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Shashi Tharoor: शशि थरूर और राहुल गांधी की मुलाकात, कांग्रेस के भीतर सुलझते मतभेदों के संकेत

Shashi Tharoor: संसद के बजट सत्र के बीच गुरुवार को कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने संसद भवन स्थित पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में राहुल गांधी और खरगे से करीब 30 मिनट तक लंबी चर्चा की। पिछले कुछ हफ्तों से नेतृत्व के साथ चल रहे तनाव और मतभेदों की अटकलों के बीच हुई इस बैठक के बाद थरूर ने मुस्कुराते हुए मीडिया से कहा, “सब कुछ ठीक है और हम सब एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं।”

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बैठक के बाद थरूर का सकारात्मक रुख

इस मुलाकात को थरूर ने “अत्यधिक रचनात्मक और सार्थक” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से दोनों वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि अब पार्टी और उनके विचार एक ही धरातल पर हैं। थरूर ने जोर देकर कहा कि उनकी प्रतिबद्धता हमेशा भारत के लोगों की सेवा में रही है और वे कांग्रेस के अनुशासित सिपाही की तरह कार्य करते रहेंगे। इस बयान ने उन कयासों को फिलहाल शांत कर दिया है जिनमें उनके पार्टी छोड़ने या भाजपा के प्रति झुकाव की बातें कही जा रही थीं।

मतभेदों की वजह: अनदेखी और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

थरूर और पार्टी हाईकमान के बीच दूरियां तब स्पष्ट हुई थीं जब कोच्चि में आयोजित कांग्रेस की ‘महापंचायत’ में राहुल गांधी द्वारा मंच पर उन्हें कथित तौर पर ‘नजरअंदाज’ किए जाने की खबरें आईं। इसके अलावा, वह केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जुड़ी एक अहम एआईसीसी (AICC) बैठक में भी शामिल नहीं हुए थे। हालांकि, थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इसकी पूर्व सूचना नेतृत्व को दी थी। वैचारिक मोर्चे पर भी तनाव तब बढ़ा जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सीमा पार सैन्य कार्रवाई जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर थरूर ने सरकार के रुख का समर्थन किया था, जिसे कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पार्टी लाइन का उल्लंघन माना था।

‘वंशवादी राजनीति’ पर लेख से बढ़ी थी नाराजगी

पार्टी नेतृत्व की नाराजगी की एक बड़ी वजह थरूर द्वारा लिखा गया एक लेख भी था, जिसमें उन्होंने “राजनीतिक नेतृत्व को जन्मसिद्ध अधिकार” मानने वाली सोच और वंशवादी राजनीति की आलोचना की थी। इसे सीधे तौर पर गांधी परिवार पर कटाक्ष के रूप में देखा गया था। थरूर ने इन सभी मुद्दों पर अपनी बात निजी तौर पर नेतृत्व के सामने रखने की इच्छा जताई थी, जिसे गुरुवार की बैठक में पूरा किया गया। उन्होंने साफ कहा कि वे पिछले 17 वर्षों से पार्टी में हैं और उनकी टिप्पणियां हमेशा राष्ट्रहित से प्रेरित होती हैं, न कि किसी राजनीतिक अवसरवाद से।

केरल चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता का प्रयास

विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में होने वाले केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपने किसी भी कद्दावर नेता को नाराज नहीं करना चाहती। थरूर केरल में पार्टी का एक बड़ा चेहरा हैं और उनकी लोकप्रियता युवाओं व शिक्षित वर्ग के बीच काफी अधिक है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ इस बैठक का उद्देश्य चुनाव से पहले सभी शिकायतों का निवारण करना और एक संयुक्त मोर्चा तैयार करना था। थरूर ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल नहीं हैं और उनका पूरा ध्यान पार्टी को मजबूत करने पर है।

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