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North Korea Cruise Missile Test 2025: तानाशाह किम जोंग उन ने दी बारूद भरी चेतावनी, क्या अमेरिका के साथ आर-पार की जंग की है तैयारी…

North Korea Cruise Missile Test 2025: दुनिया के कड़े प्रतिबंधों और अमेरिका की लगातार मिल रही धमकियों को दरकिनार करते हुए किम जोंग उन ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है। उत्तर कोरिया ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसने अपनी परमाणु निरोधक क्षमता को परखने के लिए लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों का सफल परीक्षण किया है। यह सैन्य अभ्यास (Strategic Weapon Demonstration) ऐसे समय में किया गया है जब कुछ ही दिन पहले प्योंगयांग ने अपनी पहली परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बी के निर्माण में बड़ी सफलता का दावा किया था। इस घटनाक्रम ने वाशिंगटन से लेकर सियोल तक रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है।

North Korea Cruise Missile Test 2025
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आखिर किम जोंग उन क्यों कर रहे हैं ताबड़तोड़ परीक्षण?

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन काफी समय पहले ही अपनी सेना को युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार रहने का फरमान जारी कर चुके हैं। जानकारों का मानना है कि भले ही किम का तात्कालिक दुश्मन दक्षिण कोरिया नजर आता हो, लेकिन उनकी असली सैन्य तैयारी अमेरिका के खिलाफ है। चूंकि अमेरिका दक्षिण कोरिया का सबसे बड़ा संरक्षक है, इसलिए उत्तर कोरिया अपनी (War Preparedness Strategy) को लगातार धार दे रहा है। रविवार का यह परीक्षण आगामी सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी कांग्रेस से पहले हथियारों के प्रदर्शन की एक कड़ी मात्र है, जहाँ किम अपनी भविष्य की नीतियों का खुलासा कर सकते हैं।

परमाणु निरोधक क्षमता को बढ़ाने की अंधी दौड़

बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच उत्तर कोरिया का प्राथमिक लक्ष्य अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को अभेद्य बनाना है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी तट से किए गए इस मिसाइल परीक्षण पर किम जोंग उन ने “बड़ी संतुष्टि” व्यक्त की है। किम ने इन परीक्षणों को (Nuclear Deterrence Capability) की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने वाला कदम बताया है। उनके अनुसार, बाहरी सुरक्षा खतरों के बीच यह आत्मरक्षा के अधिकार का एक जिम्मेदार अभ्यास है, जिसे रोकने का हक किसी भी बाहरी शक्ति को नहीं है।

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य समन्वय

उत्तर कोरिया की इस हिमाकत पर दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पुष्टि की है कि प्योंगयांग के राजधानी क्षेत्र से कई क्रूज मिसाइलें दागी गई हैं, जिनकी निगरानी सियोल और वाशिंगटन की संयुक्त टीमें कर रही थीं। दक्षिण कोरिया ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ अपने (Military Alliance Cooperation) के माध्यम से किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के बावजूद किम जोंग उन का इस तरह मिसाइलें दागना वैश्विक नियमों को खुली चुनौती देने जैसा है।

रडार को चकमा देने वाली क्रूज मिसाइलों का खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया के पास मौजूद बैलिस्टिक मिसाइलें तो रडार की पकड़ में आ सकती हैं, लेकिन क्रूज मिसाइलें अधिक खतरनाक हैं। ये मिसाइलें बहुत कम ऊंचाई पर उड़ती हैं और दिशा बदलने में माहिर होती हैं, जिससे (Radar Detection Avoidance) में इन्हें महारत हासिल है। विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में उत्तर कोरिया इन मिसाइलों का उपयोग अमेरिकी युद्धपोतों और विमानवाहक पोतों को नष्ट करने के लिए करेगा, जो प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए एक बड़ा खतरा है।

परमाणु पनडुब्बी: किम जोंग उन का नया घातक हथियार

पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया ने अपनी नई एंटी-एयर मिसाइलों के परीक्षण के साथ ही एक निर्माणाधीन परमाणु ऊर्जा संचालित पनडुब्बी की तस्वीरें भी साझा की थीं। किम ने वादा किया है कि वह इस पनडुब्बी को (Advanced Weapon Systems) और परमाणु मिसाइलों से लैस करेंगे। यह कदम अमेरिका के नेतृत्व वाली सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की उनकी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। उत्तर कोरिया अब केवल जमीन से ही नहीं, बल्कि समुद्र की गहराइयों से भी परमाणु हमला करने की क्षमता विकसित करने के बेहद करीब पहुँच चुका है।

कूटनीतिक चाल या बातचीत के लिए दबाव बनाने की रणनीति?

2019 में डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत के विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु शस्त्रागार का तेजी से विस्तार किया है। हालांकि, किम ने हाल ही में संकेत दिया है कि यदि अमेरिका उनके (Nuclear Disarmament Policy) के प्रति अपने “भ्रामक जुनून” को छोड़ दे, तो वह बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किम अपने हथियारों का प्रदर्शन केवल डराने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की वार्ताओं में अधिक लाभ और रियायतें हासिल करने के लिए कर रहे हैं।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता अनिश्चितता का माहौल

उत्तर कोरिया की ये गतिविधियां दर्शाती हैं कि वह किसी भी कीमत पर अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटने वाला नहीं है। आने वाले समय में (Geopolitical Conflict Risks) और बढ़ने की आशंका है, क्योंकि किम जोंग उन अपने शस्त्रागार को और अधिक आधुनिक बनाने में जुटे हैं। दुनिया भर की नजरें अब अगले साल की शुरुआत में होने वाली वर्कर्स पार्टी कांग्रेस पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति का मार्ग खुलेगा या फिर तनाव एक नए विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ जाएगा।

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