Waist to Height Ratio vs BMI for Obesity 2026: जानें क्यों पेट की चर्बी और हाइट का अनुपात ही है मोटापे को मापने का सबसे सटीक पैमाना…
Waist to Height Ratio vs BMI for Obesity 2026: मोटापा आज के दौर की केवल एक शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि एक साइलेंट किलर बन चुका है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बढ़ा हुआ वजन (Health Risks of Obesity and Overweight) सीधे तौर पर हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी जानलेवा बीमारियों का निमंत्रण है। शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी न केवल जोड़ों पर दबाव डालती है, बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी बुरी तरह प्रभावित करती है। अगर आप भी अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं, तो यह जानना जरूरी है कि क्या आपका मापने का तरीका सही है या नहीं।

बचपन का मोटापा: भविष्य के लिए बड़ा खतरा
आजकल मोबाइल-टीवी की लत और जंक फूड के कारण बच्चों में वजन बढ़ना एक वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। (Childhood Obesity and Lifestyle Factors) कम उम्र में ही बच्चों को क्रॉनिक बीमारियों की दहलीज पर खड़ा कर रहा है। डॉक्टरों का मानना है कि यदि बचपन का मोटापा वयस्क होने तक बना रहे, तो युवावस्था में ही हार्ट अटैक और इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। माता-पिता को बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य सुरक्षित रहे।
बीएमआई (BMI) बनाम वेस्ट-टू-हाइट रेशियो: कौन है बेहतर?
अब तक वजन मापने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) को सबसे मानक तरीका माना जाता रहा है। लेकिन शेफील्ड और नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक नया खुलासा किया है। शोध के अनुसार, (Waist to Height Ratio for Obesity Screening) मोटापे का पता लगाने में बीएमआई से कहीं अधिक कारगर है। बीएमआई केवल वजन और लंबाई देखता है, वह यह नहीं बता पाता कि शरीर में फैट कहाँ जमा है, जबकि नया पैमाना सीधे पेट की चर्बी पर ध्यान केंद्रित करता है।
विसरल फैट: पेट की वो चर्बी जो है सबसे घातक
बीएमआई की सबसे बड़ी कमी यह है कि वह ‘फैट’ और ‘मसल मास’ के बीच फर्क नहीं कर पाता। वहीं, कमर और ऊंचाई का अनुपात (Visceral Fat and Belly Fat Dangers) यानी पेट की अंदरूनी चर्बी को सटीकता से दर्शाता है। चिकित्सा विज्ञान में विसरल फैट को ही सबसे खतरनाक माना गया है क्योंकि यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के चारों ओर लिपटा होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ स्क्रीनिंग टूल के रूप में इस नए अनुपात को अपनाना एक बेहतर स्वास्थ्य विकल्प है।
अध्ययन के नतीजे: उम्र और पीढ़ी का मोटापे पर असर
इंग्लैंड में 2005 से 2021 के बीच किए गए एक विस्तृत शोध में मोटापे के ट्रेंड का बारीकी से आकलन किया गया। शेफील्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. लौरा ग्रे के अनुसार, बीएमआई (Longitudinal Study on Obesity Trends) भले ही लोकप्रिय पैमाना हो, लेकिन यह हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना पर सटीक नहीं बैठता। शोधकर्ताओं ने पाया कि पर्यावरणीय कारकों और पीढ़ीगत अंतर के कारण मोटापा बढ़ने के तरीके बदल रहे हैं, जिसके लिए अधिक सटीक मापन टूल्स की जरूरत है।
आधा अनुपात, पूरा स्वास्थ्य: कैसे खुद चेक करें वजन?
शोधकर्ताओं ने इस नए तरीके को ‘सिंपल टेप टेस्ट’ का नाम दिया है जिसे याद रखना और समझना बहुत आसान है। (Healthy Weight Assessment Methods) के तहत नियम यह है कि आपकी कमर की चौड़ाई आपकी कुल लंबाई (हाइट) के आधे से कम होनी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, यदि आपकी हाइट 6 फीट है, तो आपकी कमर 36 इंच से कम होनी चाहिए। यदि यह अनुपात बढ़ रहा है, तो समझ लीजिए कि आप गंभीर स्वास्थ्य जोखिम की ओर बढ़ रहे हैं।
जेनेटिक रिस्क और सावधानी की जरूरत
मोटापा केवल खान-पान से नहीं, बल्कि जेनेटिक्स से भी जुड़ा हो सकता है। जिन लोगों के पारिवारिक इतिहास में पहले से ही मोटापा, दिल की बीमारी या डायबिटीज (Genetic Predisposition to Weight Gain) रही है, उन्हें और भी अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से मेजरिंग टेप से अपनी कमर और हाइट का अनुपात चेक करते रहना चाहिए। सावधानी ही बचाव है, और शुरुआत अपने वजन को सही तरीके से पहचानने से होती है।
विज्ञान की नई उम्मीद: वजन घटाने वाली असरदार दवा
दुनियाभर के वैज्ञानिक मोटापे से लड़ने के लिए नई दवाओं और तकनीकों पर शोध कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेषज्ञों ने एक ऐसी (Weight Loss Medication Advancements) असरदार दवा की खोज कर ली है जो शरीर के फैट बर्निंग प्रोसेस को तेज कर सकती है। हालांकि, दवाएं केवल एक सहारा हैं, असली बदलाव सही जीवनशैली और संतुलित खान-पान से ही आता है। मोटापे को चुनौती मानकर उसे हराना ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।



