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Indian SUV market trends 2026: विदेशी ब्रांड्स को पछाड़कर टाटा और महिंद्रा ने भारतीय कार बाजार पर किया कब्जा

Indian SUV market trends 2026: भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जिसकी कल्पना एक दशक पहले नामुमकिन थी। मारुति और ह्यूंदै जैसी विदेशी कंपनियों के वर्चस्व वाले बाजार में अब (SUV segment growth in India) ने पूरी कहानी ही पलट दी है। 2025-26 के आंकड़े गवाह हैं कि अब भारतीय ग्राहकों की प्राथमिकताएं बदल चुकी हैं। सिआम (SIAM) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पैसेंजर व्हीकल बाजार में एसयूवी और एमपीवी की हिस्सेदारी बढ़कर 66% तक पहुंच गई है। यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं है, बल्कि यह टाटा और महिंद्रा जैसी स्वदेशी कंपनियों की उस मेहनत का नतीजा है जिसने ग्लोबल ब्रांड्स को बैकफुट पर धकेल दिया है।

Indian SUV market trends 2026
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एसयूवी अब केवल गाड़ी नहीं बल्कि एक ‘रुतबा’ है

आज के दौर में कार खरीदना केवल एक जरूरत नहीं रह गया है, बल्कि यह खरीदार की जीवनशैली और पहचान का प्रतीक बन चुका है। भारतीय युवाओं के बीच (demand for bold car designs) ने एसयूवी को एक नई परिभाषा दी है। अब लोग ऐसी गाड़ियां चाहते हैं जो सड़क पर अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करा सकें और जिनमें सुरक्षा के साथ-साथ अत्याधुनिक डिजिटल फीचर्स भी हों। विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा और महिंद्रा ने ग्राहकों के इसी ‘स्टेटस और सेफ्टी’ वाले मनोविज्ञान को बखूबी समझा है। जहां महिंद्रा शहरी युवाओं को एक बेखौफ अंदाज देती है, वहीं टाटा अपनी मजबूत बनावट से भरोसे का प्रतीक बन गई है।

2025 के आंकड़ों ने ह्यूंदै और मारुति को चौंकाया

बाजार के समीकरण अब पूरी तरह बदल चुके हैं और फाडा (FADA) के ताजा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। साल 2025 में महिंद्रा ने एक लंबी छलांग लगाते हुए अपनी बिक्री को 5.93 लाख यूनिट्स तक पहुंचा दिया, जिससे उसकी (Mahindra market share increase) बढ़कर 13.25% हो गई। इस शानदार प्रदर्शन के साथ ही महिंद्रा ने करीब 20 साल से दूसरे नंबर पर काबिज ह्यूंदै को पछाड़ दिया है। ह्यूंदै अब खिसक कर चौथे पायदान पर पहुंच गई है, जो विदेशी कंपनियों के लिए एक बड़ा खतरे का संकेत है। मारुति सुजुकी अभी भी नंबर एक पर तो है, लेकिन महंगे एसयूवी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण उसका मार्केट शेयर लगातार गिर रहा है।

महिंद्रा की रणनीति: ‘थार’ और ‘स्कॉर्पियो’ का जादू

महिंद्रा की इस अभूतपूर्व सफलता के पीछे कोई तुक्का नहीं, बल्कि एक सोची-समझी दूरगामी रणनीति है। थार, स्कॉर्पियो-एन और XUV700 जैसे मॉडल्स ने बाजार में ऐसी दीवानगी पैदा की है कि (brand positioning of Mahindra) अब एक प्रीमियम लेवल पर पहुंच चुकी है। महिंद्रा ने केवल अच्छी गाड़ियां ही नहीं बनाईं, बल्कि अपनी मार्केटिंग का तरीका भी पूरी तरह बदल दिया है। अब वे सोशल मीडिया कैंपेन और डिजिटल टीजर के जरिए युवाओं के बीच एक ऐसी ‘चाहत’ पैदा करते हैं कि लोग महीनों तक गाड़ी का इंतजार करने को तैयार रहते हैं। 2026 की शुरुआत ही कंपनी ने 90,000 नई बुकिंग्स के साथ की है।

टाटा मोटर्स: मध्यम वर्ग के लिए एसयूवी का सपना सच

टाटा मोटर्स ने देश के आम आदमी को वह अहसास कराया है जो पहले सिर्फ अमीरों तक सीमित था। टाटा पंच जैसी माइक्रो-एसयूवी ने (affordable SUV options in India) की एक नई श्रेणी खड़ी कर दी है, जहां हैचबैक की कीमत में लोगों को 5-स्टार सुरक्षा और शानदार लुक मिल रहा है। टाटा ने न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि इलेक्ट्रिक सेगमेंट में भी अपनी बादशाहत कायम रखी है। 2.5 लाख से ज्यादा ईवी बेचकर टाटा ने यह साबित कर दिया है कि वह भविष्य की तकनीक में भी सबसे आगे है। नई टाटा सिएरा को पहले ही दिन मिली 70,000 बुकिंग्स इस ब्रांड के प्रति लोगों के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती हैं।

सुरक्षा और आधुनिकता के साथ बदलती ग्राहक की सोच

आज का भारतीय ग्राहक पहले की तुलना में कहीं अधिक जागरूक है और वह ‘सस्ती कार’ के बजाय ‘सुरक्षित कार’ को चुन रहा है। टाटा की गाड़ियों को मिलने वाली (Global NCAP safety ratings) ने ग्राहकों के मन में यह विश्वास जगाया है कि वे अपनी और अपने परिवार की जान से समझौता नहीं कर रहे हैं। यही वजह है कि अब मारुति की माइलेज वाली गाड़ियों के बजाय लोग टाटा की मजबूत बॉडी वाली कारों को तरजीह दे रहे हैं। विदेशी कंपनियों के लिए अब चुनौती सिर्फ फीचर्स की नहीं, बल्कि उस भरोसे को फिर से जीतने की है जिसे देसी ब्रांड्स ने अपनी सुरक्षा नीतियों से हासिल कर लिया है।

सर्विस नेटवर्क: सफलता की राह में एक बड़ी चुनौती

इतनी बड़ी जीत के बाद भी टाटा और महिंद्रा के सामने एक बड़ी दीवार खड़ी है, और वह है ‘आफ्टर-सेल्स सर्विस’। सर्विस क्वालिटी के मामले में आज भी मारुति और टोयोटा को (best car service experience) के लिए जाना जाता है। टाटा और महिंद्रा के ग्राहकों के ऑनलाइन अनुभव अक्सर मिले-जुले रहते हैं, जो लंबे समय में ब्रांड की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन देसी कंपनियों को अपनी बादशाहत कायम रखनी है, तो उन्हें अपने सर्विस सेंटर्स और मैकेनिक ट्रेनिंग पर भारी निवेश करना होगा ताकि ग्राहक को गाड़ी खरीदने के बाद भी वही खुशी मिले जो शोरूम में मिली थी।

भविष्य का भारत: जब ट्रेंड सेटर्स बने स्वदेशी ब्रांड्स

भारतीय ऑटो बाजार अब उस दौर से बाहर निकल चुका है जहां हम केवल विदेशी तकनीक की नकल करते थे। आज टाटा और महिंद्रा ग्लोबल लेवल पर ट्रेंड सेट कर रहे हैं। लोग अब सिर्फ कीमत नहीं देख रहे, बल्कि वे अपनी (car as a status symbol) को प्राथमिकता दे रहे हैं। भविष्य में कॉम्पिटिशन और भी कड़ा होने वाला है क्योंकि टोयोटा जैसे ब्रांड्स भी अपनी हाइब्रिड तकनीक के साथ बाजार में मजबूती से वापसी कर रहे हैं। फिर भी, आज जिस तरह से भारतीय ग्राहक भावनात्मक रूप से अपने देसी ब्रांड्स से जुड़े हैं, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अब सड़कों पर असली राज ‘मेक इन इंडिया’ का ही होगा।

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