Moradabad Voter List Revision: जीत के अंतर से दोगुने वोट कटे, मुरादाबाद की नगर सीट पर 1.12 लाख नामों की सफाई से मचा हड़कंप
Moradabad Voter List Revision: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुरादाबाद जिला हमेशा से ही सत्ता की चाबी माना जाता रहा है, लेकिन हाल ही में हुए मतदाता सूची के पुनरीक्षण ने सभी सियासी समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत जिले की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। प्रशासन की ओर से की गई इस बड़ी (Voter List Cleanup) प्रक्रिया ने उन सीटों पर हलचल बढ़ा दी है, जहां पिछले चुनाव में हार-जीत का फैसला बेहद मामूली अंतर से हुआ था। आंकड़ों की यह बाजीगरी आने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों के नतीजों को पूरी तरह पलटने का दम रखती है।

जीत के अंतर से बड़ा हुआ कटे नामों का आंकड़ा
मुरादाबाद जिले की नगर विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिली थी, जहां भाजपा ने महज 782 मतों से जीत हासिल की थी। लेकिन ताजा अभियान के बाद यहां से 1.12 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। यह स्थिति (Political Impact Assessment) के लिहाज से बेहद संवेदनशील है क्योंकि जितने वोटों से जीत मिली थी, उससे कहीं ज्यादा वोट अब लिस्ट से गायब हैं। जिले की सभी छह सीटों को मिलाकर देखें तो कुल 3.87 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं, जो पिछले चुनाव के कुल जीत के अंतर से दोगुने से भी अधिक हैं।
अनकलेक्टिव वोटरों पर प्रशासन का कड़ा प्रहार
एसआईआर अभियान के अंतिम चरण में जिला प्रशासन ने अपना पूरा ध्यान उन मतदाताओं पर केंद्रित किया जिन्हें ‘अनकलेक्टिव’ या एएसडी (ASD) श्रेणी में रखा गया था। इस श्रेणी में वे लोग शामिल थे जो या तो अनुपस्थित थे, कहीं और शिफ्ट हो गए थे, जिनके नाम (Duplicate Voter Entries) के रूप में दर्ज थे या जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। जांच के बाद जिले में ऐसे मतदाताओं की संख्या 3.87 लाख पाई गई। प्रशासन का दावा है कि इस सफाई से चुनाव में होने वाली गड़बड़ियों और फर्जी वोटिंग की संभावनाओं को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।
मृतकों के नाम हटने से सुधरी मतदाता सूची की सेहत
मतदाता सूची में लंबे समय से एक बड़ी समस्या उन लोगों की रही है जो दुनिया छोड़ चुके हैं लेकिन उनका नाम कागजों में अब भी जिंदा था। इस अभियान के दौरान मुरादाबाद जिले में करीब 73 हजार ऐसे नाम हटाए गए हैं जो (Deceased Voter Removal) प्रक्रिया का हिस्सा बने। इसके अलावा, 2.10 लाख ऐसे मतदाताओं की भी पहचान हुई जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई थी क्योंकि उन्होंने गणना-प्रपत्र में मांगे गए जरूरी साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि ये लोग सही दस्तावेज पेश करते हैं, तो इनके नाम दोबारा जोड़े जा सकते हैं।
देहात विधानसभा सीट पर भी दिखा बड़ा बदलाव
मुरादाबाद की देहात विधानसभा सीट, जहां 2022 में जीत का अंतर सबसे अधिक यानी 56,820 वोट रहा था, वहां भी बड़ी संख्या में नाम काटे गए हैं। अभियान के तहत यहां से 90,937 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में (Assembly Constituency Data) का बदलना राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बन गया है। क्षेत्रीय नेताओं को डर है कि यदि इन कटे हुए नामों की जगह नए नाम समय पर नहीं जुड़े, तो 2027 की चुनावी जंग उनके लिए काफी कठिन साबित हो सकती है और जनाधार खिसक सकता है।
कुंदरकी उपचुनाव और जीत के रिकाॅर्ड का असर
मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी हवा का असर हाल ही में हुए कुंदरकी उपचुनाव में साफ दिखाई दिया। जहां 2022 के आम चुनाव में सपा ने यहां 43,162 वोटों से जीत दर्ज की थी, वहीं 2024 के उपचुनाव में (Bypoll Results Trend) पूरी तरह उलट गया। भाजपा प्रत्याशी रामवीर सिंह ने 1,44,791 मतों के रिकॉर्ड अंतर से ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जो पिछले अंतर से तीन गुना ज्यादा है। इस नतीजे ने विपक्षी दलों की पेशानी पर बल डाल दिए हैं और वे नए सिरे से अपनी रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं।
राजनीतिक दलों के भीतर गहराता चिंता का साया
जैसे-जैसे मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे राजनैतिक गलियारों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। मुरादाबाद की छह सीटों पर जीत का कुल अंतर 1.71 लाख वोटों का था, जबकि (Electoral Roll Statistics) के अनुसार कटे हुए वोटरों की संख्या 3.87 लाख है। सपा और भाजपा दोनों ही दलों के रणनीतिकार अब बूथ स्तर पर काम कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनके वास्तविक समर्थकों के नाम सूची से न कटे हों। अगर संतुलन नहीं बैठाया गया, तो अगले चुनाव में किसी भी दल की किस्मत अचानक बदल सकती है।
अंतिम प्रकाशन की ओर बढ़ते प्रशासन के कदम
मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए प्रशासन अब अपनी अंतिम समयसीमा की ओर बढ़ रहा है। 31 दिसंबर से 30 जनवरी तक दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय दिया गया था। इन सभी शिकायतों का (Final List Publication) से पहले 21 फरवरी तक निस्तारण कर दिया जाएगा। इसके बाद 28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम रूप सबके सामने होगा। यह तारीख मुरादाबाद की भावी राजनीति की दिशा तय करेगी और स्पष्ट होगा कि कितने नए युवाओं के नाम इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन पाए हैं।



