Solan Fire Tragedy: पूरे परिवार की चिता बन गई एक जलती अंगीठी, मलबे में दफन हो गईं मासूम की चीखें
Solan Fire Tragedy: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले से एक ऐसी हृदयविदारक खबर आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। अर्की बाजार में देर रात लगी एक भीषण आग ने नेपाली मूल के एक मासूम बच्चे की जान ले ली, जबकि कई अन्य लोग अब भी मौत और जिंदगी के बीच मलबे में दबे हुए हैं। इस (Devastating House Fire) की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में मातम और दहशत का माहौल बन गया। चश्मदीदों के अनुसार, आग की लपटें इतनी ऊंची थीं कि दूर-दूर से आसमान लाल दिखाई दे रहा था।

एक जलती अंगीठी और सिलिंडरों का वो खौफनाक धमाका
प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। बताया जा रहा है कि कड़ाके की ठंड से बचने के लिए परिवार जलती हुई अंगीठी को घर के अंदर ले गया था। इसी अंगीठी से उठी एक छोटी सी चिंगारी ने घर में रखे (Gas Cylinder Explosion) को न्योता दे दिया। देखते ही देखते करीब छह से सात सिलिंडर एक के बाद एक धमाकों के साथ फट गए, जिससे साधारण सी दिखने वाली आग ने एक भयावह अग्निकांड का रूप ले लिया और पूरे मकान को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
मलबे के ढेर में अपनों की तलाश और प्रशासन की सक्रियता
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर सक्रिय हो गईं। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए रात के अंधेरे में ही (Emergency Rescue Operation) शुरू कर दिया गया। मौके पर दो जेसीबी मशीनें लगातार पत्थर और लोहे के गाडर हटा रही हैं ताकि मलबे में फंसे 8 से 9 अन्य लोगों को सुरक्षित या उनके अवशेषों को निकाला जा सके। अब तक एक सात साल के मासूम का शव बरामद हुआ है, जबकि कुछ अन्य मानव अवशेष भी मिले हैं जो इस त्रासदी की भयावहता को दर्शाते हैं।
मुख्यमंत्री सुक्खू का सख्त निर्देश और शोक संवेदना
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक अपूर्णीय क्षति बताया है। उन्होंने जिला प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि (Disaster Management) की सभी इकाइयों को मौके पर तैनात रखा जाए और राहत कार्य में कोई ढिलाई न बरती जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सोलन, शिमला के बालूगंज और अंबुजा सीमेंट कंपनी के अग्निशमन वाहनों को तुरंत मौके पर भेजा गया था। उन्होंने मृतक के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता देने और घायलों का नागरिक अस्पताल अर्की में मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने को कहा है।
विपक्ष का शोक और मानवता के लिए एकजुटता
इस दुखद घड़ी में राजनीति से ऊपर उठकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और सांसद सुरेश कश्यप ने भी अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने इस घटना को पूरे प्रदेश के लिए एक काला दिन बताते हुए कहा कि (Victim Support Services) को तुरंत प्रभावी बनाया जाना चाहिए। विपक्ष ने प्रशासन से आग्रह किया है कि लापता लोगों की तलाश के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद से सर्च ऑपरेशन को और तेज किया जाए ताकि पीड़ित परिवारों को उनके अपनों के बारे में जानकारी मिल सके।
लापरवाही या मजबूरी, आखिर कौन है इस मौत का जिम्मेदार
अक्सर पहाड़ी इलाकों में ठंड से बचने के लिए अंगीठी का सहारा लिया जाता है, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी (Fire Safety Precautions) के अभाव में जानलेवा साबित होती है। इस परिवार के लिए वह अंगीठी जिसे वे राहत के लिए अंदर लाए थे, वही उनके काल का कारण बन गई। स्थानीय विधायक संजय अवस्थी खुद मौके पर मौजूद रहकर बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रभावित नेपाली मजदूरों के परिवारों को हर संभव मानवीय सहायता मिल सके।
अर्की बाजार में पसरा सन्नाटा और भविष्य की चुनौतियां
आज अर्की बाजार की दुकानें भले ही बंद हों, लेकिन वहां फैली राख बहुत कुछ बयां कर रही है। मलबे से निकलती धुएं की लकीरें उन सपनों की याद दिला रही हैं जो एक झटके में जलकर राख हो गए। प्रशासन के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती (Search and Recovery) कार्य को पूरा करना है, क्योंकि मलबे के नीचे दबे लोगों के बचने की उम्मीदें समय बीतने के साथ कम होती जा रही हैं। यह घटना एक कड़ा सबक है कि बंद कमरों में आग और गैस सिलिंडरों के साथ की गई छोटी सी चूक भी कितनी बड़ी तबाही ला सकती है।



