Investment – उत्तराखंड में 4800 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मिली मंजूरी
Investment – उत्तराखंड में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़े निवेश प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। सिंगल विंडो प्रणाली के तहत करीब 4800 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार इन परियोजनाओं के शुरू होने से राज्य में 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

इन निवेश प्रस्तावों को राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में अनुमोदित किया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में की, जहां उद्योग और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों पर चर्चा हुई।
कई बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को मिली स्वीकृति
बैठक में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े निवेश प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। ऊधमसिंह नगर जिले में ऑटोमोबाइल क्षेत्र से संबंधित एक महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति दी गई है। यजाकी इंडिया यहां ऑटोमोबाइल वायरिंग पार्ट्स निर्माण इकाई स्थापित करेगी, जिसके लिए लगभग 650 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
पौड़ी और हरिद्वार में भी बड़े निवेश
औद्योगिक परियोजनाओं के साथ-साथ पर्यटन और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में भी निवेश को मंजूरी दी गई है। पौड़ी जिले में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से एक रिजॉर्ट विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटन क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वहीं हरिद्वार में पतंजलि फूड लिमिटेड की ओर से लगभग 1400 करोड़ रुपये की लागत से फूड पार्क स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में फलों पर आधारित विभिन्न खाद्य उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा, जिससे कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को भी लाभ मिलने की संभावना है।
ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भी बढ़ावा
ऊधमसिंह नगर में एक अन्य प्रमुख निवेश प्रस्ताव के तहत ल्यूमिनस पावर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण से संबंधित परियोजना में लगभग 350 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। इस परियोजना के माध्यम से क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों का विस्तार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विविध क्षेत्रों में निवेश आने से राज्य की औद्योगिक संरचना मजबूत होगी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
लंबित मामलों पर मुख्य सचिव की नाराजगी
बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने जिला स्तर पर भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े मामलों के निस्तारण में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से कहा कि सिंगल विंडो प्रणाली के अंतर्गत आने वाले मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि निवेशकों को अनावश्यक विलंब का सामना न करना पड़े।
समयसीमा के भीतर मंजूरियां देने के निर्देश
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सिंगल विंडो प्रणाली के तहत विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियों और क्लीयरेंस के लिए 15 और 30 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है। ऐसे में संबंधित विभागों को तय अवधि के भीतर आवश्यक मंजूरियां प्रदान करनी चाहिए।
उन्होंने उद्योग विभाग को निर्देश दिए कि जहां स्वीकृति प्रक्रियाओं में देरी हो रही है, वहां संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण लिया जाए। राजस्व, पेयजल और आवास विभागों से जुड़े मामलों की भी समीक्षा करने को कहा गया।
निवेश अनुकूल माहौल बनाने पर जोर
बैठक में राज्य में कारोबार को आसान बनाने और निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रथम और द्वितीय चरण के सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि निवेश परियोजनाएं समय पर धरातल पर उतर सकें।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और निवेश से जुड़े प्रस्तावों की प्रगति पर चर्चा की गई। सरकार को उम्मीद है कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से राज्य के आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।