उत्तराखण्ड

Congress Protest in Gauchar: केंद्रीय मंत्री और सीएम की मौजूदगी में कांग्रेस ने किया उग्र प्रदर्शन, हिल गया सियासी समीकरण…

Congress Protest in Gauchar: चमोली के गौचर में आयोजित राज्यस्तरीय कृषि मेले के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। देवभूमि की बेटी (Ankita Bhandari Justice Case) की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं का आक्रोश सातवें आसमान पर था। मेले की चमक-धमक के बीच नारों की गूंज ने प्रशासन की पेशानी पर बल ला दिए, क्योंकि इस विरोध प्रदर्शन का समय बेहद संवेदनशील चुना गया था।

Congress Protest in Gauchar
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वीआईपी दौरों के बीच सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश

गौचर का यह मेला इस बार इसलिए भी खास था क्योंकि इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शिरकत करने पहुंचे थे। वीआईपी मूवमेंट के कारण (High Profile Political Visit) के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जैसे ही कांग्रेसियों ने मुख्य कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ने का प्रयास किया, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक दी, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक

कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार डिमरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शिव गंगा वेडिंग प्वाइंट पर एकत्रित हुए थे। यहाँ से जब जुलूस मेले की ओर बढ़ा, तो (Police Action on Protesters) के तहत पुलिस ने जगह-जगह भारी बैरिकेडिंग लगा दी थी। प्रदर्शनकारियों ने जब बैरिकेड्स लांघने की कोशिश की, तो पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई, जिसके बाद कई प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं को जबरन हिरासत में ले लिया गया।

जंगली जानवरों का खौफ और किसानों की बदहाली पर घेरा

अंकिता भंडारी मामले के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों के बढ़ते आतंक का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि (Wildlife Conflict in Uttarakhand) के कारण ग्रामीण खेती छोड़ने को मजबूर हैं, लेकिन सरकार केवल मेलों के आयोजन में व्यस्त है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार केवल मंचों से घोषणाएं न करे, बल्कि धरातल पर किसानों की सुरक्षा के ठोस इंतजाम सुनिश्चित करे।

हिरासत में लिए गए दिग्गज कांग्रेस कार्यकर्ता

मेले की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। जिलाध्यक्ष सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं को (Detention of Political Activists) की प्रक्रिया के तहत पुलिस वैन में भरकर ले जाया गया। कांग्रेस ने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए कहा कि सरकार जनता की आवाज को दबाने के लिए खाकी का सहारा ले रही है।

सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग हुई तेज

गौचर की इस घटना ने उत्तराखंड की राजनीति में एक नया उबाल ला दिया है। एक तरफ जहां सरकार इसे कृषि विकास का बड़ा उत्सव बता रही है, वहीं विपक्ष इसे (Political Confrontation in Chamoil) के मौके के रूप में देख रहा है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक अंकिता भंडारी के हत्यारों के संरक्षकों के नाम उजागर नहीं होते और किसानों को मुआवजा नहीं मिलता, उनका संघर्ष सड़कों पर इसी तरह जारी रहेगा।

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