Ram Mandir Flag Hoisting: अयोध्या में ध्वजारोहण समारोह पर उठे सवाल, राजनीति, परंपरा और सामाजिक सरोकार
Ram Mandir Flag Hoisting: अयोध्या एक बार फिर राष्ट्रीय सुर्खियों (national headlines) में है, और इसकी वजह केवल धार्मिक उत्साह नहीं, बल्कि उससे जुड़ी राजनीतिक हलचल भी है। प्रधानमंत्री द्वारा रामजन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण के ठीक बाद देशभर में इस आयोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। यह आयोजन भव्यता, आस्था और परंपरा का प्रतीक था, लेकिन इसके साथ ही कुछ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी उभर आए, जिन्होंने पूरे माहौल को और भी गर्मा दिया।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के आरोपों से बढ़ी सियासी बहस
प्रधानमंत्री के ध्वजारोहण समारोह (Flag hoisting ceremony) के तुरंत बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि अयोध्या के स्थानीय सांसद अवधेश प्रसाद को इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया, और ऐसा उनके अनुसार इसलिए किया गया क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं। यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में बयानबाज़ी और तेज हो गई। सत्ताधारी दल के समर्थकों ने इसे आधारहीन बताया, जबकि विपक्ष ने इसे सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दे के रूप में उठाया। यह पूरा विवाद इस बात को दर्शाता है कि धार्मिक आयोजनों के साथ अक्सर राजनीतिक सन्दर्भ किस तरह जुड़ जाते हैं।
ध्वजारोहण समारोह में प्रधानमंत्री और शीर्ष संतों की उपस्थिति
अयोध्या में आयोजित इस विशेष अवसर (Ram Mandir Flag Hoisting) पर राम मंदिर परिसर का माहौल अत्यंत पावन था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (Chief Minister of Uttar Pradesh) योगी आदित्यनाथ ने रामलला के दरबार (Ramlala’s court) में विधि-विधान के साथ दर्शन और पूजा की। मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों ने सभी विशिष्ट अतिथियों को राम नाम अंकित गमछा भेंट किया और प्रसाद प्रदान किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा वातावरण भक्ति, आध्यात्मिकता और उत्साह से ओतप्रोत हो। इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं था, बल्कि राम मंदिर की गरिमा और सांस्कृतिक महत्व को दुनिया के सामने पुनर्स्थापित करना भी था।
ध्वजा की विशेषताएँ और उसके आध्यात्मिक प्रतीक
इस आयोजन का केंद्र बिंदु रही वह ध्वजा, जिसे राम मंदिर के शिखर (The pinnacle of the Ram Temple) पर स्थापित किया गया। ध्वज की ऊंचाई दस फीट और लंबाई बीस फीट रखी गई है। इसमें दर्शाए गए प्रतीक भारतीय संस्कृति और रामायण से गहराई से जुड़े हुए हैं। ध्वज पर अंकित चमकता सूर्य भगवान राम के तेज, साहस और आदर्श को दर्शाता है। इसके साथ ही ‘ॐ’ का चिन्ह आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक है, जबकि कोविदार वृक्ष की आकृति प्राचीन भारतीय परंपराओं में पवित्रता और समृद्धि का संकेत मानी जाती है। यह ध्वजा केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है।



