उत्तराखण्ड

Mahasu Devta Temple: ग्रामीणों का बड़ा फैसला, शादी में फिजूलखर्ची करने वालों का होगा सामाजिक बहिष्कार

Mahasu Devta Temple: उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित खत शिलगांव के पंचरा-भंजरा इलाके से एक क्रांतिकारी सामाजिक सुधार की खबर सामने आई है। यहाँ के प्रतिष्ठित महासू देवता मंदिर परिसर में ग्रामीणों ने एक महत्वपूर्ण पंचायत का आयोजन किया, जिसका मुख्य केंद्र शादियों में बढ़ती (Extravagant Spending) को रोकना था। आधुनिकता की दौड़ में लोग अपनी जड़ों को भूलकर प्रदर्शन की राजनीति में उलझ रहे हैं, जिसे रोकने के लिए मंदिर की पवित्र चौखट पर सामूहिक रूप से कड़े नियमों की घोषणा की गई है।

Mahasu Devta Temple
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होटल और मैरिज हॉल के दिखावे पर पाबंदी

खत स्याणा तुलसी राम शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब कोई भी ग्रामीण अपनी संतानों का विवाह महंगे होटलों या आलीशान पार्कों में नहीं करेगा। सभी मांगलिक (Wedding Traditions) का आयोजन अनिवार्य रूप से गांव की मिट्टी और अपने घरों के आंगन में ही संपन्न कराया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि महंगे वेडिंग डेस्टिनेशन और फार्म हाउस न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाते हैं, बल्कि हमारी सादगी भरी पहाड़ी संस्कृति को भी नष्ट कर रहे हैं।

गहनों और साज-सज्जा पर भी लगा अंकुश

इस पंचायत में केवल आयोजन स्थल ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दिखावे पर भी लगाम कसी गई है। बैठक में यह नियम बनाया गया है कि शादी समारोह के दौरान महिलाएं अत्यधिक सोने-चांदी के आभूषणों का प्रदर्शन नहीं करेंगी। मर्यादा को ध्यान में रखते हुए (Women Jewelry Rules) के तहत केवल तीन प्रमुख गहने पहनने की ही अनुमति दी गई है। यह कदम अमीर और गरीब के बीच की खाई को पाटने और शादियों को सादगीपूर्ण बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

खान-पान और मनोरंजन के आधुनिक शौक पर लगा ताला

पहाड़ी शादियों में अब डीजे की कानफोड़ू आवाज और फास्ट फूड का चलन भी बंद होने जा रहा है। पंचायत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि विवाह आयोजनों में डीजे, जंक फूड और बीयर के सेवन पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके स्थान पर (Traditional Celebration) को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें स्थानीय वाद्य यंत्रों और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों को प्राथमिकता दी जाएगी। पश्चिमी संस्कृति के इन प्रभावों को हटाने से गांव के शांत वातावरण को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

न्यौते और कन्यादान के लिए नई नियमावली

आर्थिक बोझ (Mahasu Devta Temple) को कम करने के लिए पंचायत ने न्यौते की राशि को भी सीमित कर दिया है। अब पहली शादी में न्यौते के तौर पर अधिकतम 100 रुपये ही स्वीकार किए जाएंगे। हालांकि, कन्यादान के मामले में (Donation Rules) को लचीला रखा गया है और लोग अपनी सामर्थ्य व इच्छा के अनुसार दान दे सकते हैं। इस व्यवस्था से उन परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी जो सामाजिक दबाव में आकर कर्ज लेकर न्यौता या उपहार देते थे।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना और कड़ा दंड

पंचायत ने इन नियमों को कड़ाई से लागू करने के लिए चेतावनी भी जारी की है। यदि कोई भी ग्रामीण इन सामूहिक निर्णयों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड (Social Penalty) लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, दोषी व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार भी किया जा सकता है। यह कठोर कदम इसलिए उठाए गए हैं ताकि समाज में अनुशासन बना रहे और आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध और सरल संस्कृति का सम्मान करना सीखें।

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