Delhi Air Pollution: क्या जहरीली हवा लील जाएगी दिल्ली की रौनक, दमघोंटू प्रदूषण ने तोड़ी व्यापारियों की कमर…
Delhi Air Pollution: देश की राजधानी दिल्ली इस वक्त केवल धुंध की चादर में नहीं लिपटी है, बल्कि यह करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य और रोजगार के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है। प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोगों को सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी (Health Hazards) का सामना करना पड़ रहा है, जो धीरे-धीरे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का कारण बन रहा है। लेकिन इस संकट का एक दूसरा पहलू भी है, जिसने दिल्ली के आर्थिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है। शहर के थोक बाजारों से लेकर गलियों तक में होने वाला व्यापार अब इस जहरीली हवा की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है।

थोक बाजारों से गायब हुए खरीदार
दिल्ली हमेशा से उत्तर भारत के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में जानी जाती रही है, लेकिन वर्तमान स्थिति ने इस पहचान पर ग्रहण लगा दिया है। व्यापारी संगठनों के अनुसार, दिल्ली में गंभीर वायु गुणवत्ता के कारण (Wholesale Trade) में भारी गिरावट दर्ज की गई है। एक समय था जब हर दिन तीन से चार लाख बाहरी व्यापारी राजधानी में खरीदारी के लिए आते थे, लेकिन अब वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं। इस पलायन ने स्थानीय व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है।
सरकारी उपायों की विफलता और बढ़ता संकट
सरकार द्वारा प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए कई तरह के कड़े कदम उठाए गए हैं, जिनमें निर्माण कार्यों पर रोक और सड़कों पर पानी का छिड़काव शामिल है। हालांकि, इन तमाम (Pollution Control Measures) के बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। स्कूलों को ऑनलाइन करना और वर्क फ्रॉम होम लागू करना केवल अस्थायी समाधान साबित हो रहे हैं। राजधानी में बीएस-6 के अलावा अन्य वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी भी इस बढ़ते स्मॉग को रोकने में नाकाम रही है, जिससे जनता और व्यापारियों में हताशा बढ़ती जा रही है।
रिटेल मार्केट पर भी पड़ा प्रदूषण का साया
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि केवल थोक ही नहीं, बल्कि रिटेल व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोग अपने घरों से निकलने में (Public Safety) को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय बाजारों में ग्राहकों की संख्या न के बराबर रह गई है। आमतौर पर इस सीजन में बाजार लोगों से खचाखच भरे रहते थे, लेकिन अब स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। दुकानदार पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते हैं, पर सड़कों पर केवल सन्नाटा और धुंध दिखाई देती है।
त्योहारों और नए साल की खुशियों पर ग्रहण
क्रिसमस और नए साल का समय नजदीक है, जो दिल्ली के व्यापारियों के लिए सबसे अधिक कमाई वाला सीजन माना जाता है। लेकिन इस बार (Consumer Behavior) पूरी तरह बदल गया है और लोग उत्सव की खरीदारी से परहेज कर रहे हैं। अगर प्रदूषण का स्तर इसी तरह बना रहा, तो नए साल के जश्न की तैयारियों में भी भारी कमी आ सकती है। इससे न केवल दुकानदारों को नुकसान होगा, बल्कि दिल्ली की जीवंत संस्कृति और उत्सवों की चमक भी फीकी पड़ जाएगी।
व्यापारियों का सरकार को सहयोग का प्रस्ताव
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने इस विकट परिस्थिति पर दुख जताते हुए कहा है कि प्रदूषण एक ऐसी लड़ाई है जिसे सरकार अकेले नहीं जीत सकती। उन्होंने सुझाव दिया कि (Market Regulations) में बदलाव कर व्यापारी अपना योगदान दे सकते हैं, जैसे कि बाजारों के खुलने और बंद होने के समय में परिवर्तन करना। व्यापारियों का मानना है कि यदि सरकार नागरिकों और व्यावसायिक संगठनों को विश्वास में लेकर ठोस रणनीति बनाए, तभी इस समस्या का कोई निर्णायक समाधान निकल सकता है।
पर्यटन और होटल इंडस्ट्री पर मंडराते काले बादल
हर साल लाखों पर्यटक नया साल मनाने और ऐतिहासिक स्थलों का दीदार करने दिल्ली आते हैं, जिससे यहां के होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को नई ऊर्जा मिलती है। लेकिन वर्तमान (Environmental Crisis) ने पर्यटकों के मन में डर पैदा कर दिया है। लोग अब दिल्ली आने के बजाय पहाड़ी इलाकों या साफ हवा वाले शहरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। यदि पर्यटकों का यह रुझान जारी रहा, तो दिल्ली के पर्यटन उद्योग को होने वाले नुकसान की भरपाई करना आने वाले कई सालों तक मुमकिन नहीं होगा।
एक निर्णायक लड़ाई की जरूरत
अंततः, दिल्ली को इस स्थिति से निकालने के लिए केवल कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि धरातल पर कड़े एक्शन की आवश्यकता है। प्रदूषण के कारण (Economic Impact) इतना गहरा हो चुका है कि इसे नजरअंदाज करना आत्मघाती साबित होगा। व्यापारियों से लेकर आम नागरिक तक, हर कोई एक साफ और सुरक्षित वातावरण की उम्मीद कर रहा है। सरकार को अब ऐसे कदम उठाने होंगे जो न केवल हवा को शुद्ध करें, बल्कि दिल्ली के उजड़ते व्यापार को भी फिर से संजीवनी प्रदान कर सकें।



