Political Leadership Transition: राजनीति में बड़ा बदलाव! तेजस्वी यादव बने राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष
Political Leadership Transition: बिहार की क्षेत्रीय राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। पटना में आयोजित राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक में तेजस्वी यादव को पार्टी का नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया गया है। इस बैठक में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती सहित राजद के तमाम दिग्गज नेता मौजूद थे। इस फैसले के साथ ही पार्टी ने अपने भविष्य की कमान औपचारिक रूप से युवा हाथों में सौंप दी है। राजनीतिक गलियारों में इसे एक (Strategic Organizational Rebranding) के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि अब तेजस्वी यादव के पास अध्यक्ष की सभी शक्तियाँ मौजूद होंगी।

लालू प्रसाद यादव ने सौंपी कमान और दिया सर्टिफिकेट
राजद की इस कार्यकारिणी बैठक में प्रस्ताव भोला यादव द्वारा रखा गया, जिस पर सभी सदस्यों ने हाथ उठाकर अपनी सहमति दी। लालू प्रसाद यादव के अस्वस्थ होने के कारण पार्टी ने पहली बार ‘कार्यकारी अध्यक्ष’ का पद सृजित किया है। लालू यादव ने खुद तेजस्वी यादव को इस नए पद का सर्टिफिकेट सौंपा। बैठक के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने इसका आधिकारिक ऐलान किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह (Dynamic Youth Representation) का समय है और तेजस्वी ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी नेतृत्व क्षमता को साबित भी किया है।
राजद में एक नए युग की शुरुआत का सोशल मीडिया संदेश
तेजस्वी यादव को कार्यकारी बॉस चुने जाने के तुरंत बाद राजद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इसे ‘एक नए युग का शुभारंभ’ करार दिया। पार्टी नेताओं का तर्क है कि तेजस्वी यादव ही बिहार और राजद के भविष्य के एकमात्र चेहरा हैं। इस निर्णय से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने की कोशिश की गई है। जानकारों का कहना है कि यह (Political Power Shift) आगामी चुनावों को देखते हुए काफी अहम है, क्योंकि अब तेजस्वी यादव स्वतंत्र रूप से गठबंधन और संगठन से जुड़े बड़े फैसले लेने के लिए अधिकृत होंगे।
स्थापना के 27 साल बाद नेतृत्व की दूसरी पंक्ति तैयार
वर्ष 1997 में जनता दल से अलग होकर लालू प्रसाद यादव ने राजद की स्थापना की थी और तब से वे ही शीर्ष पद पर काबिज थे। हालांकि पार्टी के भीतर उनकी सर्वोच्चता पर कभी कोई सवाल नहीं उठा, लेकिन 80 वर्ष की आयु और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए (Executive Decision Making) के लिए एक सक्रिय नेता की जरूरत महसूस की जा रही थी। यही कारण है कि 20 से अधिक राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों ने पटना पहुंचकर इस ऐतिहासिक फैसले पर अपनी मुहर लगाई और दूसरी पीढ़ी को कमान सौंपी।
जदयू का तीखा हमला और परिवारवाद पर तंज
तेजस्वी यादव की इस नई ताजपोशी पर विपक्षी दल जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने कड़ा प्रहार किया है। जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि राजद हमेशा से एक परिवार की पार्टी रही है और इस फैसले ने फिर से परिवारवाद को पुख्ता कर दिया है। उन्होंने तेजस्वी यादव पर चल रहे कानूनी मामलों का जिक्र करते हुए इसे (Corruption Allegation Controversy) से जोड़ दिया। सत्तापक्ष का कहना है कि जिस व्यक्ति पर कई मुकदमे चल रहे हों, उसे अध्यक्ष बनाना बिहार की लोकतांत्रिक मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।
आगामी चुनावों के लिए राजद की नई रणनीति
कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद तेजस्वी यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को फिर से सत्ता के करीब ले जाना है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद संगठन को फिर से खड़ा करना उनकी प्राथमिकता होगी। बैठक में देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और भविष्य की रणनीति पर भी चर्चा की गई। तेजस्वी यादव अब पार्टी के (Grassroots Mobilization Strategy) को आधुनिक तकनीक और युवाओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएंगे। माना जा रहा है कि अब पार्टी के भीतर टिकट वितरण से लेकर सांगठनिक नियुक्तियों तक तेजस्वी का ही अंतिम निर्णय मान्य होगा।



