उत्तराखण्ड

Shri Nanda Devi Rajjat Yatra 2026: 12 वर्षों का इंतजार और हिमालयी महाकुंभ, श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा 2026

Shri Nanda Devi Rajjat Yatra 2026: उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में आयोजित होने वाली सबसे कठिन और पवित्र यात्राओं में से एक, श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा के लिए 2026 का साल ऐतिहासिक होने वाला है। इस यात्रा को (Himalayan Pilgrimage) का महाकुंभ कहा जाता है, जिसमें श्रद्धालु 280 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा तय करते हैं। 12 वर्षों के अंतराल के बाद होने वाले इस आयोजन में न केवल स्थानीय लोग, बल्कि दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु शामिल होने की उम्मीद है।

Shri Nanda Devi Rajjat Yatra 2026
Shri Nanda Devi Rajjat Yatra 2026

बसंत पंचमी पर जारी होगा आधिकारिक कार्यक्रम

यात्रा की तिथियों और कार्यक्रमों को लेकर श्रद्धालुओं की उत्सुकता अब खत्म होने वाली है। आगामी 23 जनवरी को बसंत पंचमी के पावन पर्व पर राजवंशी राजकुंवर (Official Schedule) जारी करेंगे। इस घोषणा के साथ ही यात्रा की औपचारिक तैयारियां अपने चरम पर पहुंच जाएंगी। चमोली के नौटी गांव में आयोजित होने वाले भव्य महोत्सव में इस महाकुंभ की रूपरेखा तय की जाएगी, जिसमें गढ़वाल और कुमाऊं के राजवंशों की गरिमामयी उपस्थिति होगी।

ढांचागत विकास और सरकार की व्यापक तैयारियां

यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार और राजजात समिति पिछले दो वर्षों से युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। पैदल रास्तों का सुधारीकरण और पड़ावों पर (Infrastructure Development) के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों के ठहरने, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विशेष बजट आवंटित किया गया है। दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में संचार और बिजली की व्यवस्था दुरुस्त करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है।

देवी-देवताओं की डोलियों का अलौकिक समागम

यह यात्रा केवल एक पैदल मार्च नहीं है, बल्कि सैकड़ों देवी-देवताओं की डोलियों और छंतोलियों का एक दिव्य मिलन है। 20 दिनों तक चलने वाले इस (Cultural Heritage) के उत्सव में नंदा देवी को उनके ससुराल (कैलाश) विदा करने की परंपरा निभाई जाती है। यात्रा के दौरान लोक गीतों, जागरों और पारंपरिक अनुष्ठानों से पूरा हिमालयी क्षेत्र गुंजायमान रहता है, जो उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को दर्शाता है।

नौटी महोत्सव और कूटनीतिक आयोजन

20 जनवरी से नौटी में शुरू होने वाले महोत्सव में विशेष पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। समिति के महासचिव भुवन नौटियाल के अनुसार, इस बार (Religious Gathering) को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कई नवाचार किए जा रहे हैं। यात्रा के पड़ावों पर स्थानीय उत्पादों के प्रमोशन और इको-पर्यटन पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि स्थानीय निवासियों को भी इस महाकुंभ का लाभ मिल सके।

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