उत्तराखण्ड

MiningSafety – झारखंड हाईकोर्ट ने खदान मजदूरों की सुरक्षा पर दिखाई सख्ती

MiningSafety – झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की कोयला खदानों में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य के चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज को अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत का संकेत साफ है कि मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बढ़ी निगरानी

यह मामला ऐसे समय में उठा है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही खदान मजदूरों की सुरक्षा और उनके जीवन के अधिकार को लेकर सख्त रुख अपना चुका है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि खदानों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसी क्रम में देश के सभी हाईकोर्ट को इस विषय पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए थे। झारखंड हाईकोर्ट की यह कार्रवाई उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जहां राज्य स्तर पर हालात की समीक्षा की जा रही है।

सरकारी रिपोर्ट पर अदालत की नाराजगी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोयला खदानों और संबंधित उद्योगों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर एक रिपोर्ट पेश की गई। हालांकि, अदालत ने इस रिपोर्ट को संतोषजनक नहीं माना। खंडपीठ का कहना था कि दस्तावेजों में जो स्थिति दिखाई गई है, वह जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती। अदालत ने संकेत दिया कि मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं में अभी भी कई कमियां बनी हुई हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।

सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल

अदालत ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले मजदूरों के लिए कौन-कौन से ठोस उपाय किए गए हैं। विशेष रूप से यह पूछा गया कि दुर्घटनाओं से बचाव, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को कितना प्रभावी बनाया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल कागजी योजनाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर इनका सही क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए।

ठेका मजदूरों और अवैध खनन पर भी चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत ने ठेका मजदूरों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि ऐसे श्रमिकों के नियमितीकरण, न्यूनतम मजदूरी और कल्याणकारी योजनाओं के लाभ को लेकर अब तक क्या प्रगति हुई है। इसके साथ ही अवैध खनन पर रोक लगाने को लेकर भी सख्त टिप्पणी की गई। अदालत ने साफ कहा कि बिना अनुमति के हो रहे खनन कार्य न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करते हैं।

अगली सुनवाई में मांगी विस्तृत जानकारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने चीफ इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्रीज को अगली सुनवाई में उपस्थित होकर विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है। उनसे यह अपेक्षा की गई है कि वे अब तक उठाए गए ठोस कदमों और आगे की कार्ययोजना को स्पष्ट रूप से अदालत के सामने रखें। कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो आगे और कड़े निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

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