उत्तर प्रदेश

Teacher Transfer – तबादला प्रक्रिया में नियमों को लेकर शिक्षकों की बढ़ी चिंता

Teacher Transfer – प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इससे जुड़े कुछ प्रावधानों को लेकर बड़ी संख्या में शिक्षक असमंजस की स्थिति में हैं। विशेष रूप से शिक्षक दंपतियों के बीच तबादला नियमों को लेकर भ्रम बना हुआ है। स्थिति ऐसी है कि कई शिक्षकों ने पहले स्थानांतरण के लिए आवेदन किया, लेकिन बाद में नियमों को समझने के बाद अपने आवेदन वापस लेने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

शिक्षकों का कहना है कि तबादला नीति में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनके व्यावहारिक प्रभाव को लेकर स्पष्टता नहीं है। इसी कारण वे लगातार विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

शिक्षक दंपतियों में सबसे अधिक असमंजस

तबादला प्रक्रिया के तहत एक महत्वपूर्ण प्रावधान शिक्षक दंपतियों से जुड़ा है। नियमों के अनुसार यदि पति और पत्नी दोनों शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं, तो उनके स्थानांतरण को एक ही स्थान पर समायोजित करने का प्रयास किया जाएगा। हालांकि इसके लिए शिक्षक-छात्र अनुपात को प्रमुख आधार बनाया गया है।

शिक्षकों का कहना है कि शासन स्तर पर जारी दिशा-निर्देशों में इस व्यवस्था का उल्लेख स्पष्ट रूप से किया गया था, लेकिन बाद में जारी विस्तृत संचालन निर्देशों में कुछ बिंदुओं को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। इसी वजह से कई शिक्षक अपने संभावित स्थानांतरण को लेकर चिंतित हैं।

निदेशालय पहुंच रहे हैं बड़ी संख्या में शिक्षक

नियमों को लेकर उठ रहे सवालों के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिक्षक बेसिक शिक्षा निदेशालय पहुंचकर जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। कई शिक्षक दंपतियों का कहना है कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि उनका तबादला किस जिले या क्षेत्र में किया जाएगा और शिक्षक-छात्र अनुपात का निर्धारण किस आधार पर होगा।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार शिक्षकों की ओर से लगातार पूछताछ की जा रही है और उन्हें उपलब्ध नियमों के अनुसार जानकारी दी जा रही है।

विभाग ने नियमों को बताया स्पष्ट

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी ने कहा है कि स्थानांतरण प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही संचालित की जा रही है। उनके अनुसार शिक्षक दंपतियों के मामलों में भी शिक्षक-छात्र अनुपात को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि स्थानांतरण प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण चरणों में से एक के तहत सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी की जाएगी। विभाग का मानना है कि सूची जारी होने के बाद कई प्रश्नों का समाधान स्वतः स्पष्ट हो जाएगा।

वरिष्ठ शिक्षकों में बढ़ रही नाराजगी

तबादला प्रक्रिया को लेकर केवल शिक्षक दंपती ही नहीं, बल्कि लंबे समय से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे वरिष्ठ शिक्षकों में भी असंतोष दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि वर्षों की सेवा के बावजूद उन्हें अंतरजनपदीय तबादले का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है।

कुछ शिक्षकों का आरोप है कि कई बार नई नीतियां लागू होती हैं, लेकिन लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों की प्राथमिकताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। इसी कारण वे अपनी मांगों को लेकर संगठित रूप से आवाज उठा रहे हैं।

धरना देने की घोषणा

वरिष्ठ शिक्षकों के एक समूह ने अपनी मांगों के समर्थन में बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना देने की घोषणा की है। शिक्षकों का कहना है कि जो कर्मचारी 10 से 15 वर्षों या उससे अधिक समय से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

शिक्षक प्रतिनिधि राजीव गौड़ ने कहा कि स्थानांतरण प्रक्रिया में वरिष्ठता को महत्वपूर्ण आधार बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को उचित अवसर मिलना चाहिए ताकि वे अपनी पारिवारिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप स्थानांतरण का लाभ प्राप्त कर सकें।

फिलहाल शिक्षकों की निगाहें विभाग द्वारा जारी की जाने वाली आगामी सूची और आगे के निर्णयों पर टिकी हुई हैं, जिनसे तबादला प्रक्रिया की दिशा अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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