बिहार

Munger Police Rescues Asphyxiated Family: मौत के दरवाजे से खींच लाई मुंगेर पुलिस, बंद कमरे में लगा हीटर बना काल, फिर…

Munger Police Rescues Asphyxiated Family: बिहार के मुंगेर जिले में नए साल का जश्न एक परिवार के लिए मातम में बदल सकता था, लेकिन पुलिस की सजगता ने एक बड़ी त्रासदी को टाल दिया। कासिम बाजार थाना क्षेत्र के मकससपुर मोहल्ले में चंद्रशेखर साहु का परिवार कड़ाके की ठंड से बचने के लिए (Emergency Response System) रूम हीटर जलाकर सो रहा था। आधी रात के बाद हीटर में आई तकनीकी खराबी ने कमरे को गैस चैंबर में तब्दील कर दिया। परिवार के चारों सदस्य गहरी नींद में ही बेहोशी की आगोश में चले गए, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

Munger Police Rescues Asphyxiated Family
Munger Police Rescues Asphyxiated Family

डायल-112 की बिजली जैसी फुर्ती ने दिखाया करिश्मा

जैसे ही 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की मध्य रात्रि को डायल-112 पर इस अनहोनी की सूचना मिली, पुलिस प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया। एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि (Public Safety Services) सूचना मिलते ही पुलिस की टीम महज पांच मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गई। समय की अहमियत को समझते हुए कासिम बाजार थानाध्यक्ष रूबीकांत कच्छप भी दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। घर के अंदर से कोई हलचल न होने पर पुलिस को अनहोनी का गहरा अंदेशा हुआ।

सीढ़ी लगाकर शीशा तोड़ा और मौत को दी मात

घर के दरवाजे अंदर से बंद थे और भीतर सन्नाटा पसरा हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने बिना वक्त गंवाए साहसिक कदम उठाने का फैसला किया। पुलिस टीम ने (Heroic Police Intervention) तुरंत सीढ़ी का इंतजाम किया और घर की खिड़की का शीशा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। कमरे का नजारा भयावह था; चंद्रशेखर साहु, उनकी पत्नी रिता देवी, पुत्र रितेश कुमार और पुत्रवधू प्रीति कुमारी अचेत अवस्था में पड़े थे। पूरे कमरे में दम घोटने वाली गैस भरी हुई थी क्योंकि हीटर का फिलामेंट टूट चुका था।

अस्पताल की दहलीज और मिला नया जीवन

पुलिस ने बिना एम्बुलेंस का इंतजार किए सभी पीड़ितों को अपने ही वाहन से मुंगेर सदर अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों की टीम ने (Immediate Medical Attention) इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया। पुलिस की तत्परता का ही नतीजा था कि अस्पताल पहुँचने के महज 30 मिनट के भीतर चारों सदस्यों की हालत में सुधार होने लगा। अगर पुलिस चंद मिनट और देरी कर देती, तो जहरीली गैस फेफड़ों को पूरी तरह नाकाम कर सकती थी।

खाकी के मानवीय चेहरे की हर तरफ वाहवाही

इस घटना ने समाज में पुलिस की छवि को एक नए ऊंचे पायदान पर खड़ा कर दिया है। स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार ने (Community Policing Impact) मुंगेर पुलिस की इस संवेदनशीलता और बहादुरी की जमकर तारीफ की है। लोगों का कहना है कि पुलिस ने केवल ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि एक अभिभावक की तरह परिवार की रक्षा की। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि मुसीबत के वक्त पुलिस ही आम आदमी का सबसे बड़ा सहारा है।

जांबाज पुलिसकर्मियों को मिलेगा सम्मान

मुंगेर के एसपी सैयद इमरान मसूद ने इस पूरे ऑपरेशन की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि (Officer Commendation Awards) डायल-112 की टीम, थानाध्यक्ष रूबीकांत कच्छप और उनके सहयोगियों को इस उत्कृष्ट कार्य के लिए विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा। पुलिस का मानना है कि ऐसे पुरस्कारों से अन्य कर्मियों का मनोबल बढ़ता है और वे जनता की सेवा के लिए और अधिक प्रेरित होते हैं।

ठंड में रूम हीटर के उपयोग पर विशेष चेतावनी

इस हादसे ने सर्दियों में रूम हीटर के इस्तेमाल को लेकर एक गंभीर सबक भी दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि (Heater Safety Precautions) बंद कमरे में हीटर चलाकर सोना जानलेवा साबित हो सकता है, क्योंकि यह ऑक्सीजन के स्तर को कम कर देता है। पुलिस ने भी अपील की है कि लोग बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल सावधानी से करें और कमरे में वेंटिलेशन का हमेशा ध्यान रखें ताकि ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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