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National Shooting Coach Sexual Assault Case: जब रक्षक ही बन गया भक्षक, क्या सुरक्षित हैं देश की बेटियां…

National Shooting Coach Sexual Assault Case: देश के लिए मेडल जीतने का सपना देखने वाली एक मासूम खिलाड़ी को क्या पता था कि जिस कोच को वह अपना मार्गदर्शक मान रही है, वही उसके भविष्य को अंधकार में धकेल देगा। फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके से सामने आई यह दिल दहला देने वाली घटना (Sports Safety for Athletes) समाज के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गई है। 16 दिसंबर को जब एक नेशनल मैच खत्म हुआ, तो किसी ने सोचा भी नहीं था कि खेल की चर्चा के बहाने एक नाबालिग की गरिमा को तार-तार कर दिया जाएगा। यह मामला केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उस गुरु-शिष्य परंपरा पर गहरा प्रहार है जिसे हमारे देश में पूजनीय माना जाता है।

National Shooting Coach Sexual Assault Case
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मैच की चर्चा के बहाने बुलाया और फिर मर्यादा लांघी

डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में नेशनल मैच खत्म होने के बाद, पीड़ित खिलाड़ी अपने घर की ओर निकलने ही वाली थी कि तभी आरोपी कोच ने उसे रोक लिया। खिलाड़ी ने बताया कि कोच ने उससे मैच के प्रदर्शन (Professional Ethics in Coaching) पर बात करने के लिए थोड़ा समय मांगा। वह मासूम करीब दो घंटे तक रेंज में इंतजार करती रही, जिसके बाद उसे व्हाट्सएप कॉल के जरिए सूरजकुंड के एक आलीशान होटल की लॉबी में बुलाया गया। वहां से कोच उसे तीसरी मंजिल के एक कमरे में ले गया, जहां खेल की बारीकियों पर चर्चा करने के बजाय उसने अपनी घिनौनी साजिश को अंजाम देने की शुरुआत की।

करियर बर्बाद करने की धमकी और डर का वो खौफनाक मंजर

होटल के कमरे में जब खिलाड़ी ने घर जाने की जिद की, तो आरोपी ने ‘बैक क्रैक’ करने के बहाने उसे अपने पास बुलाया। विरोध करने के बावजूद आरोपी ने नाबालिग के साथ जबरदस्ती की और जब उसने शोर मचाने या विरोध करने की कोशिश की, तो उसे खेल (Safe Sports Environment) के क्षेत्र में करियर खत्म करने की सीधी धमकी दी गई। आरोपी का रसूख और उसकी पहुंच देखकर खिलाड़ी इतनी सहम गई कि वह चुपचाप उसकी गाड़ी में बैठकर वहां से चली गई। वह खौफ इतना गहरा था कि कई दिनों तक उसने यह बात अपने माता-पिता से भी साझा नहीं की।

खामोशी टूटी और इंसाफ की लड़ाई शुरू हुई

घटना के बाद से ही वह उभरती हुई खिलाड़ी गहरे सदमे में थी और गुमसुम रहने लगी थी। करीब 20 दिनों तक अपने भीतर उस दर्द और अपमान को दबाए रखने के बाद, आखिरकार 6 जनवरी की सुबह उसका सब्र टूट गया। उसने अपनी मां को कोच की उस काली करतूत (Protection of Children from Sexual Offences) के बारे में विस्तार से बताया। बेटी की आपबीती सुनकर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई, जिसके बाद बिना देर किए फरीदाबाद के महिला थाना एनआईटी में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी है।

अगस्त 2025 से शुरू हुई थी ट्रेनिंग और शोषण का सिलसिला

पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह साल 2017 से शूटिंग सीख रही है और उसने बड़ी उम्मीदों के साथ अगस्त 2025 में इस भारतीय शूटिंग टीम के कोच से प्रशिक्षण (Child Rights in Sports) लेना शुरू किया था। आरोपी कोच उसे ट्रेनिंग के नाम पर मोहाली, पटियाला, देहरादून और दिल्ली जैसे अलग-अलग शहरों में बुलाता रहता था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इन दौरों के दौरान भी पीड़िता के साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार हुआ था। जांच का दायरा अब उन सभी जगहों तक फैल गया है जहां-जहां आरोपी खिलाड़ी को लेकर गया था।

पुलिस की सख्त कार्रवाई और पोक्सो एक्ट के तहत मामला

शिकायत मिलते ही फरीदाबाद पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है और आरोपी राष्ट्रीय शूटिंग कोच के खिलाफ पोक्सो एक्ट की धारा 6 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) के तहत मामला (Legal Action Against Sexual Abuse) दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि होटल के सीसीटीवी फुटेज और व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्ड्स को कब्जे में लिया जा रहा है ताकि आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा सकें। इस घटना ने खेल जगत में हलचल मचा दी है और लोग आरोपी कोच के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।

खेल जगत के सिस्टम पर खड़े होते बड़े सवाल

यह घटना बताती है कि आज भी खेल संस्थानों के भीतर महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा के इंतजाम कितने खोखले हैं। जब एक नेशनल लेवल का कोच ही (Reporting Sexual Misconduct) ऐसी वारदातों को अंजाम देने लगे, तो अभिभावक अपनी बेटियों को घर से बाहर भेजने में डर महसूस करेंगे। क्या सिर्फ मेडल जीतना ही काफी है, या हमें अपने खिलाड़ियों को एक सुरक्षित माहौल देना भी हमारी जिम्मेदारी नहीं है? यह मामला अब एक जन-आंदोलन का रूप ले रहा है, जहां हर कोई उस पीड़ित बेटी के लिए न्याय की गुहार लगा रहा है।

न्याय की उम्मीद और समाज की जिम्मेदारी

फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है और पीड़िता को काउंसलिंग प्रदान की जा रही है ताकि वह इस सदमे से बाहर आ सके। समाज को भी ऐसे समय में खिलाड़ी और उसके परिवार का साथ (Support for Abuse Survivors) देना चाहिए, न कि उन पर सवाल उठाने चाहिए। आरोपी कोच की गिरफ्तारी और उसे मिलने वाली सजा ही इस व्यवस्था में लोगों का विश्वास बहाल कर सकती है। यह लड़ाई सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि हर उस लड़की की है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए मैदान में उतरती है।

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