LandRecords – पांच गांवों से शुरू हुई डिजिटल भूमि बंदोबस्ती की नई पहल
LandRecords – उत्तराखंड में लंबे अंतराल के बाद भूमि बंदोबस्ती की प्रक्रिया को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। राजस्व विभाग ने राज्य के पांच गांवों में पायलट परियोजना के तहत डिजिटल भूमि अभिलेख तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। इस पहल का उद्देश्य भूमि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में व्यवस्थित करना और भविष्य में पूरे राज्य में इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी करना है।

पांच गांवों को पायलट परियोजना में किया गया शामिल
राजस्व विभाग ने इस परियोजना की शुरुआत पौड़ी, टिहरी और हरिद्वार जिलों के चयनित गांवों से की है। पायलट चरण में पौड़ी जिले के थली और निसनी गांव, टिहरी जिले के पनसूतर और मुखमल गांव तथा हरिद्वार जिले के हंसावाला गांव को शामिल किया गया है। विभाग का मानना है कि इन गांवों में किए जा रहे कार्यों से प्राप्त अनुभव आगे अन्य क्षेत्रों में भूमि बंदोबस्ती के लिए उपयोगी साबित होगा।
कई दशकों बाद शुरू हुई प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार राज्य में 1960 के दशक के बाद बड़े स्तर पर भूमि बंदोबस्ती का कार्य नहीं हो पाया था। बीच-बीच में इस दिशा में प्रयास किए गए, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब राजस्व विभाग ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे भूमि रिकॉर्ड को आधुनिक और पारदर्शी बनाया जा सके।
सर्वेक्षण और सत्यापन का कार्य प्रगति पर
इस परियोजना के तहत भूमि संबंधी आंकड़ों को डिजिटल स्वरूप देने के लिए कई चरणों में कार्य किया जा रहा है। इनमें ड्रोन आधारित सर्वेक्षण, भू-सत्यापन, पुराने अभिलेखों का मिलान और संबंधित पक्षों की आपत्तियों या सुझावों को सुनने की प्रक्रिया शामिल है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, सभी पांच गांवों में सर्वेक्षण का कार्य पूरा किया जा चुका है।
कुछ क्षेत्रों में भू-सत्यापन लगभग पूरा
हरिद्वार जिले के हंसावाला गांव में भू-सत्यापन का कार्य पूर्ण हो चुका है। वहीं पौड़ी जिले के थली और निसनी गांवों में लगभग 95 प्रतिशत सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। टिहरी जिले के दोनों गांवों में यह कार्य अभी जारी है और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
चार केंद्रों पर तैयार हो रहे डिजिटल अभिलेख
भूमि से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का कार्य अल्मोड़ा, किच्छा, भगवानपुर और नरेंद्र नगर स्थित केंद्रों पर किया जा रहा है। राजस्व विभाग ने इस प्रक्रिया को गति देते हुए अगले महीने तक निर्धारित कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद भूमि से जुड़े दस्तावेजों की उपलब्धता और सत्यापन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान होने की उम्मीद है।
भविष्य में पूरे राज्य तक विस्तार की तैयारी
राजस्व परिषद की सचिव रंजना राजगुरु ने बताया कि चयनित गांवों में डिजिटल भूमि रिकॉर्ड तैयार करने का काम काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि पायलट परियोजना से प्राप्त अनुभव के आधार पर भविष्य में राज्य के अन्य गांवों में भी इसी मॉडल को लागू किया जाएगा। इससे भूमि प्रबंधन, रिकॉर्ड संरक्षण और नागरिक सेवाओं में सुधार की संभावना बढ़ेगी।