BJP MLA Arvind Pandey: भाजपा विधायक के भाई पर जमीन हड़पने का आरोप, अरविंद पांडे ने मांगी निष्पक्ष जांच
BJP MLA Arvind Pandey: उत्तराखंड की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब गदरपुर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक अरविंद पांडे के भाई देवानंद पांडे सहित चार अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। ऊधमसिंह नगर जिले की बाजपुर पुलिस ने यह कार्रवाई धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा करने की शिकायत के आधार पर की है। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद खुद विधायक अरविंद पांडे ने मोर्चा संभालते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात की और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है।

विधायक की चुनौती: दोषी पाए जाने पर राजनीति त्यागने का एलान
अपने परिवार पर लगे आरोपों के बाद विधायक अरविंद पांडे ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए साफ कहा कि यह उनके परिवार की छवि को धूमिल करने की कोशिश है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक से मांग की है कि सच सामने लाने के लिए दोनों पक्षों का ‘नार्को टेस्ट’ कराया जाए। विधायक ने यहां तक कह दिया कि यदि जांच में वह या उनके परिवार का कोई भी सदस्य दोषी पाया जाता है, तो वह तत्काल राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे, बशर्ते वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के हो।
धोखाधड़ी और धमकी की कहानी: पीड़ित की आपबीती
यह पूरा विवाद बहादुरगंज निवासी संजय बंसल की एक शिकायत से शुरू हुआ। बंसल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनकी मुंडिया पिस्तौर गांव में पुश्तैनी जमीन है। इस जमीन की देखभाल के लिए उन्होंने आपसी सहमति से मझरा बक्श के एक व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी थी। हालांकि, मामला तब बिगड़ा जब 21 अगस्त 2025 को विकास प्राधिकरण की ओर से उन्हें मौके पर बुलाया गया। प्राधिकरण ने वहां हो रहे नए निर्माण को अवैध बताते हुए बंसल को कारण बताओ नोटिस जारी किया और उसे ध्वस्त करने का आदेश दिया।
फर्जी किरायानामा और अभद्रता के गंभीर आरोप
संजय बंसल का आरोप है कि जब वह मौके पर पहुंचे, तो वहां मौजूद विधायक के भाई देवानंद पांडे और उनके साथियों ने उनके साथ बदसलूकी की। बंसल के मुताबिक, आरोपियों ने उनके सामने कुछ कागजात फेंकते हुए दावा किया कि अब यह जमीन उनकी है। पीड़ित का कहना है कि इन लोगों ने मिलकर एक फर्जी किरायानामा तैयार किया है ताकि उनकी बेशकीमती जमीन को हड़पा जा सके। इतना ही नहीं, बंसल ने तहरीर में यह भी उल्लेख किया है कि उन्हें दोबारा जमीन पर कदम न रखने की धमकी दी गई, जिससे उनका पूरा परिवार डरा हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच अधिकारी की नियुक्ति
संजय बंसल की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बाजपुर कोतवाली पुलिस ने देवानंद पांडे, जय प्रकाश तिवारी, मोहन पांडे और किशन पांडे के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और धमकी देने की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस ने मामले की गहराई से जांच के लिए उपनिरीक्षक (SI) कैलाश चंद नगरकोटी को विवेचना अधिकारी नियुक्त किया है। पुलिस का कहना है कि राजस्व रिकॉर्ड और कथित किरायानामा की सत्यता की जांच की जा रही है। जांच टीम जल्द ही गवाहों के बयान दर्ज कर साक्ष्य जुटाएगी।
क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल
विधायक के परिवार का नाम आने से विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। हालांकि, विधायक अरविंद पांडे के समर्थकों का कहना है कि यह एक जमीनी विवाद है जिसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। बाजपुर पुलिस अब उन दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराने की तैयारी में है, जिन्हें पीड़ित ने फर्जी बताया है। इस मामले के नतीजे न केवल विधायक के परिवार के भविष्य, बल्कि क्षेत्र के आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर डाल सकते हैं।



