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Aviation accident: बारामती में लैंडिंग के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त, जांच में जुटीं एजेंसियां

Aviation accident: महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार सुबह एक निजी विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। विमान पुणे से बारामती की ओर आ रहा था और एक निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उड़ान भरने की जानकारी सामने आई है। दुर्घटना की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और विमानन विभाग से जुड़े अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने भी हादसे की सूचना मिलने की पुष्टि की है। फिलहाल दुर्घटना के सटीक कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

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शुरुआती जांच में तकनीकी खराबी की आशंका

प्रारंभिक रिपोर्टों में विमान में तकनीकी खामी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अधिकारी साफ कर रहे हैं कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच पूरी की जाएगी। डीजीसीए के साथ अन्य संबंधित एजेंसियां भी जांच प्रक्रिया में शामिल हैं। विमान के ब्लैक बॉक्स, मेंटेनेंस रिकॉर्ड और उड़ान से जुड़े तकनीकी डेटा की गहन पड़ताल की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना किस वजह से हुई।

पायलट प्रशिक्षण और निर्णय क्षमता की भूमिका

एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि विमान हादसों के पीछे केवल मशीनरी ही नहीं, बल्कि मानवीय निर्णय भी अहम भूमिका निभाते हैं। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स की एविएशन एंड टूरिज्म एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन डॉ. सुभाष गोयल के अनुसार, सुरक्षित उड़ान के लिए पायलट को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ लंबा प्रशिक्षण, विमान के मैकेनिकल सिस्टम की गहरी समझ और परिस्थितियों के अनुरूप त्वरित निर्णय लेने की क्षमता आवश्यक होती है। उड़ान से पहले रूट प्लानिंग, मौसम का सटीक आकलन और संभावित जोखिमों की तैयारी सुरक्षित संचालन की बुनियाद मानी जाती है।

मौसम और अचानक बदले हालात भी बनते हैं कारण

हर विमान को उड़ान से पहले तकनीकी टीम और मौसम विभाग की अनुमति के बाद ही रवाना किया जाता है, इसके बावजूद कई बार हालात अचानक बदल जाते हैं। खराब मौसम, तेज हवाएं, घना कोहरा या पक्षी से टकराव जैसी घटनाएं उड़ान के दौरान गंभीर जोखिम पैदा कर सकती हैं। खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के समय ऐसी परिस्थितियां पायलटों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं।

वैश्विक रिपोर्ट क्या कहती हैं

यूरोपियन ट्रांसपोर्ट सेफ्टी काउंसिल की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में विमान दुर्घटनाओं के पीछे तकनीकी खराबी एक प्रमुख कारण मानी जाती है। इंजन, नेविगेशन सिस्टम या अन्य अहम तकनीकी हिस्सों में आई गड़बड़ी कई बार हादसे की वजह बनती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि खराब मौसम की स्थिति में पायलटों को बेहद सीमित समय में फैसले लेने पड़ते हैं, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

लैंडिंग और टेकऑफ सबसे संवेदनशील चरण

एविएशन सेफ्टी नेटवर्क के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2023 के बीच दुनियाभर में 813 विमान हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 1,473 लोगों की जान गई। इन हादसों में सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं लैंडिंग के दौरान हुईं। भारत में इसी अवधि में 14 विमान हादसे सामने आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विमान के इंजन और तकनीकी सिस्टम पर सबसे ज्यादा दबाव रहता है, जिससे किसी भी तकनीकी खामी का असर तुरंत सामने आ सकता है।

दुर्घटना के बाद आग क्यों फैलती है तेजी से

विमान में मौजूद ईंधन, हाइड्रोलिक ऑयल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ दुर्घटना के बाद आग लगने का बड़ा कारण बनते हैं। क्रैश के समय ईंधन टैंक के क्षतिग्रस्त होने पर बाहर निकला ईंधन कुछ ही सेकंड में आग पकड़ लेता है, जिससे हालात और गंभीर हो जाते हैं। यही वजह है कि विमान हादसों में आग लगने की घटनाएं अक्सर जानलेवा साबित होती हैं।

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