MouthUlcer – बार-बार मुंह में छाले पड़ना इन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का हो सकता है संकेत
MouthUlcer – मुंह में छाले होना आम समस्या मानी जाती है और अधिकांश मामलों में यह कुछ दिनों के भीतर ठीक भी हो जाती है। लेकिन यदि यह परेशानी बार-बार लौट रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसे केवल सामान्य संक्रमण या मसालेदार भोजन का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार होने वाले मुंह के छाले कई बार शरीर में पोषण की कमी, पाचन संबंधी गड़बड़ी या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकते हैं। यदि इसके साथ तेज दर्द, बुखार, वजन घटना या बार-बार संक्रमण जैसी शिकायतें भी हों, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी हो जाता है।

पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि विटामिन B12, आयरन और फोलिक एसिड की कमी होने पर मुंह की अंदरूनी परत प्रभावित हो सकती है, जिससे बार-बार छाले बनने लगते हैं। इसके साथ कमजोरी, थकान, चक्कर आना, जीभ में जलन, स्वाद में बदलाव और त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, दूध, अंडे, मछली, मांस और सूखे मेवे शामिल करने से इन पोषक तत्वों की पूर्ति में मदद मिल सकती है।
पाचन तंत्र की बीमारियों से भी जुड़ा हो सकता है संबंध
बार-बार होने वाले मुंह के छालों का संबंध कुछ पाचन संबंधी रोगों से भी हो सकता है। सीलिएक डिजीज, क्रोहन डिजीज और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियों में शरीर जरूरी पोषक तत्वों को पर्याप्त मात्रा में अवशोषित नहीं कर पाता। इसके कारण पोषण की कमी होने लगती है और मुंह के छाले बार-बार उभर सकते हैं। यदि छालों के साथ पेट दर्द, दस्त, गैस, भूख कम लगना या वजन घटना जैसी शिकायतें भी हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहेगा।
कमजोर इम्यूनिटी और डायबिटीज भी बढ़ा सकती है जोखिम
जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, तब संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी घट जाती है। ऐसी स्थिति में मुंह के भीतर बैक्टीरिया या वायरस का प्रभाव बढ़ सकता है और छाले जल्दी-जल्दी बनने लगते हैं। लगातार तनाव, अपर्याप्त नींद, असंतुलित खानपान या कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन भी इम्यूनिटी को प्रभावित कर सकता है। वहीं अनियंत्रित डायबिटीज में भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिससे मुंह के घाव देर से भरते हैं और बार-बार छाले बनने की संभावना बढ़ जाती है।
ऑटोइम्यून रोगों में भी दिखाई दे सकता है यह लक्षण
कुछ ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही स्वस्थ ऊतकों पर हमला करने लगती है। बेहसेट सिंड्रोम और ल्यूपस जैसी बीमारियों में मुंह के अंदर बार-बार छाले या घाव होना शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकता है। ऐसे मामलों में आंखों में सूजन, त्वचा संबंधी समस्याएं या शरीर के अन्य हिस्सों में भी लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए लगातार समस्या होने पर केवल घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि मुंह के छाले दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, बार-बार दोबारा निकलें, खाने-पीने में अत्यधिक दर्द हो, बुखार या बिना कारण वजन कम होने लगे या मुंह के अंदर लाल अथवा सफेद धब्बे दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर जांच कराने से वास्तविक कारण का पता लगाया जा सकता है और आवश्यक उपचार शुरू किया जा सकता है।