Jharkhand School Holiday News: झारखंड में शीतलहर का कहर, रांची के सभी स्कूलों में 8 जनवरी तक लगा ताला
Jharkhand School Holiday News: झारखंड इन दिनों भीषण शीतलहर और कड़ाके की ठंड की चपेट में है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह और शाम के समय चलने वाली बर्फीली हवाओं के कारण (Temperature Drop) का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है। सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग ठिठुरन से बचने के लिए अलाव और गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। सूरज की रोशनी भी इस गलन के आगे बेअसर साबित हो रही है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।

विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन का बड़ा फैसला
ठंड के तीखे तेवरों को देखते हुए रांची जिला प्रशासन ने बच्चों की सेहत को प्राथमिकता दी है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने एक (Official Notification) जारी कर स्कूलों को बंद करने का निर्देश दिया है। प्रशासन का मानना है कि सुबह के समय अत्यधिक कोहरे और शीतलहर के बीच बच्चों का स्कूल जाना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए एहतियातन यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।
कक्षा 12वीं तक की शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप
जारी आदेश के मुताबिक, रांची जिले के भीतर आने वाले सभी प्रकार के विद्यालयों पर यह नियम लागू होगा। इसमें सरकारी, निजी, गैर-सहायता प्राप्त और अल्पसंख्यक स्कूल शामिल हैं। प्री-नर्सरी से लेकर (Secondary Education) यानी कक्षा 12वीं तक की सभी नियमित कक्षाएं 6 जनवरी 2026 से 8 जनवरी 2026 तक पूरी तरह बंद रखने का आदेश दिया गया है। जिला दंडाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में किसी भी छात्र को स्कूल बुलाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
शिक्षकों के लिए स्कूल आना अनिवार्य, निपटाएंगे गैर-शैक्षणिक कार्य
भले ही छात्रों के लिए स्कूलों में ताले लटक गए हों, लेकिन शिक्षकों को कोई राहत नहीं दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को (Staff Attendance) सुनिश्चित करनी होगी। उन्हें निर्धारित समय पर विद्यालय पहुंचना होगा और विभाग द्वारा सौंपे गए महत्वपूर्ण गैर-शैक्षणिक कार्यों का निष्पादन करना होगा। इस दौरान प्रशासनिक कार्य और भविष्य की शैक्षणिक योजनाओं पर काम जारी रहेगा।
परीक्षाओं पर सस्पेंस: सक्षम प्राधिकारी लेंगे अंतिम निर्णय
शीतलहर के बीच उन छात्रों के मन में असमंजस है जिनकी प्री-बोर्ड या अन्य अनिवार्य परीक्षाएं प्रस्तावित थीं। प्रशासन ने इस पर (Examination Guidelines) स्पष्ट करते हुए कहा है कि परीक्षाओं के आयोजन का जिम्मा संबंधित स्कूल प्रबंधन और सक्षम प्राधिकारियों पर होगा। यदि परीक्षा टालना संभव न हो, तो मौसम की परिस्थितियों और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा। अनिवार्य स्थिति में ही परीक्षाएं आयोजित की जा सकेंगी।
एहतियाती कदम: स्वास्थ्य संकट से बचाने की कवायद
जिला प्रशासन ने इस छुट्टी को पूरी तरह से एक ‘सुरक्षा कवच’ के रूप में पेश किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ठंड से बच्चों में (Cold Related Illness) जैसे निमोनिया, सर्दी-खांसी और वायरल बुखार का खतरा बढ़ जाता है। मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि यह निर्णय केवल एहतियाती कदम है ताकि विद्यार्थियों को किसी भी तरह के स्वास्थ्य संकट से बचाया जा सके। प्रशासन लगातार मौसम विभाग के संपर्क में है और स्थिति की निगरानी कर रहा है।
कोहरे का कहर और विजिबिलिटी की समस्या
ठंड के साथ-साथ घना कोहरा भी राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में मुसीबत बना हुआ है। सुबह के समय (Low Visibility) के कारण स्कूली बसों और वाहनों के लिए सड़क पर चलना असुरक्षित हो गया था। इसी जोखिम को कम करने के लिए प्रशासन ने तीन दिनों का यह अस्थायी अवकाश घोषित किया है। अगर 8 जनवरी के बाद भी मौसम के मिजाज में सुधार नहीं होता है, तो इस छुट्टी को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
अभिभावकों ने राहत की सांस ली, प्रशासन मुस्तैद
स्कूलों के बंद होने के फैसले का अभिभावकों ने स्वागत किया है, क्योंकि छोटे बच्चों को सुबह तैयार कर स्कूल भेजना एक बड़ी चुनौती बन गया था। (Community Response) को देखते हुए प्रशासन ने साफ किया है कि नियमों की अनदेखी करने वाले निजी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, सभी को घरों के भीतर रहने और सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है। झारखंड के अन्य जिलों में भी इसी तरह के कड़े फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।



