Epstein Files Disclosure Update: जानें सांसदों की नो-एंट्री और 20 लाख दस्तावेजों का वो खौफनाक सच…
Epstein Files Disclosure Update: अमेरिका के सबसे चर्चित और विवादित जेफरी एपस्टीन सेक्स ट्रैफिकिंग मामले में एक नया कानूनी मोड़ आ गया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट यानी (legal department intervention) ने स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी है कि कांग्रेस के सदस्य एपस्टीन फाइल्स को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया में अदालत के जरिए दखल नहीं दे सकते। यह बयान उन राजनेताओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है जो इस मामले की फाइलों को जल्द से जल्द जनता के सामने लाने का दबाव बना रहे थे।

मैनहैटन अटॉर्नी का कड़ा रुख और अदालती अधिकार
न्यूयॉर्क के मैनहैटन में तैनात शीर्ष संघीय अभियोजक और यूएस अटॉर्नी जे क्लेटन ने एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने तर्क दिया है कि किसी भी जज के पास यह विशेष अधिकार नहीं है कि वह (independent legal oversight) के लिए किसी न्यूट्रल एक्सपर्ट या स्पेशल मास्टर की नियुक्ति करे। क्लेटन का मानना है कि गिस्लेन मैक्सवेल और एपस्टीन से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों की रिलीज प्रक्रिया पूरी तरह से प्रशासनिक दायरे में आती है और इसमें बाहरी निगरानी की आवश्यकता नहीं है।
दो दिग्गज सांसदों की मांग को लगा झटका
यह पूरा कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना और रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने फाइलों की रिलीज में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे। इन दोनों सांसदों ने आरोप लगाया था कि (legislative advocacy efforts) के बावजूद दस्तावेजों को बहुत धीमी गति से जारी किया जा रहा है, जो कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ पीड़ितों के लिए भी अपमानजनक है। सांसदों का तर्क था कि देरी की वजह से पीड़ितों को दोबारा मानसिक आघात पहुंच रहा है और न्याय की प्रक्रिया बाधित हो रही है।
असाधारण राहत मांगने पर न्याय विभाग की आपत्ति
सांसदों की मांग को खारिज करते हुए जस्टिस डिपार्टमेंट ने एक बहुत ही कड़ा और तकनीकी तर्क पेश किया है। विभाग के अनुसार, रो खन्ना और थॉमस मैसी इस आपराधिक मामले के प्रत्यक्ष पक्षकार नहीं हैं, इसलिए उन्हें (judicial relief limitations) के तहत अदालत से किसी भी प्रकार की असाधारण मदद मांगने का कोई कानूनी हक नहीं है। विभाग ने साफ किया कि जज पॉल ए. एंगेलमेयर के पास ऐसी किसी नियुक्ति का अधिकार नहीं है जो सांसदों की इच्छा के अनुरूप हो।
20 लाख दस्तावेजों का विशाल अंबार और समीक्षा
एपस्टीन मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच के दौरान एकत्रित की गई कुल फाइलों की संख्या 20 लाख से भी अधिक है। न्याय विभाग ने अदालत को सूचित किया है कि (document review process) इतनी जटिल है कि इसमें हर एक पन्ने की बारीकी से जांच करनी पड़ रही है। अब तक विभाग ने 400 से अधिक वकीलों की एक विशाल फौज इस काम में लगा दी है ताकि किसी भी संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक होने से पहले सुरक्षित किया जा सके।
कछुआ चाल से चल रही रिलीज प्रक्रिया का सच
विपक्षी नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की नाराजगी के बावजूद अब तक केवल 12,000 दस्तावेज ही सार्वजनिक किए जा सके हैं। विभाग का कहना है कि (redaction of sensitive information) की प्रक्रिया बेहद समय लेने वाली है क्योंकि कई दस्तावेजों में पीड़ितों की असली पहचान और अन्य गोपनीय डेटा छिपाना अनिवार्य है। यह सुरक्षा संबंधी सावधानियां ही वह मुख्य कारण हैं जिसकी वजह से फाइलों की रिलीज की रफ्तार उम्मीद से कहीं ज्यादा धीमी बनी हुई है।
जेफरी एपस्टीन की मौत और गिस्लेन की सजा का साया
यह मामला 2019 में तब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आया जब जेफरी एपस्टीन की न्यूयॉर्क की जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। हालांकि इसे (suicide in custody) करार दिया गया था, लेकिन आज भी कई लोग इसे साजिश के तौर पर देखते हैं। वहीं, एपस्टीन की मुख्य सहयोगी रही गिस्लेन मैक्सवेल को 2021 में नाबालिगों की तस्करी और यौन शोषण में सहायता करने के गंभीर आरोपों में 20 साल की कैद की सजा सुनाई जा चुकी है, जो फिलहाल जेल में है।
पीड़ितों की सुरक्षा और कानूनी गोपनीयता का टकराव
जस्टिस डिपार्टमेंट के सामने सबसे बड़ी चुनौती पीड़ितों के निजता के अधिकार और जनता के जानने के अधिकार के बीच संतुलन बनाना है। विभाग का दावा है कि अगर (victim privacy protection) का ध्यान नहीं रखा गया, तो फाइलों के सार्वजनिक होने से उन लोगों को खतरा हो सकता है जिन्होंने पहले ही काफी प्रताड़ना झेली है। इसी संवेदनशीलता के कारण विभाग किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार करने के मूड में नजर नहीं आ रहा है।
जल्द सौंपी जाएगी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट
अमेरिकी न्याय विभाग ने संकेत दिए हैं कि वे केवल कागजी दावों तक सीमित नहीं रहेंगे और जल्द ही अदालत के समक्ष एक विस्तृत (progress report filing) पेश करेंगे। इस रिपोर्ट में दस्तावेजों की समीक्षा की वर्तमान स्थिति और भविष्य में फाइलों को जारी करने की समयसीमा का उल्लेख हो सकता है। सरकार चाहती है कि यह पूरी प्रक्रिया कानूनी मर्यादाओं के भीतर रहकर ही संपन्न हो, ताकि भविष्य में इस पर कोई उंगली न उठा सके।
क्या कभी सामने आएगा पूरा सच
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, एपस्टीन फाइल्स को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है। दुनिया भर की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इन (classified evidence disclosure) में कुछ ऐसे बड़े नामों का खुलासा होगा जो अब तक परदे के पीछे छिपे हुए हैं। सांसदों की हार और न्याय विभाग की सख्ती के बाद अब गेंद पूरी तरह से अदालत के पाले में है, जो तय करेगी कि न्याय की इस लंबी लड़ाई में पारदर्शिता की जीत कब होगी।
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