CBI raid Kolkata: कोलकाता में 1000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई
CBI raid Kolkata: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया है। यह कार्रवाई लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले से जुड़ी हुई है, जिसमें एक निजी वित्त कंपनी के प्रमोटरों पर गंभीर आरोप लगे हैं। सीबीआई की कई टीमों ने शहर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ छापेमारी की है, जिससे आर्थिक अपराध जगत में हड़कंप मच गया है।

वित्त कंपनी के ठिकानों पर सुरक्षा बलों के साथ छापेमारी
सीबीआई के अधिकारियों के अनुसार, यह तलाशी अभियान कोलकाता स्थित एक प्रमुख वित्त कंपनी के प्रमोटरों के कार्यालयों और उनके निजी आवासों पर चलाया जा रहा है। जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए, जिन स्थानों पर छापेमारी चल रही है, वहां सुरक्षा के लिए अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। मुख्य रूप से अलीपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में एजेंसी की टीमें दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों को खंगाल रही हैं। केंद्रीय एजेंसी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक से लिए गए फंड का वास्तविक उपयोग कहां किया गया।
धन की हेराफेरी और ऋण समझौते के उल्लंघन का आरोप
यह पूरा मामला सार्वजनिक क्षेत्र के एक प्रमुख बैंक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत पर आधारित है। बैंक का आरोप है कि पूर्वी कोलकाता की इस वित्त कंपनी ने व्यवसाय विस्तार और कर्ज उपलब्ध कराने के नाम पर बैंक से भारी भरकम राशि ली, लेकिन बाद में उस धन की हेराफेरी की गई। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कथित गबन की यह प्रक्रिया साल 2014 से 2020 के बीच अंजाम दी गई थी। जांच एजेंसी ने इस मामले में वित्त कंपनी के दो मुख्य निदेशकों और उनकी एक सहयोगी फर्म को प्राथमिक तौर पर आरोपी बनाया है।
ऋण अदायगी में चूक और करोड़ों रुपये का अग्रिम भुगतान
बैंक द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य कंपनी ने शुरुआत में 730.82 करोड़ रुपये का अग्रिम लिया था, जबकि उसकी सहयोगी फर्म ने 260.20 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया था। समय के साथ कंपनियों की जरूरत को देखते हुए बैंक ने चरणबद्ध तरीके से अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की थी। हालांकि, कुछ समय बाद दोनों ही कंपनियों ने ऋण समझौते की शर्तों का उल्लंघन करना शुरू कर दिया। कंपनियों की ओर से किश्तों का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा था, जिसके बाद बैंक ने आंतरिक जांच शुरू की और मामले को धोखाधड़ी की श्रेणी में पाया।
कई अन्य बैंकों से भी हजारों करोड़ के कर्ज का खुलासा
सीबीआई की प्रारंभिक जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी कंपनियों ने केवल एक ही बैंक नहीं, बल्कि कम से कम छह अन्य बैंकों से भी कई हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस ऋण राशि का एक बड़ा हिस्सा अब तक चुकाया नहीं गया है। साल 2023 में संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने औपचारिक रूप से 1,000 करोड़ रुपये के इस घोटाले की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सीबीआई ने दोनों कंपनियों और उनके प्रमोटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही शुरू की। आज की छापेमारी इसी जांच प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



