स्वास्थ्य

Pre Marital Screening: खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी है मेडिकल कुंडली, शादी से पहले जरूर कराएं ये जांचें

Pre Marital Screening: भारतीय समाज में विवाह को दो आत्माओं और परिवारों का पवित्र मिलन माना जाता है। शादी की तैयारियों के दौरान अक्सर हम कपड़ों, गहनों, वेन्यू और कुंडली मिलान पर हफ्तों का समय बिता देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस साथी के साथ आप पूरी जिंदगी बिताने जा रहे हैं, उसका और आपका स्वास्थ्य एक-दूसरे के अनुकूल है या नहीं? चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि आज के दौर में प्री-मैरिटल मेडिकल स्क्रीनिंग उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि सामाजिक रस्में। यह प्रक्रिया न केवल दंपति को शारीरिक समस्याओं से बचाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को भी सुरक्षित करती है।

Pre Marital Screening: खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी है मेडिकल कुंडली, शादी से पहले जरूर कराएं ये जांचें
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हृदय स्वास्थ्य और कोलेस्ट्रॉल की जांच है अनिवार्य

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खान-पान के कारण युवाओं में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। कम उम्र में हृदय संबंधी समस्याओं का आना अब आम बात हो गई है। ऐसे में विवाह बंधन में बंधने से पहले ईसीजी और लिपिड प्रोफाइल जैसे टेस्ट करवाना बुद्धिमानी है। ये जांचें शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर और हृदय की धड़कनों की स्थिति को स्पष्ट करती हैं। यदि परिवार में पहले से किसी को दिल की बीमारी रही है, तो ये टेस्ट और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं ताकि समय रहते जीवनशैली में जरूरी सुधार किए जा सकें और भविष्य के जोखिमों को कम किया जा सके।

डायबिटीज और मेटाबॉलिज्म पर रखें पैनी नजर

भारत में मधुमेह के बढ़ते मामलों को देखते हुए शुगर की जांच कराना बहुत जरूरी हो गया है। कई बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे प्री-डायबिटिक स्टेज में हैं। एचबीए1सी टेस्ट एक ऐसा माध्यम है जो पिछले तीन महीनों के रक्त शर्करा के औसत स्तर की सटीक जानकारी देता है। शादी के बाद का जीवन शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों से भरा होता है, और अनियंत्रित डायबिटीज न केवल ऊर्जा के स्तर को प्रभावित करती है, बल्कि गर्भधारण के समय भी कई तरह की मेडिकल जटिलताएं पैदा कर सकती है। इसलिए अपनी स्वास्थ्य रिपोर्ट को लेकर पारदर्शिता रखना एक बेहतर शुरुआत है।

प्रजनन क्षमता और हार्मोनल संतुलन का आकलन

संतान सुख की चाहत हर नवविवाहित जोड़े को होती है, लेकिन बदलती लाइफस्टाइल ने प्रजनन क्षमता पर गहरा असर डाला है। विशेषज्ञों की सलाह है कि पुरुषों को स्पर्म काउंट एनालिसिस और महिलाओं को पेल्विक अल्ट्रासाउंड या हार्मोनल प्रोफाइल टेस्ट जरूर करवाने चाहिए। पीसीओएस जैसी समस्याएं आज महिलाओं में बहुत सामान्य हैं, जिनका समय पर पता चलने से उपचार आसान हो जाता है। इन जांचों का उद्देश्य एक-दूसरे की कमियां निकालना नहीं, बल्कि किसी भी संभावित चुनौती का मिलकर सामना करना और एक स्वस्थ भविष्य की योजना बनाना है।

संक्रामक रोगों से सुरक्षा और आपसी विश्वास का आधार

एचआईवी और यौन संचारित रोगों (एसटीडी) की जांच को अक्सर सामाजिक वर्जनाओं के कारण नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, यह आपसी भरोसे की सबसे मजबूत कड़ी है। ये बीमारियां केवल गलत आदतों से ही नहीं, बल्कि संक्रमित सुई या रक्त के माध्यम से भी शरीर में पहुंच सकती हैं। इन जांचों के जरिए आप न केवल अपने जीवनसाथी को संक्रमित होने से बचाते हैं, बल्कि अपनी होने वाली संतान को भी जन्मजात बीमारियों के खतरे से दूर रखते हैं। यह एक जिम्मेदार नागरिक और एक जागरूक पार्टनर होने की पहचान है।

क्यों जरूरी है स्वास्थ्य रिपोर्ट का मिलान

अंत में, हमें यह समझना होगा कि मेडिकल टेस्ट करवाना किसी पर संदेह करना नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सुरक्षा का भाव है। जिस तरह हम आर्थिक सुरक्षा के लिए बीमा कराते हैं, ठीक उसी तरह ये मेडिकल टेस्ट आपके वैवाहिक जीवन का स्वास्थ्य बीमा हैं। यह आपको मानसिक शांति प्रदान करते हैं कि आप एक स्वस्थ नींव पर अपने नए घर का निर्माण कर रहे हैं। चिकित्सा विज्ञान की मदद से आप उन अनचाहे तनावों से बच सकते हैं जो शादी के कुछ सालों बाद अचानक सामने आ सकते हैं। जागरूक बनें और एक स्वस्थ कल की शुरुआत करें।

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