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World Economic Forum Davos 2026: अब ट्रंप की टोली और दुनिया के दिग्गजों के बीच गूंजेगा भारत का नाम

World Economic Forum Davos 2026: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की सालाना बैठक का आगाज सोमवार से दावोस की बर्फीली वादियों में हो रहा है। पांच दिनों तक चलने वाले इस हाई-प्रोफाइल (Global Strategic Leadership) मंथन में दुनिया भर के करीब 3,000 प्रतिनिधि अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इस बार आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने मंत्रिमंडल के पांच दिग्गज सदस्यों के साथ यहां पहुंच रहे हैं, जो वैश्विक नीतियों की नई दिशा तय करने का संकेत है।

World Economic Forum Davos 2026
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डोभाल और मंत्रियों की फौज के साथ भारत की धमक

दावोस के इस मंच पर भारत की भागीदारी इस बार ऐतिहासिक और बेहद प्रभावशाली नजर आ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के नेतृत्व में भारत का एक (Diplomatic Empowerment Mission) वहां पहुंच चुका है। उनके साथ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रल्हाद जोशी और के राम मोहन नायडू जैसे कद्दावर नेता मौजूद हैं, जो विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखेंगे।

छह राज्यों के मुख्यमंत्री बनाएंगे निवेश का माहौल

भारत की आर्थिक शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए इस बार छह राज्यों के मुख्यमंत्री दावोस के मैदान में उतरे हैं। महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस से लेकर आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू तक, सभी (Foreign Direct Investment) को आकर्षित करने के लिए वहां मौजूद रहेंगे। असम के हिमंत बिस्वा सरमा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी और झारखंड के हेमंत सोरेन भी वैश्विक निवेशकों को अपने राज्यों की खूबियों से रूबरू कराएंगे।

स्मृति ईरानी और कॉर्पोरेट जगत के कप्तानों की मौजूदगी

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन ईरानी इस बार एक नई और प्रभावशाली भूमिका में नजर आएंगी। वे ‘अलायंस फॉर ग्लोबल गुड’ की चेयरपर्सन के रूप में (Gender Equity Advocacy) को लेकर अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का हिस्सा बनेंगी। उनके साथ भारत के सबसे बड़े बिजनेस टायकून जैसे मुकेश अंबानी, एन. चंद्रशेखरन और संजीव बजाज भी शामिल हैं, जो भारतीय बाजार की क्षमता को दुनिया के सामने पेश करेंगे।

इंडिया पवेलियन का शानदार और भविष्यवादी संदेश

दावोस के केंद्र में बना इंडिया पवेलियन इस बार सबका ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। यहां का मुख्य नारा ‘भारत के साथ पार्टनरशिप करें और भविष्य को सब्सक्राइब करें’ पूरी दुनिया को (Global Economic Partnership) के लिए आमंत्रित कर रहा है। यह संदेश साफ देता है कि आने वाला समय भारत का है और जो आज भारत के साथ जुड़ेगा, वही भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था पर राज करेगा।

आईटी दिग्गजों के एआई लाउंज और तकनीकी जलवा

भारत की तकनीकी ताकत को दिखाने के लिए टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो जैसी दिग्गज कंपनियों ने अपने विशेष एआई लाउंज तैयार किए हैं। इन स्टॉल्स के जरिए (Artificial Intelligence Innovation) के क्षेत्र में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता को प्रदर्शित किया जा रहा है। दुनिया भर के निवेशक यह देख सकेंगे कि कैसे भारतीय आईटी कंपनियां भविष्य की समस्याओं का समाधान तकनीक के जरिए खोज रही हैं।

राज्यों के अलग पवेलियन से दिखेगी भारत की विविधता

केंद्र सरकार के साथ-साथ विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने अलग-अलग पवेलियन सजाए हैं ताकि वे अपनी क्षेत्रीय पहचान को ग्लोबल ब्रांड बना सकें। उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों ने (Regional Economic Development) की अपनी कहानियों को प्रदर्शित किया है। यह पहली बार है जब भारत के इतने सारे राज्य एक साथ इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी औद्योगिक नीतियों का प्रचार कर रहे हैं।

दावोस में सुरक्षा का ऐसा पहरा कि परिंदा भी पर न मार सके

इतने बड़े वैश्विक जमावड़े को देखते हुए दावोस की सुरक्षा को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। करीब पांच हजार से अधिक सशस्त्र जवानों की तैनाती के साथ (High Tech Security Surveillance) का उपयोग किया जा रहा है। चप्पे-चप्पे पर स्नाइपर्स, एआई-सक्षम ड्रोन और जासूसी रोधी उपकरणों के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि आयोजन निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।

क्या भारत बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

इस पांच दिवसीय बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण चर्चा का विषय भारत की विकास दर होने वाली है। दुनिया भर के विशेषज्ञ इस बात पर मंथन करेंगे कि (Third Largest Economy Vision) को भारत कितनी जल्दी हकीकत में बदल सकता है। विभिन्न द्विपक्षीय बैठकों के जरिए भारत अपनी जीडीपी और बुनियादी ढांचे में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों को पेश करेगा, जो निवेशकों के भरोसे को और मजबूत करेगा।

वैश्विक मंच पर नए भारत की अटूट संकल्पशक्ति

दावोस की यह बैठक केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहने वाली, बल्कि यह नए भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। जिस तरह से भारत (Sustainable Business Models) और समावेशी विकास की बात कर रहा है, उसने दुनिया का नजरिया बदल दिया है। आने वाले चार दिनों में होने वाले समझौते और संवाद यह तय करेंगे कि 2026 और उसके बाद की वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका कितनी निर्णायक होने वाली है।

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