Sleeper Bus Safety Guidelines 2026: सड़कों पर दौड़ते मौत के ताबूतों पर नकेल कसने के लिए गडकरी ने बनाया मास्टरप्लान, जानें डिटेल में…
Sleeper Bus Safety Guidelines 2026: देशभर में स्लीपर बसों में लगने वाली भीषण आग और बढ़ती दुर्घटनाओं को देखते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण किसी भी गली-मोहल्ले के लोकल बॉडी बिल्डर द्वारा नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि (Automobile manufacturing standards) का पालन केवल अधिकृत और केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कंपनियां ही करेंगी। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य उन असुरक्षित ढांचों पर रोक लगाना है, जो मामूली टक्कर या शॉर्ट सर्किट होने पर यात्रियों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं।

पुराने ढांचों का होगा कायाकल्प और रेट्रोफिटिंग
नया नियम केवल नई बनने वाली बसों पर ही नहीं, बल्कि सड़कों पर पहले से दौड़ रही बसों पर भी लागू होगा। गडकरी ने निर्देश दिए हैं कि सभी मौजूदा स्लीपर बसों को अनिवार्य रूप से (Safety retrofitting features) के साथ अपडेट किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक फायर डिटेक्शन सिस्टम, कांच तोड़ने के लिए विशेष हथौड़ों के साथ इमरजेंसी एग्जिट और अंधेरे में रास्ता दिखाने वाली इमरजेंसी लाइटिंग लगाना अब कानूनी मजबूरी होगी। सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले बस मालिकों और बिल्डरों के खिलाफ अब सीबीआई जांच तक की सिफारिश की जा सकती है।
जान बचाने वाले ‘नेक मददगार’ अब होंगे मालामाल
सड़क हादसों के समय अक्सर लोग कानूनी पचड़ों के डर से मदद के लिए आगे नहीं आते, लेकिन अब सरकार ने ‘गुड सेमेरिटन’ (नेक मददगार) योजना को नई धार दी है। अगर आप किसी सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल पहुंचाते हैं, तो सरकार आपको (Good Samaritan cash reward) के रूप में 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र प्रदान करेगी। इस पहल का उद्देश्य समाज में संवेदनशीलता बढ़ाना है ताकि समय पर इलाज मिलने से हर साल हजारों जानें बचाई जा सकें।
कैशलेस इलाज से मिलेगी जीवन की नई उम्मीद
दुर्घटना के शुरुआती पल जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे बड़ी दीवार होते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने घोषणा की है कि सड़क दुर्घटना के शिकार हर व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने के पहले सात दिनों तक (Cashless medical treatment) की सुविधा मिलेगी। इस योजना के तहत 1.5 लाख रुपये तक का इमरजेंसी इलाज मुफ्त होगा, चाहे पीड़ित के पास बीमा हो या न हो। यह सुविधा देश के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में उपलब्ध होगी और कोई भी अस्पताल इलाज से इनकार नहीं कर पाएगा।
ड्राइवरों की भारी कमी और प्रशिक्षित हाथों की तलाश
नितिन गडकरी ने स्वीकार किया कि भारतीय सड़कों पर सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती प्रशिक्षित ड्राइवरों की भारी कमी है। वर्तमान में देश में लगभग 22 लाख अनुभवी ड्राइवरों का टोटा है। इस संकट को दूर करने के लिए सरकार (Driver training infrastructure) को युद्धस्तर पर विकसित कर रही है। देश के विभिन्न कोनों में 1,021 नए ट्रेनिंग सेंटर और 98 रीजनल हब खोले जा रहे हैं, जहां ड्राइवरों को न केवल वाहन चलाना सिखाया जाएगा, बल्कि उन्हें सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्थितियों से निपटने का कड़ा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
तकनीक और सतर्कता से थमेगा हादसों का दौर
हादसों का एक बड़ा कारण ड्राइवरों की थकान और नींद की झपकी होती है। इसे रोकने के लिए सरकार ने बसों में ‘ड्राइवर ड्राउजीनेस डिटेक्शन’ (Driver fatigue alerts) सिस्टम को अनिवार्य करने का मन बना लिया है। यह तकनीक ड्राइवर की आंखों की गतिविधियों पर नजर रखेगी और नींद आने की स्थिति में तुरंत अलार्म बजाकर उसे सचेत कर देगी। गडकरी का मानना है कि तकनीक और मानवीय सतर्कता के मेल से ही 2030 तक सड़क दुर्घटनाओं को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सीधी कार्रवाई
मंत्री ने उन अधिकारियों को भी कड़े शब्दों में चेतावनी दी है जो नियमों की अनदेखी कर अनधिकृत बस बिल्डरों को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करते हैं। (Regulatory compliance oversight) को मजबूत करने के लिए राजस्थान जैसे राज्यों को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने को कहा गया है। अब बसों की बॉडी कोड (AIS-052) का पालन करना हर निर्माता के लिए अनिवार्य होगा। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा मानकों में किसी भी स्तर पर की गई धांधली को अब देशद्रोह के समान माना जाएगा।
सुरक्षित सफर का नया डिजिटल संकल्प
आने वाले समय में परिवहन सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया जा रहा है। ‘वाहन’ और ‘सारथी’ पोर्टल के जरिए (Digital transport services) को एकीकृत किया जा रहा है ताकि हर गाड़ी और ड्राइवर का ट्रैक रिकॉर्ड एक क्लिक पर उपलब्ध हो। नितिन गडकरी ने विश्वास जताया है कि इन कड़े फैसलों और जनता के सहयोग से भारतीय सड़कें जल्द ही दुनिया की सबसे सुरक्षित सड़कों में शुमार होंगी। अब हर सफर केवल मंजिल तक पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि एक सुरक्षित अनुभव भी होगा।



