स्वास्थ्य

JuvenileArthritis – बच्चों में भी हो सकता है गठिया, समय रहते पहचानना है बेहद जरूरी…

JuvenileArthritis – गठिया को अक्सर बढ़ती उम्र से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या बच्चों में भी देखी जाती है। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में होने वाले इस रोग को जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) कहा जाता है। शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य चोट या थकान जैसे लगते हैं, जिससे समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि लंबे समय तक जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहे तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

बच्चों में क्यों होती है यह बीमारी?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपनी ही स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इससे जोड़ों में सूजन और दर्द पैदा होता है। अभी तक इसके सटीक कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है, हालांकि आनुवंशिक प्रवृत्ति और कुछ पर्यावरणीय कारकों को इसके संभावित कारणों में माना जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग हर एक हजार बच्चों में से एक बच्चा इस बीमारी से प्रभावित हो सकता है।

किन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चों में गठिया हमेशा तेज दर्द के रूप में सामने नहीं आता। कई बार बच्चा सुबह उठने के बाद जोड़ों में अकड़न महसूस करता है, चलते समय लंगड़ाता है या किसी एक हाथ या पैर का कम इस्तेमाल करने लगता है। घुटनों, टखनों, कलाई या उंगलियों में सूजन भी दिखाई दे सकती है। कुछ मामलों में हल्का बुखार, लगातार थकान और भूख कम लगने जैसी शिकायतें भी सामने आती हैं। यदि ऐसे लक्षण छह सप्ताह या उससे अधिक समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक माना जाता है।

सिर्फ जोड़ों तक सीमित नहीं रहता असर

डॉक्टरों के अनुसार, कुछ बच्चों में यह बीमारी केवल जोड़ों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि आंखों, हड्डियों और शारीरिक विकास पर भी असर डाल सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर जोड़ों को स्थायी नुकसान, चलने-फिरने में कठिनाई और भविष्य में विकलांगता जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। कुछ मामलों में आंखों की अंदरूनी परत में सूजन, त्वचा पर चकत्ते, लिम्फ नोड्स में सूजन और लगातार बुखार जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं।

समय पर इलाज से मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों का कहना है कि जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस का समय रहते पता चल जाए तो इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार का मुख्य उद्देश्य दर्द और सूजन को कम करना तथा जोड़ों को स्थायी क्षति से बचाना होता है। जरूरत के अनुसार सूजन कम करने वाली दवाएं दी जाती हैं। इसके साथ संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जीवनशैली में बदलाव भी उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।

अभिभावकों की सतर्कता है सबसे अहम

चिकित्सकों का मानना है कि बच्चों के जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या चलने-फिरने के तरीके में बदलाव को सामान्य खेल-कूद की चोट मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआती जांच और सही इलाज से अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं और भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है। इसलिए यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो बिना देरी किए बाल रोग विशेषज्ञ या रुमेटोलॉजिस्ट से परामर्श लेना बेहतर माना जाता है।

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