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Devdutt Padikkal Selection Controversy: रनों का अंबार फिर भी टीम इंडिया से बाहर, देवदत्त पडिक्कल ने तोड़ी चुप्पी

Devdutt Padikkal Selection Controversy: भारतीय घरेलू क्रिकेट के मौजूदा सीजन में देवदत्त पडिक्कल का बल्ला आग उगल रहा है। विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने विपक्षी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 600 से ज्यादा रन बना लिए हैं। उनकी तकनीकी मजबूती और निरंतरता को देखकर हर किसी को उम्मीद थी कि न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे सीरीज में उन्हें मौका जरूर मिलेगा। हालांकि, जब (BCCI Selection Committee) ने टीम की घोषणा की, तो उसमें पडिक्कल का नाम न होना क्रिकेट प्रेमियों के लिए किसी झटके से कम नहीं था। बावजूद इसके, इस युवा खिलाड़ी ने हार नहीं मानी है और अपनी बारी का इंतजार करने का फैसला किया है।

Devdutt Padikkal Selection Controversy
Devdutt Padikkal Selection Controversy

चयन न होने पर पडिक्कल की परिपक्व प्रतिक्रिया

अक्सर देखा जाता है कि टीम में जगह न मिलने पर खिलाड़ी सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकालते हैं, लेकिन पडिक्कल ने इसके उलट बेहद संतुलित और परिपक्व सोच का परिचय दिया है। एक प्रमुख समाचार पत्र से बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की। पडिक्कल ने कहा कि वे (Team India Selection) प्रक्रिया को लेकर उत्सुक जरूर थे, लेकिन नाम न आने पर उन्हें कोई मलाल नहीं है। उन्होंने वास्तविकता को स्वीकार करते हुए माना कि भारतीय क्रिकेट में इस समय प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और कई बेहतरीन बल्लेबाज अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्तर काफी ऊंचा हो गया है।

लंबी कतार और कड़ी प्रतिस्पर्धा का कड़वा सच

पडिक्कल का मानना है कि मौजूदा समय में भारतीय वनडे टीम का हिस्सा बनना दुनिया के सबसे कठिन कामों में से एक है। उन्होंने कहा कि टीम में जगह बनाने के लिए लाइन में बहुत सारे बल्लेबाज खड़े हैं और लगभग सभी खिलाड़ी (Domestic Cricket Performance) के दम पर अपना दावा ठोक रहे हैं। ऐसे में खुद को मानसिक रूप से मजबूत रखना और केवल अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करना ही सबसे सही रास्ता है। पडिक्कल ने स्पष्ट किया कि एक पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर आपको इन उतार-चढ़ावों को स्वीकार करना ही पड़ता है और रन बनाना ही आपके हाथ में एकमात्र विकल्प है।

टेस्ट मानसिकता से टी20 के रोमांचक सफर तक का बदलाव

देवदत्त पडिक्कल ने अपनी बल्लेबाजी शैली के बारे में एक दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि वे बचपन से ही टेस्ट क्रिकेट के पारंपरिक अंदाज को ध्यान में रखकर बड़े हुए थे, इसलिए उनका खेल शुरू में काफी रक्षात्मक था। लेकिन आधुनिक दौर की मांग और (IPL Batting Style) ने उन्हें अपनी तकनीक में आमूलचूल बदलाव करने के लिए प्रेरित किया। टी20 के आक्रामक प्रारूप में खुद को ढालना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से यह साबित किया कि वे किसी भी फॉर्मेट में फिट हो सकते हैं।

आरसीबी के कोचिंग स्टाफ का जादुई मार्गदर्शन

पडिक्कल ने अपनी टी20 बल्लेबाजी में आए सुधार का पूरा श्रेय रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के अनुभवी कोचिंग स्टाफ को दिया है। उन्होंने विशेष रूप से दिनेश कार्तिक और एंडी फ्लावर का नाम लेते हुए कहा कि इन दिग्गजों ने उन्हें (Cricket Coaching Tips) के जरिए यह समझाया कि टी20 क्रिकेट में अपनी स्ट्राइक रेट और बाउंड्री मारने की क्षमता को कैसे बढ़ाया जा सकता है। पडिक्कल के अनुसार, इन मेंटर्स की सलाह ने उनके सोचने का तरीका बदल दिया, जिससे उन्हें आईपीएल और घरेलू टी20 मैचों में काफी सफलता हासिल हुई।

वनडे प्रारूप में पडिक्कल की सहजता और अनूठा पैटर्न

वनडे क्रिकेट के प्रति अपनी समझ साझा करते हुए पडिक्कल ने कहा कि इस फॉर्मेट में वे खुद को सबसे ज्यादा सहज महसूस करते हैं। उनके अनुसार, 50 ओवर का खेल पूरी तरह से सही (Batting Tempo) और पैटर्न को पहचानने के बारे में है। उन्हें इस बात की खुशी है कि अपने करियर के शुरुआती दौर में ही वे इस पैटर्न को समझने में कामयाब रहे। पडिक्कल की रणनीति काफी सरल है—शुरुआत में नई गेंद का सम्मान करना और एक बार सेट हो जाने के बाद विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव बनाकर पारी को लंबी खींचना, जो एक मंझे हुए ओपनर की पहचान है।

आगामी न्यूजीलैंड सीरीज और भविष्य की उम्मीदें

हालांकि न्यूजीलैंड सीरीज के लिए उन्हें नजरअंदाज किया गया है, लेकिन पडिक्कल के आंकड़े उनकी मेहनत की गवाही दे रहे हैं। क्रिकेट विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वे (Consistent Run Scoring) जारी रखते हैं, तो टीम इंडिया के दरवाजे उनके लिए बहुत जल्द दोबारा खुल सकते हैं। चयनकर्ताओं की नजरें भी उन पर टिकी हैं, क्योंकि भविष्य की टीम इंडिया को तैयार करने के लिए पडिक्कल जैसे तकनीकी रूप से सक्षम बल्लेबाजों की आवश्यकता होगी। फिलहाल, पडिक्कल का पूरा ध्यान घरेलू मैचों में अपनी फॉर्म को बरकरार रखने पर है ताकि वे अपनी दावेदारी को और भी मजबूत कर सकें।

खेल के प्रति समर्पण और अटूट विश्वास

अंत में, पडिक्कल ने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि क्रिकेट में चयन आपके हाथ में नहीं होता, लेकिन अभ्यास और प्रदर्शन आपके नियंत्रण में है। उनकी यह (Sports Psychology) उन्हें अन्य युवा खिलाड़ियों से अलग बनाती है। वे जानते हैं कि रन बनाना ही वह भाषा है जिसे चयनकर्ता सबसे बेहतर समझते हैं। इसलिए, वे मैदान पर पसीना बहाने और अपनी तकनीक को और निखारने के लिए तैयार हैं। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों को उम्मीद है कि विजय हजारे ट्रॉफी का यह ‘रन मशीन’ जल्द ही नीली जर्सी में मैदान पर चौके-छक्के लगाता हुआ दिखाई देगा।

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