Kia Seltos New Gen Review: क्या वाकई बड़ा होने का मतलब बेहतर होना है…
Kia Seltos New Gen Review: एक वक्त था जब भारतीय सड़कों पर कॉम्पैक्ट SUV का मतलब सिर्फ मजबूती होता था, लेकिन फिर Kia Seltos आई और उसने इस सेगमेंट की परिभाषा ही बदल दी। लुक्स, फीचर्स और स्टाइल का जो कॉकटेल सेल्टोस ने पेश किया, उसने प्रतिद्वंद्वियों की रातों की नींद उड़ा दी थी। अब, सेल्टोस अपनी अगली पीढ़ी (New Generation) में कदम रख चुकी है। किआ ने इसे बड़ा बनाया है, ज्यादा फीचर्स दिए हैं और काफी कुछ बदलने की कोशिश की है।

लेकिन एक अनुभवी ड्राइवर और ऑटो-ब्लॉगर के तौर पर मेरा मानना है कि कागजों पर आंकड़े बढ़ जाना हमेशा असल जिंदगी में बेहतर अनुभव की गारंटी नहीं होता। क्या यह नई सेल्टोस अपनी विरासत को संभाल पाएगी या सिर्फ चकाचौंध बनकर रह जाएगी? आइए, इसकी गहराई में चलते हैं।
डिज़ाइन और डायमेंशन: क्या यह सिर्फ एक फेसलिफ्ट है?
जब आप पहली बार नई सेल्टोस को देखते हैं, तो एक बात साफ हो जाती है—यह लंबी हो गई है। किआ ने इसकी लंबाई 95mm बढ़ाई है और व्हीलबेस में भी 80mm का इजाफा किया है। यह बदलाव नए K3 ग्लोबल प्लेटफॉर्म की वजह से मुमकिन हुआ है। पहली नजर में यह गाड़ी थोड़ी खिंची हुई (elongated) लगती है, जो इसे पहले से ज्यादा ‘मैच्योर’ लुक देती है।
हालांकि, इसके ‘डिजिटल टाइगर फेस’ को लेकर मेरी राय मिली-जुली है। किआ के पास ग्लोबल लेवल पर एक से बढ़कर एक धाकड़ SUV डिज़ाइन मौजूद हैं, उनसे और प्रेरणा ली जा सकती थी। सामने से देखने पर यह आज भी एक नई जनरेशन की गाड़ी कम और एक भारी-भरकम फेसलिफ्ट ज्यादा लगती है। इसमें वह ‘वाओ फैक्टर’ थोड़ा कम है जो पहली बार सेल्टोस को देखने पर आया था। इसके अलावा, इसकी पिछली LED टेल लैंप की बनावट मुझे कुछ हद तक महिंद्रा की आने वाली SUVs की याद दिलाती है। यह कोई नकल नहीं है, पर डिज़ाइन लैंग्वेज में समानता खटकती है।
इंटीरियर और तकनीक: केबिन के अंदर का ‘जादू’
असली खेल गाड़ी के अंदर शुरू होता है। किआ ने ड्राइवर और पैसेंजर्स के आराम पर काफी बारीकी से काम किया है। सबसे बड़ा आकर्षण है इसका ‘ट्रिनिटी डिस्प्ले’। यह 30 इंच का एक लंबा पैनल है जो तीन हिस्सों में बंटा है—दो 12.3 इंच की स्क्रीन और बीच में एयर कंडीशनिंग के लिए एक छोटी 5 इंच की स्क्रीन।
दिखने में यह बहुत ही प्रीमियम है, लेकिन एक व्यावहारिक समस्या है। अगर आप स्टीयरिंग को 10 और 2 की पोजीशन पर पकड़ते हैं, तो ड्राइवर की नजर से बीच वाली स्क्रीन का कुछ हिस्सा छिप जाता है। फीचर्स देना अच्छी बात है, पर ‘अर्कोनॉमिक्स’ (Ergonomics) का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है।
अच्छी बात यह है कि किआ अब समझदार फैसले ले रही है। Android Auto और Apple CarPlay को स्टैंडर्ड बनाना एक बेहतरीन कदम है। साथ ही, अब आपको मिड-ट्रिम्स (जैसे HTK Optional) में भी पैनोरमिक सनरूफ और वेंटिलेटेड सीट्स जैसे फीचर्स मिल रहे हैं। यह एक मास्टरस्ट्रोक है क्योंकि हर कोई टॉप-एंड मॉडल नहीं खरीदना चाहता, लेकिन फीचर्स सबको चाहिए।
स्पेस और कंफर्ट: व्हीलबेस बढ़ने का असली फायदा
अक्सर कंपनियां व्हीलबेस बढ़ाने का दावा तो करती हैं, लेकिन पीछे बैठने वालों को उसका फायदा नहीं मिलता। नई सेल्टोस में ऐसा नहीं है। पीछे की सीट पर नी-रूम (Knee room) में काफी सुधार हुआ है। मेरी लंबी हाइट के बावजूद, जब अगली सीट को पीछे किया गया, तब भी मेरे पास पर्याप्त जगह थी।
सीटों का रिक्लाइन फंक्शन लंबी यात्राओं को थकान मुक्त बनाता है। एक छोटी लेकिन काम की बात—किआ ने चार्जिंग पॉइंट्स को थोड़ा ऊपर शिफ्ट किया है, जो काफी सुविधाजनक है। बूट स्पेस में भी 14 लीटर की मामूली बढ़ोतरी हुई है (अब 447 लीटर), जो शायद किआ के प्लान में नहीं था लेकिन प्लेटफॉर्म बदलने की वजह से बोनस के तौर पर मिल गया।
परफॉर्मेंस और हैंडलिंग: कहाँ रह गई कमी?
यहाँ आकर मेरा नजरिया थोड़ा ‘क्रिटिकल’ हो जाता है। नई जनरेशन के साथ हम नए इंजन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन किआ ने पुराने पावरट्रेन को ही जारी रखा है—1.5 लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड, 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल और 1.5 लीटर डीजल।
मैंने इसका 1.5 लीटर टर्बो पेट्रोल चलाया। 158 bhp की ताकत सुनने में बहुत अच्छी लगती है, लेकिन ‘इकोनॉमी मोड’ में यह गाड़ी बहुत सुस्त महसूस होती है। ओवरटेकिंग के समय आपको सोचना पड़ता है क्योंकि टॉर्क 2000 RPM से पहले जागता ही नहीं है। असली जान 2200 से 2500 RPM के बीच आती है।
एक और बड़ी निराशा है इसका ‘रिफाइनमेंट’ लेवल। पुराने सेल्टोस का केबिन बहुत शांत था, लेकिन इस नई गाड़ी में 4000 RPM के ऊपर इंजन का शोर केबिन के अंदर साफ सुनाई देता है। यह बात पेट्रोल और डीजल दोनों इंजनों पर लागू होती है।
सबसे ज्यादा खटकने वाली बात है इसका सस्पेंशन। किआ ने इसे पहले से ज्यादा ‘सॉफ्ट’ कर दिया है। खराब रास्तों पर यह झटके तो सोख लेती है, लेकिन पुराने मॉडल जैसी जो ‘कॉन्फिडेंट हैंडलिंग’ और ‘फर्मनेस’ थी, वह गायब है। अब इसमें थोड़ा ‘लैटरल मूवमेंट’ (साइड की तरफ झुकाव) महसूस होता है, जो उत्साही ड्राइवरों को पसंद नहीं आएगा।
सुरक्षा और फीचर्स: सेल्टोस की ढाल
परफॉर्मेंस की कमियों को इसके फीचर्स ढक लेते हैं। किआ अब ADAS लेवल 2 प्लस दे रही है, जिसमें 21 स्वायत्त सुरक्षा फीचर्स शामिल हैं। 6 एयरबैग्स को स्टैंडर्ड करना और बेस वेरिएंट से ही ऑप्शनल इक्विपमेंट का विकल्प देना एक ‘जीनियस’ मार्केटिंग रणनीति है। इसका मतलब है कि आप कम पैसे देकर बेस मॉडल लें और अपनी पसंद के कुछ खास फीचर्स के लिए अतिरिक्त भुगतान करें।
फैसला: क्या आपको इसे खरीदना चाहिए?
नई किआ सेल्टोस एक ‘मिड-लाइफ क्राइसिस’ से गुजर रही गाड़ी लगती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जिन्हें तकनीक, ढेर सारे फीचर्स और ज्यादा केबिन स्पेस चाहिए। लेकिन अगर आप एक ऐसी गाड़ी ढूंढ रहे हैं जो चलाने में बहुत रोमांचक हो और जिसका सस्पेंशन स्पोर्टी हो, तो शायद आप पुराने मॉडल को याद करेंगे।
किआ इंडिया के लिए असली चुनौती इसकी कीमत होगी। अगर वे इसकी शुरुआती कीमत को आक्रामक रखते हैं, तो यह टाटा सिएरा जैसी आने वाली चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर पाएगी।



