India vs New Zealand ODI Selection Controversy: चयनकर्ताओं की मनमानी पर श्रीकांत ने किया करारा वार, आयुष बदोनी की एंट्री ने मचाया गदर
India vs New Zealand ODI Selection Controversy: भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाली आगामी वनडे सीरीज के लिए जैसे ही भारतीय टीम का एलान हुआ, क्रिकेट गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। पूर्व मुख्य चयनकर्ता और दिग्गज खिलाड़ी कृष्णमाचारी श्रीकांत ने इस बार (Cricketing Selection Transparency) को लेकर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। श्रीकांत का गुस्सा खासतौर पर आयुष बदोनी के चयन को लेकर है, जिसे वे किसी भी नजरिए से सही नहीं मान रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि चयन प्रक्रिया में अब वो पहले जैसी ईमानदारी और स्पष्टता नहीं बची है, जो कभी भारतीय क्रिकेट की पहचान हुआ करती थी।

आयुष बदोनी के प्रदर्शन पर उठे गंभीर सवाल
श्रीकांत का मानना है कि किसी भी खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम की जर्सी तब मिलनी चाहिए जब उसका बल्ला घरेलू क्रिकेट में जमकर बोला हो। बदोनी के मामले में (Domestic Cricket Performance Analysis) का हवाला देते हुए श्रीकांत ने कहा कि न तो हालिया घरेलू मैचों में और न ही आईपीएल के पिछले सीजन में उन्होंने ऐसा कुछ किया है जिसके दम पर उन्हें सीधे वनडे टीम में जगह मिल जाए। उनके अनुसार, अगर इसी तरह बिना किसी ठोस आधार के खिलाड़ियों का चयन होता रहा, तो खेल के प्रति समर्पित अन्य खिलाड़ियों का मनोबल पूरी तरह टूट जाएगा।
आईपीएल कनेक्शन और पक्षपात का सनसनीखेज आरोप
क्रिकेट की दुनिया में अक्सर आईपीएल के प्रदर्शन को टीम इंडिया का टिकट माना जाता है, लेकिन श्रीकांत ने इसे एक अलग ही मोड़ दे दिया है। उन्होंने बदोनी के लखनऊ सुपर जाएंट्स कनेक्शन का जिक्र करते हुए (IPL Mentor Influence) की ओर इशारा किया और कहा कि कुछ खास लोगों की सिफारिशों के चलते ही उन्हें टीम में एंट्री मिली है। श्रीकांत के मुताबिक, यह देखना निराशाजनक है कि काबिलियत के बजाय संपर्कों और फ्रेंचाइजी संबंधों को टीम चयन में इतनी अहमियत दी जा रही है, जो भारतीय क्रिकेट के भविष्य के लिए एक खतरनाक संकेत है।
क्या बदोनी सच में एक भरोसेमंद ऑलराउंडर हैं
चयनकर्ताओं ने बदोनी को एक ऑलराउंडर के विकल्प के तौर पर टीम में शामिल किया है, लेकिन श्रीकांत इस तर्क को सिरे से खारिज करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ एक या दो मैचों में (Bowling All Rounder Capabilities) दिखाने से कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर का ऑलराउंडर नहीं बन जाता। श्रीकांत ने सवाल उठाया कि आईपीएल के दौरान उन्हें कितनी बार गेंदबाजी करते देखा गया है? उनके अनुसार, बदोनी के पास न तो पावर-हिटिंग की क्षमता है और न ही वे अपनी गेंदबाजी से मैच का रुख पलटने का दम रखते हैं, फिर भी उन्हें यह बड़ा मौका दे दिया गया।
ऋतुराज और अक्षर पटेल की अनदेखी पर फूटा गुस्सा
श्रीकांत सबसे ज्यादा आहत ऋतुराज गायकवाड़ और अक्षर पटेल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की अनदेखी से नजर आए। उन्होंने कहा कि पिछली वनडे सीरीज में शानदार शतक जड़ने के बावजूद (Consistent Player Exclusions) का शिकार होना ऋतुराज के साथ सरासर नाइंसाफी है। श्रीकांत ने पूछा कि यदि टीम को एक बेहतर स्पिन ऑलराउंडर की जरूरत थी, तो अक्षर पटेल जैसे स्थापित खिलाड़ी को टीम से बाहर क्यों रखा गया? उनके मुताबिक, आज के दौर में टीम इंडिया के दरवाजे पर दस्तक देना काफी नहीं है, बल्कि अब टीम में घुसने के लिए ‘ट्रक तोड़कर’ घुसना पड़ता है।
टीम मैनेजमेंट का बचाव और वॉशिंगटन सुंदर की चोट
विवाद बढ़ता देख टीम मैनेजमेंट ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और बदोनी के चयन के पीछे की मजबूरी को साझा किया है। बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन सुंदर की अचानक हुई चोट के कारण (Team Balance Optimization) को ध्यान में रखते हुए बदोनी को मौका दिया गया। मैनेजमेंट का तर्क है कि वे केवल पांच मुख्य गेंदबाजों के साथ मैदान पर नहीं उतर सकते थे और बदोनी जैसा खिलाड़ी बीच के ओवरों में चार-पांच ओवर की गेंदबाजी करने में सक्षम है, जिससे कप्तान को अतिरिक्त विकल्प मिल जाता है।
इंडिया-ए का अनुभव और व्हाइट-बॉल क्रिकेट की समझ
कोच सितांशु कोटक ने बदोनी के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि उनके पास ‘इंडिया-ए’ के साथ खेलने का अच्छा एक्सपोजर है। (White Ball Cricket Experience) के आधार पर मैनेजमेंट का मानना है कि बदोनी कठिन परिस्थितियों में बल्लेबाजी करने और टीम की जरूरत के हिसाब से ढलने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, श्रीकांत इन तर्कों से सहमत नहीं दिखे और उन्होंने इसे केवल खराब चयन को छिपाने का एक तरीका बताया। अब देखना यह होगा कि मैदान पर बदोनी अपने प्रदर्शन से आलोचकों का मुंह बंद कर पाते हैं या विवाद और गहराता है।



