West Bengal Border Fencing Dispute: अमित शाह का ममता सरकार पर सीधा वार, क्या घुसपैठ बनेगा 2026 की जीत का आधार…
West Bengal Border Fencing Dispute: पश्चिम बंगाल के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। शाह ने स्पष्ट आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार जानबूझकर सीमा पर ‘बाड़’ यानी फेंसिंग लगाने के काम में अड़ंगा डाल रही है। गृह मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार सुरक्षा के लिए तैयार है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा (Land Acquisition for Border Fencing) की प्रक्रिया में सहयोग न करना राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

450 किमी का ‘खुला बॉर्डर’ और सुरक्षा की चुनौती
भारत और बांग्लादेश के बीच पश्चिम बंगाल की 2216 किलोमीटर लंबी सीमा सबसे संवेदनशील मानी जाती है। अमित शाह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि इसमें से लगभग 450 किलोमीटर का हिस्सा आज भी पूरी तरह से खुला पड़ा है। (Porous Border Security Concerns) के कारण यह क्षेत्र घुसपैठियों के लिए आसान रास्ता बन गया है। शाह ने लोकसभा में भी यह मुद्दा उठाया था कि दस रिमाइंडर भेजने के बावजूद ममता सरकार जमीन उपलब्ध नहीं करा रही है, जिससे फेंसिंग का काम अधर में लटका हुआ है।
घुसपैठियों के खिलाफ ‘नेशनल ग्रिड’ का कड़ा पहरा
घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए अमित शाह ने कोलकाता की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने कहा कि सीमा पर एक ऐसा अभेद्य ‘नेशनल ग्रिड’ बनाया जाएगा जिससे परिंदा भी पर नहीं मार सकेगा। इस (National Security Grid Plan) के तहत न केवल घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, बल्कि उन्हें चिन्हित कर देश से बाहर निकालने की सख्त कार्रवाई भी होगी। शाह ने इसे बंगाल की अस्मिता और संस्कृति को बचाने की लड़ाई करार दिया।
चुनावी दंगल 2026: घुसपैठ बनेगा मुख्य चुनावी मुद्दा
अमित शाह ने साफ कर दिया कि 2026 का विधानसभा चुनाव बंगाल के भविष्य के लिए निर्णायक होगा। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के 15 साल के शासन में बंगाल ने केवल डर और कुशासन देखा है। भाजपा का मानना है कि (West Bengal Assembly Elections 2026) में घुसपैठ और फेंसिंग सबसे बड़े मुद्दे होंगे। शाह ने विश्वास जताया कि आगामी चुनावों में जनता घुसपैठ की राजनीति करने वालों को सबक सिखाएगी और राज्य में दो-तिहाई बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनेगी।
हुड़दंग और धार्मिक नारेबाजी: फेंसिंग में बाधा के आरोप
गृह मंत्री ने संसद में ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल’ 2025 पर चर्चा के दौरान बंगाल सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी सीमा पर फेंसिंग का काम शुरू करने का प्रयास किया जाता है, तो सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता (Political Obstruction in Security Work) पैदा करते हैं। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर गुंडागर्दी और धार्मिक नारेबाजी के जरिए सुरक्षा बलों के काम को बाधित किया जाता है, जो सीधे तौर पर घुसपैठियों को मदद पहुंचाने जैसा है।
आंकड़ों की जुबानी: 11 वर्षों में 21 हजार से अधिक गिरफ्तारियां
घुसपैठ की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 11 वर्षों में 21,407 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2014 से 2024 के बीच (Illegal Immigration Arrest Records) में बड़ी संख्या दर्ज की गई है। इस वर्ष नवंबर तक ही 1104 घुसपैठ के प्रयास हुए हैं। अमित शाह ने कहा कि सीमा पर 112 किलोमीटर का हिस्सा भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बाकी 450 किलोमीटर पर केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी के कारण काम रुका हुआ है।
बंगाल की जनसांख्यिकी और नागरिकों की चिंता
प्रेस वार्ता के दौरान शाह ने बंगाल के लोगों की चिंता को स्वर देते हुए कहा कि घुसपैठ के कारण राज्य की जनसांख्यिकी (Demographic Change in Bengal) बदल रही है। उन्होंने पड़ोसी राज्यों जैसे असम और त्रिपुरा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां घुसपैठ पर प्रभावी लगाम लगाई गई है, लेकिन बंगाल में यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि ममता सरकार अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए देश की सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है।
समाधान की राह: संवाद और सख्त कार्रवाई की जरूरत
भले ही केंद्र और राज्य के बीच जमीन को लेकर खींचतान जारी है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर समाधान निकालना अनिवार्य है। अब तक (Centre State Coordination Issues) को सुलझाने के लिए गृह सचिव स्तर की आधा दर्जन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन नतीजा सिफर रहा है। अमित शाह के इस दौरे और कड़े रुख ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में केंद्र सरकार घुसपैठ और फेंसिंग के मुद्दे पर और अधिक आक्रामक रुख अपनाएगी, जिससे बंगाल की राजनीति का पारा चढ़ना तय है।



