राष्ट्रीय

ElectionUpdate – मुर्शिदाबाद के नाओदा में मतदान के बीच बढ़ा तनाव, आरोपों से गरमाई सियासत

ElectionUpdate – पश्चिम बंगाल में पहले चरण के तहत 152 विधानसभा सीटों पर जारी मतदान के दौरान मुर्शिदाबाद जिले का नाओदा इलाका एक बार फिर राजनीतिक तनाव का केंद्र बन गया। मतदान के बीच शिवनगर गांव से सामने आई झड़प की घटना ने स्थानीय माहौल को अचानक तनावपूर्ण बना दिया। इस घटना में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के प्रमुख हुमायूं कबीर के बीच तीखी नोकझोंक की खबर सामने आई है, जिससे चुनावी माहौल और ज्यादा गर्म हो गया।

स्थिति तब बिगड़ती दिखी जब दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। हुमायूं कबीर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव से हटाने के लिए पैसे का इस्तेमाल किया गया है, जिससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मतदान केंद्र पर नारेबाजी से बढ़ा विवाद

शिवनगर गांव में जब हुमायूं कबीर एक मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो वहां मौजूद कुछ टीएमसी समर्थकों ने उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि उन्हें “वापस जाओ” जैसे नारे सुनने पड़े और कुछ लोगों ने उन्हें भाजपा से जुड़ा हुआ भी बताया। इस घटनाक्रम ने मौके पर मौजूद लोगों के बीच असहज स्थिति पैदा कर दी। हालांकि, केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण हालात को जल्द ही काबू में कर लिया गया।

इस घटना ने यह संकेत दिया कि नाओदा क्षेत्र में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा सिर्फ चुनावी मैदान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी टकराव की स्थिति बनती जा रही है।

उम्मीदवारों को पैसे देने के आरोप

हुमायूं कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी के कई उम्मीदवारों को चुनाव से हटने के लिए आर्थिक प्रलोभन दिया गया। उनके अनुसार, शुरुआत में एजेयूपी के 142 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 115 रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उम्मीदवारों को 9 लाख से लेकर 30 लाख रुपये तक की रकम देकर चुनाव से बाहर किया गया।

इन आरोपों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, टीएमसी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला अभी भी एकतरफा आरोपों के दायरे में ही बना हुआ है।

पूर्व विधायक का राजनीतिक सफर और नई पार्टी

हुमायूं कबीर पहले मुर्शिदाबाद की भरतपुर सीट से विधायक रह चुके हैं और कभी टीएमसी का हिस्सा थे। उन्हें पिछले साल दिसंबर में पार्टी से निलंबित कर दिया गया था। उस समय उन्होंने दावा किया था कि उनके एक विवादित बयान के बाद पार्टी ने यह कार्रवाई की। इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाकर चुनावी राजनीति में फिर से सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला किया।

उनकी वापसी और मौजूदा चुनाव में सक्रिय भागीदारी ने नाओदा समेत आसपास के इलाकों में राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दिया है।

मारपीट के आरोप और सुरक्षा व्यवस्था

एजेयूपी कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनके एक बूथ स्तर के अध्यक्ष के साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मारपीट की। इस आरोप के बाद इलाके में तनाव और बढ़ गया। हालांकि, मौके पर मौजूद केंद्रीय बलों ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और मतदान प्रक्रिया को जारी रखा।

इस तरह की घटनाएं चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर भी सवाल खड़े करती हैं, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।

धार्मिक राजनीति पर भी उठे सवाल

हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर धार्मिक आधार पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि राज्य में अलग-अलग समुदायों को साधने के लिए धार्मिक गतिविधियों और संस्थानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, इन आरोपों पर सत्ताधारी दल की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। चुनावी माहौल में इस तरह के बयान अक्सर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा भी माने जाते हैं।

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