अंतर्राष्ट्रीय

MiddleEastCrisis – ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच तनाव ने पकड़ी नई रफ्तार

MiddleEastCrisis – मध्य पूर्व में जारी तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है, जहां ईरान, अमेरिका और इस्राइल के बीच हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। कूटनीतिक बयानबाजी से लेकर समुद्री घटनाओं और सैन्य गतिविधियों तक, कई मोर्चों पर तेजी से घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। हालिया घटनाएं इस ओर इशारा करती हैं कि क्षेत्र में स्थिरता की कोशिशें अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।

ईरानी विदेश मंत्री का बयान और अमेरिका-इस्राइल पर आरोप

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दक्षिण कोरिया के विशेष दूत चांग ब्योंग-हा से मुलाकात के दौरान क्षेत्रीय हालात पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ती अस्थिरता के लिए अमेरिका और इस्राइल को जिम्मेदार ठहराया। अराघची के अनुसार, इन देशों की नीतियां ही मौजूदा सुरक्षा संकट की प्रमुख वजह हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि इन गतिविधियों की आलोचना की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में उठाता रहा है और किसी भी संभावित परिणाम की जिम्मेदारी उन देशों पर होगी जो आक्रामक रुख अपनाते हैं।

युद्धविराम के बीच समुद्री घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित अवधि तक बढ़ाने की घोषणा के बीच, समुद्र में हुई घटनाओं ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और जहाज को निशाना बनाया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘यूफोरिया’ नाम का यह जहाज ईरानी तट के पास प्रभावित हुआ। इससे पहले भी दो जहाजों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इन घटनाओं ने युद्धविराम के भविष्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

बातचीत पर शर्तें और कूटनीतिक गतिरोध

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने संकेत दिया है कि उनका देश संवाद के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें अनिवार्य हैं। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में लागू अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध हटाए बिना किसी भी बातचीत की शुरुआत संभव नहीं होगी। राष्ट्रपति ने अमेरिका की नीतियों और पुराने समझौतों के उल्लंघन पर भी नाराजगी जताई। इस बयान से साफ है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अब भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

लेबनान में हमले में पत्रकार की मौत

इस बीच, दक्षिणी लेबनान में हुए एक हवाई हमले में पत्रकार अमल खलील की मौत की खबर सामने आई है। वह इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष को कवर कर रही थीं। स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, वह एक घर में शरण लिए हुए थीं, जिसे बाद में निशाना बनाया गया। बचावकर्मियों को उनका शव कई घंटों बाद मलबे से निकालना पड़ा। इस घटना ने संघर्ष क्षेत्रों में काम कर रहे पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इस्राइली सेना ने नागरिकों या पत्रकारों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार करते हुए जांच की बात कही है।

इंटरनेट केबल को लेकर चेतावनी से बढ़ी चिंता

क्षेत्रीय तनाव के बीच एक और अहम जानकारी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे बिछी समुद्री इंटरनेट केबलों का नक्शा सार्वजनिक किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वैश्विक इंटरनेट ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक संचार और डिजिटल सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

जासूसी के आरोप में फांसी पर उठे सवाल

ईरान ने हाल ही में एक व्यक्ति को फांसी दी, जिसे इस्राइल की खुफिया एजेंसी से जुड़ा होने का दोषी ठहराया गया था। न्यायपालिका से जुड़ी एजेंसी के अनुसार, आरोपी पर संवेदनशील सूचनाएं साझा करने का आरोप था। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इस तरह की सजा को लेकर पहले भी चिंता जताई है और निष्पक्ष सुनवाई की मांग उठाई है।

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