Uttarakhand Snowfall Forecast 2026: देवभूमि की सूनी चोटियों पर फिर बिछेगी कुदरत की सफेद चादर, नए साल की पहली सुबह पर्यटकों को मिलेगा बर्फीला सरप्राइज
Uttarakhand Snowfall Forecast 2026: नए साल 2026 का आगाज हो चुका है और देवभूमि उत्तराखंड की वादियां पर्यटकों से गुलजार हैं, लेकिन इस बार पहाड़ों की रानी मसूरी और नैनीताल की चोटियां उस चिर-परिचित सफेदी के लिए तरस रही हैं। पूर्व के वर्षों में जहां जनवरी की शुरुआत तक पहाड़ बर्फ से लकदक हो जाया करते थे, इस बार अभी तक (Winter Season) की पहली जोरदार बर्फबारी का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। सैलानियों की टोली हाथों में कैमरा लिए बादलों की ओर टकटकी लगाए बैठी है कि कब कुदरत अपनी सफेद चादर बिछाए और उनका नए साल का जश्न मुकम्मल हो सके।

मौसम विभाग ने दी उम्मीदों को नई संजीवनी
बर्फबारी की आस लगाए बैठे लोगों के लिए देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र से एक राहत भरी खबर सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, नए साल के शुरुआती दिनों में ही राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में (Weather Update) के तहत हल्की बारिश और बर्फबारी की प्रबल संभावना बन रही है। इस पूर्वानुमान ने न केवल पर्यटकों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी है, बल्कि पर्यटन व्यवसाय से जुड़े स्थानीय लोगों में भी उत्साह भर दिया है। चोटियों पर गिरने वाली बर्फ की एक-एक फुहार यहां के पर्यटन को नई ऊंचाइयां देने का दम रखती है।
सूखे के संकट और कम बारिश ने बढ़ाई थी चिंता
पिछले कुछ महीनों का डेटा विश्लेषण करें तो पता चलता है कि उत्तराखंड में इस बार मॉनसून के बाद की स्थिति सामान्य नहीं रही है। आईएमडी देहरादून के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर से लेकर 30 दिसंबर तक राज्य में सामान्य से (Rainfall Deficit) लगभग 24 प्रतिशत दर्ज की गई है। बारिश की इस कमी ने न केवल खेती-किसानी को प्रभावित किया है, बल्कि पहाड़ों पर नमी की मात्रा को भी कम कर दिया है। यही कारण है कि इस बार कड़ाके की ठंड होने के बावजूद वह नमी नहीं बन पा रही थी जो बर्फबारी के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से बदलेगा मिजाज
मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में एक ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की कगार पर है, जिसका सीधा असर उत्तराखंड के मौसम पर पड़ेगा। इस (Western Disturbance) के प्रभाव से पर्वतीय क्षेत्रों में बादल छाने और बहुत हल्की से हल्की बारिश होने के आसार हैं। यह मौसमी तंत्र जैसे ही हिमालयी क्षेत्रों से टकराएगा, वैसे ही राज्य के ऊंचे शिखरों पर बर्फ की फुहारें गिरना शुरू हो जाएंगी। सैलानियों के लिए यह किसी जादुई पल से कम नहीं होगा जब सूखी चोटियां अचानक चांदी की तरह चमकने लगेंगी।
ऊंचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात की संभावना
विशेषज्ञों का अनुमान है कि समुद्र तल से 3000 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी की तीव्रता अधिक रह सकती है। दो जनवरी को इस मौसमी सिस्टम की सक्रियता भले ही थोड़ी कम रहे, लेकिन उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जैसे (High Altitude Regions) में कुदरत का करिश्मा देखने को मिल सकता है। इसके अलावा बागेश्वर और पिथौरागढ़ के सीमावर्ती इलाकों में भी हल्की बर्फबारी और बारिश की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने वाले यात्रियों को सतर्क रहने और पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखने की सलाह दी गई है।
मैदानी इलाकों में घने कोहरे का रहेगा साम्राज्य
एक तरफ जहां पहाड़ों पर बर्फबारी का नजारा होगा, वहीं उत्तराखंड के मैदानी जिले कुहासे की चपेट में रहने वाले हैं। ऊधमसिंह नगर, नैनीताल के निचले इलाके और पौड़ी के मैदानी क्षेत्रों में (Dense Fog) का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कोहरे के कारण दृश्यता काफी कम हो सकती है, जिससे सड़क यातायात और ट्रेनों की आवाजाही पर सीधा असर पड़ सकता है। हाईवे पर सफर करने वाले चालकों को विशेष सावधानी बरतने और फॉग लाइट का इस्तेमाल करने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
गिरता पारा और हाड़ कंपाने वाली ठंड का दौर
मौसम में आ रहे इस बदलाव का सीधा असर तापमान पर भी देखने को मिलेगा। अगले दो दिनों के भीतर अधिकतम तापमान में (Temperature Drop) दो से चार डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की जा सकती है। कड़ाके की ठंड और पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं मैदानों में ठिठुरन बढ़ाएंगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि बादलों के छाने और बारिश होने से न्यूनतम तापमान में भले ही बहुत बड़ी गिरावट न हो, लेकिन दिन के समय धूप न निकलने से गलन वाली ठंड महसूस होगी। यह मौसम बुजुर्गों और बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पर्यटकों के उल्लास और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
नए साल पर बर्फबारी की खबर मिलते ही चकराता, धनोल्टी और औली जैसे पर्यटन केंद्रों की ओर पर्यटकों का रुख तेज हो गया है। स्थानीय प्रशासन ने (Tourist Safety) को प्राथमिकता देते हुए फिसलन वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी है। सैलानियों से अपील की गई है कि वे बर्फबारी के दौरान अधिक ऊंचे और अनजान रास्तों पर न जाएं और स्थानीय गाइड की मदद जरूर लें। उम्मीद है कि साल 2026 की यह पहली बर्फबारी न केवल वादियों की प्यास बुझाएगी, बल्कि देवभूमि की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक नई शुरुआत साबित होगी।



