अंतर्राष्ट्रीय

Sheikh Hasina: भारत ने शेख हसीना के प्रत्यर्पण पर तोला जवाब, कानूनी प्रक्रिया जारी, बांग्लादेश को दिया संदेश

Sheikh Hasina: भारत सरकार ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस मामले में सभी कानूनी और न्यायिक पहलुओं की गहन समीक्षा की जा रही है। पिछले साल अगस्त में बड़े पैमाने पर हुए छात्र आंदोलन और हिंसक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं और तब से वह दिल्ली में ही रह रही हैं। बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार बार-बार उनकी वापसी की मांग कर रही है, खासकर तब जब वहाँ की विशेष अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुना दी है।

Sheikh Hasina
Sheikh Hasina
WhatsApp Group Join Now

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
बुधवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि शेख हसीना के प्रत्यर्पण से जुड़ा अनुरोध अभीेंगे भारत की आंतरिक कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत बांग्लादेश में शांति, स्थिरता, लोकतंत्र और समावेशी विकास चाहता है और इसके लिए सभी पक्षों से रचनात्मक संवाद बनाए रखेगा। भारत ने किसी भी तरह की जल्दबाजी से इनकार करते हुए प्रक्रिया को पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर पूरा करने का भरोसा दिया।

बांग्लादेश कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने पिछले हफ्ते शेख हसीना को 2024 के जुलाई-अगस्त आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, हत्या और मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में दोषी ठहराते हुए फाँसी की सजा सुनाई। 453 पन्नों के विस्तृत फैसले में अदालत ने कहा कि उनके शासनकाल में पुलिस और अवामी लीग कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया था, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। इस फैसले के बाद युनूस सरकार ने भारत से औपचारिक रूप से प्रत्यर्पण की माँग तेज कर दी।

शेख हसीना भारत में कब से और क्यों?
5 अगस्त 2024 को जब ढाका में स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई थी, तब शेख हसीना हेलिकॉप्टर से भारत आईं और तब से वह दिल्ली के आसपास ही रह रही हैं। उनके साथ उनकी बहन शेख रेहाना और कुछ करीबी लोग भी हैं। भारत ने शुरू से उन्हें राजनीतिक शरण जैसी सुविधा दी है, हालाँकि आधिकारिक रूप से इसे “अस्थायी ठहराव” कहा जाता रहा है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में शेख हसीना लंबे समय तक मजबूत कड़ी रही हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सम्मान भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है।

प्रत्यर्पण संधि और कानूनी अड़चनें
भारत और बांग्लादेश के बीच 2013 और 2016 में हुई प्रत्यर्पण संधि के तहत राजनीतिक अपराधों को छोड़कर सामान्य अपराधों में प्रत्यर्पण संभव है। लेकिन मौत की सजा वाले मामलों में भारत का रुख साफ है – वह ऐसे व्यक्ति को नहीं सौंपता जहाँ फाँसी की सजा होने की संभावना हो। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भारत ने इस नीति को दोहराया है। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय बार-बार “कानूनी समीक्षा” की बात कर रहा है।

क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ेगा असर
शेख हसीना का मामला सिर्फ दो नेताओं या दो सरकारों का नहीं है। इसके पीछे बंगाल की खाड़ी में स्थिरता, भारत की पूर्वोत्तर सीमा की सुरक्षा और चीन की बढ़ती दिलचस्पी जैसे बड़े सवाल हैं। अगर भारत शेख हसीना को सौंप देता है तो अवामी लीग समर्थक फिर से आंदोलन कर सकते हैं। अगर नहीं सौंपता तो बांग्लादेश में भारत-विरोधी भावनाएँ और बढ़ेंगी। इसलिए नई दिल्ली हर कदम सोच-समझकर उठा रही है।

अगले कुछ महीने निर्णायक
अभी यह साफ नहीं है कि भारत अंतिम फैसला कब लेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामला गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंत में प्रधानमंत्री कार्यालय तक जाएगा। तब तक शेख हसीना भारत में ही रहेंगी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर दबाव बनाए रखेगी। दोनों देशों के बीच यह मामला जितना कानूनी है, उससे कहीं ज्यादा राजनीतिक और कूटनीतिक भी है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.