Abhyudaya Yojana Recruitment Scam: मेधावियों के हक पर पड़ा डाका, अभ्युदय योजना में फर्जीवाड़े का हुआ भंडाफोड़
Abhyudaya Yojana Recruitment Scam: उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना में सेंध लगाने वाले भ्रष्टाचारियों पर अब कानून का शिकंजा कस गया है। राज्यमंत्री असीम अरुण ने कोर्स कोऑर्डिनेटरों की भर्ती प्रक्रिया में हुई गंभीर अनियमितताओं को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लखनऊ में नियमों को ताक पर रखकर (Recruitment Irregularities) को अंजाम देने वाली आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज की गई है, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की जड़ तक जाने के लिए प्रशासनिक जांच की कमान भी सौंप दी गई है।

आउटसोर्सिंग कंपनी और जालसाजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
भर्ती में हुए इस खेल के मुख्य किरदारों की पहचान कर ली गई है। लखनऊ स्थित आउटसोर्सिंग कंपनी ‘अवनी परिधि एनर्जी एंड कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड’ (Avni Paridhi Energy) और संबंधित अपात्र आवेदकों के खिलाफ षड्यंत्र रचने, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और नियम विरुद्ध नियुक्तियां कराने के गंभीर आरोपों में मामला दर्ज किया गया है। राज्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी संस्था या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
विभागीय जांच में खुली सिस्टम की पोल
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब 29 अक्टूबर 2025 को भर्ती में धांधली की प्रारंभिक शिकायत विभाग को प्राप्त हुई। असीम अरुण ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए (Departmental Inquiry) के आदेश दिए, जिसमें भर्ती से संबंधित एक-एक फाइल और सर्टिफिकेट की बारीकी से जांच की गई। जांच दल ने जब दस्तावेजों का मिलान किया, तो परत-दर-परत सच्चाई सामने आने लगी कि किस तरह योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर अपात्रों को पिछले दरवाजे से एंट्री दी गई थी।
पात्रता के नियमों को बेरहमी से कुचला गया
अभ्युदय योजना के तहत कोर्स कोऑर्डिनेटर जैसे जिम्मेदार पद के लिए मानक बहुत स्पष्ट थे। नियमानुसार, इस पद के लिए केवल वही अभ्यर्थी योग्य थे जिन्होंने यूपी पीसीएस (UP PCS Mains) की मुख्य परीक्षा कम से कम एक बार पास की हो। हालांकि, जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कई ऐसे लोगों को कुर्सियों पर बैठा दिया गया जिन्होंने कभी मुख्य परीक्षा की दहलीज तक नहीं लांघी थी। यह सीधे तौर पर उन मेधावी छात्रों के साथ विश्वासघात था जो अपनी मेहनत के दम पर आगे बढ़ना चाहते थे।
69 में से 48 अभ्यर्थी पाए गए पूरी तरह अपात्र
जांच रिपोर्ट के आंकड़े भ्रष्टाचार की भयावहता को बयां कर रहे हैं। विभाग द्वारा कुल 69 चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की पड़ताल की गई, जिनमें से केवल 21 लोग ही निर्धारित (Eligibility Criteria) को पूरा करते पाए गए। बाकी के 48 अभ्यर्थियों ने पद पाने के लिए फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों का सहारा लिया था। रिपोर्ट में यह भी अंकित किया गया है कि आउटसोर्सिंग कंपनी ने जानबूझकर इन फर्जी दस्तावेजों को नजरअंदाज किया, जिससे उसकी भूमिका प्रथम दृष्टया दोषी पाई गई है।
लापरवाह अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
राज्यमंत्री असीम अरुण ने केवल बाहरी कंपनी पर ही नहीं, बल्कि विभाग के अंदर बैठे ‘विभीषणों’ पर भी निशाना साधा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी (Document Verification) की थी, उनकी भूमिका की भी गहनता से प्रशासनिक जांच की जाए। अगर सत्यापन के दौरान किसी भी कर्मचारी की मिलीभगत या घोर लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य के लिए नजीर पेश की जा सके।
भविष्य की नियुक्तियों के लिए अभेद्य सुरक्षा चक्र
इस कड़वे अनुभव के बाद उत्तर प्रदेश सरकार अब आउटसोर्सिंग के जरिए होने वाली भर्तियों के लिए एक नया और सख्त प्रोटोकॉल तैयार कर रही है। राज्यमंत्री ने आदेश दिया है कि अब से होने वाली सभी (Outsourcing Recruitment) में पुलिस वेरिफिकेशन और ओरिजिनल डॉक्यूमेंट का फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। इसके बिना किसी भी अभ्यर्थी को जॉइनिंग लेटर नहीं दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप और गड़बड़ियों की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करना है।
वर्तमान कर्मचारियों का भी होगा ‘शक्ति’ परीक्षण
सरकार ने केवल नई भर्तियों तक ही अपनी कार्रवाई को सीमित नहीं रखा है। राज्यमंत्री ने वर्तमान में कार्यरत सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का (Credential Verification) दोबारा कराने का आदेश दिया है। इससे उन लोगों में हड़कंप मच गया है जो गलत तरीके से सिस्टम में प्रवेश कर गए थे। इस अभियान का मकसद विभाग की सफाई करना और केवल उन्हीं लोगों को पद पर बनाए रखना है जो वास्तव में उस काम के योग्य हैं और जिनके पास वैध डिग्रियां हैं।
अभ्युदय योजना की साख बचाने की कोशिश
मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का उद्देश्य गरीब और होनहार छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग देना है। ऐसे में (Educational Integrity) को बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। असीम अरुण ने कहा कि अगर कोच और कोआर्डिनेटर ही गलत तरीके से नियुक्त होंगे, तो वे छात्रों का मार्गदर्शन कैसे करेंगे? इसलिए, इस योजना की पवित्रता बनाए रखने के लिए यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जरूरी थी, ताकि योग्य युवाओं का भरोसा तंत्र पर बना रहे।
जीरो टॉलरेंस की नीति पर अडिग सरकार
अंततः, यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है। (Administrative Accountability) को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया यह फैसला बताता है कि उत्तर प्रदेश में अब पारदर्शी व्यवस्था ही एकमात्र विकल्प है। असीम अरुण के इस कड़े रुख ने उन निजी कंपनियों को भी चेतावनी दे दी है जो सरकारी ठेकों की आड़ में धांधली करने का सपना देखते थे। अब देखना यह है कि जांच की आंच और कितने बड़े चेहरों तक पहुँचती है।



