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CyberSafety – इन आसान सावधानियों से माता-पिता को ऑनलाइन ठगी से रखें सुरक्षित

CyberSafety – डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। साइबर अपराधी अब ऐसे तरीके अपना रहे हैं, जिनमें कुछ ही मिनटों में लोगों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। खासतौर पर बुजुर्ग और तकनीक से कम परिचित लोग आसानी से ठगों के निशाने पर आ जाते हैं। ऐसे में परिवार के सदस्यों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने माता-पिता को समय-समय पर साइबर सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी दें।

डराने या लालच देने वाले कॉल से रहें सतर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, बैंक अधिकारी या किसी सरकारी विभाग का कर्मचारी बताकर फोन करे और डराने या तुरंत कार्रवाई की बात कहे, तो बिना पुष्टि किए उसकी बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। आजकल तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” जैसे झांसे देकर लोगों को ठगा जा रहा है, जबकि कानून के तहत किसी व्यक्ति को केवल फोन कॉल पर गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थिति में कॉल समाप्त करें और तुरंत परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को इसकी जानकारी दें।

बैंक और केवाईसी से जुड़े संदेशों की करें जांच

साइबर ठग अक्सर बैंक, गैस एजेंसी, मोबाइल कंपनी या अन्य संस्थानों के नाम पर फर्जी संदेश और कॉल भेजते हैं। इनमें केवाईसी अपडेट करने या खाता बंद होने की चेतावनी देकर लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है। अपने माता-पिता को समझाएं कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और फोन पर बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या अन्य व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। यदि कोई संदेह हो तो संबंधित संस्था के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करना ही सुरक्षित विकल्प है।

लॉटरी और इनाम के झांसे से बचना जरूरी

कई मामलों में लोगों को फोन या संदेश के माध्यम से लॉटरी जीतने, नकद इनाम मिलने या बड़ी रकम प्राप्त होने का दावा किया जाता है। इसके बदले प्रोसेसिंग फीस या टैक्स के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। ऐसे प्रस्तावों पर विश्वास करने से बचना चाहिए। यदि बिना किसी प्रतियोगिता में भाग लिए इनाम मिलने का दावा किया जाए, तो उसे संदेह की नजर से देखें और किसी भी स्थिति में अग्रिम भुगतान न करें।

अनजान नंबरों से बातचीत में बरतें सावधानी

यदि किसी अपरिचित नंबर से बार-बार कॉल या संदेश आ रहे हों, तो बिना जरूरत बातचीत करने से बचें। अपने माता-पिता को सलाह दें कि वे केवल विश्वसनीय और परिचित नंबरों पर ही प्रतिक्रिया दें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई ऐप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति दें। इस तरह की छोटी-छोटी सावधानियां साइबर ठगी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं।

परिवार के साथ नियमित बातचीत भी है जरूरी

साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। परिवार में समय-समय पर ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीकों पर चर्चा करने से बुजुर्गों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान बेहतर ढंग से कर पाते हैं। किसी भी असामान्य कॉल, संदेश या वित्तीय अनुरोध की स्थिति में पहले परिवार के सदस्यों से सलाह लेना हमेशा समझदारी भरा कदम माना जाता है।

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