गाजा में स्थाई शांति की दिशा में कारगर साबित होंगे।

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