Ganga Water Crisis: हरिद्वार के 10 प्रमुख घाटों पर गंगा का जलस्तर घटा, डुबकी लगाना हुआ मुश्किल…
Ganga Water Crisis: धर्मनगरी हरिद्वार में इन दिनों गंगा के अस्तित्व और श्रद्धालुओं की आस्था पर गहरा संकट मंडरा रहा है। शहर के लगभग 10 प्रमुख घाटों पर गंगा का जलस्तर तेजी से कम होने के कारण तीर्थयात्रियों में भारी निराशा देखी जा रही है। स्थिति इतनी विकट हो गई है कि घाटों से पानी करीब सात फीट तक पीछे खिसक गया है, जिससे लगभग एक किलोमीटर के दायरे में (River Water Depletion) की समस्या खड़ी हो गई है। स्नान के लिए पर्याप्त जल न होने के कारण दूर-दराज से आए श्रद्धालु बिना डुबकी लगाए ही वापस लौटने को मजबूर हैं, जो कि हरिद्वार की धार्मिक छवि के लिए एक चिंताजनक संकेत है।

भागीरथी बिंदु से कांगड़ा घाट तक सूखी नजर आ रही गंगा
हरिद्वार के ऊपरी क्षेत्रों से लेकर निचले घाटों तक गंगा की अविरल धारा अब नाममात्र की रह गई है। भागीरथी बिंदु, भीमगोड़ा और कांगड़ा घाट जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर जलस्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कई घाटों पर जहां कभी लहरें सीढ़ियों को छूती थीं, वहां अब सिर्फ सूखी रेत और नुकीले पत्थर ही (Ecological Flow Issues) की गवाही दे रहे हैं। श्रद्धालुओं को जल तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों से काफी नीचे उतरकर जाना पड़ रहा है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के लिए स्नान करना न केवल कठिन बल्कि असुरक्षित भी हो गया है।
इन प्रमुख घाटों पर गहराया जल संकट और बढ़ी परेशानी
गंगा के जलस्तर में आई इस कमी का सबसे अधिक प्रभाव हरिद्वार के उन घाटों पर पड़ा है जहां सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती है। भागीरथी बिंदु के पास स्थित घाट संख्या एक, शिव की पैड़ी, रस्तोगी घाट और लोकनाथ घाट पूरी तरह से (Natural Resource Management) के अभाव में सूखे पड़े हैं। इसके अलावा शालिग्राम घाट, वेद निकेतन घाट, दुर्गा घाट, पंजाब सिंह क्षेत्र घाट, निर्धन कीर्तन घाट और शताब्दी घाट पर भी गंगा की धारा सिमट गई है। इन स्थानों पर स्नान करने के लिए घुटने तक पानी भी उपलब्ध नहीं है, जिससे तीर्थाटन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
धार्मिक कर्मकांड और अंतिम संस्कार में आ रही बाधा
जलस्तर घटने का असर केवल सामान्य स्नान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव सनातन धर्म के महत्वपूर्ण संस्कारों पर भी पड़ रहा है। हरिद्वार के श्मशान घाट पर होने वाले अंतिम संस्कार और उसके पश्चात किए जाने वाले (Religious Ritual Obstruction) के लिए भी पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। गंगा जल की कमी के कारण कर्मकांड संपन्न कराने वाले पुरोहितों और शोकाकुल परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आस्था के इस केंद्र पर पानी की कमी ने यहां की पूरी व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है।
स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं ने की प्रशासन से मांग
हरिद्वार के स्थानीय व्यापारियों, पुरोहितों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं में इस स्थिति को लेकर गहरा रोष है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को बांधों से पानी छोड़ने की प्रक्रिया और (Public Interest Litigation) से जुड़ी चिंताओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। मांग की जा रही है कि सभी प्रमुख स्नान घाटों पर गंगा की पर्याप्त जलधारा सुनिश्चित की जाए ताकि यहां आने वाले लाखों लोगों की आस्था को ठेस न पहुंचे। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो हरिद्वार के पर्यटन और धार्मिक महत्व पर इसका लंबे समय तक प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।



