AppleCEO – टिम कुक के इस्तीफे की घोषणा, जॉन टर्नस संभालेंगे कमान
AppleCEO – टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी एपल में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टिम कुक ने अपने पद से हटने का फैसला लिया है। लगभग 15 वर्षों तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद वह एक सितंबर से सीईओ की जिम्मेदारी छोड़ देंगे। उनके स्थान पर वर्तमान में हार्डवेयर इंजीनियरिंग प्रमुख के तौर पर कार्यरत जॉन टर्नस को नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस बदलाव को एपल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।

लंबे कार्यकाल के बाद नेतृत्व परिवर्तन
टिम कुक ने स्टीव जॉब्स के बाद एपल की कमान संभाली थी और उनके नेतृत्व में कंपनी ने अभूतपूर्व आर्थिक सफलता हासिल की। उनके कार्यकाल के दौरान एपल का बाजार मूल्य बढ़कर 3.6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया। आईफोन और अन्य प्रमुख उत्पादों के विस्तार के साथ कंपनी ने वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। कुक को भले ही तकनीकी नवाचार के मामले में जॉब्स जैसा नहीं माना गया, लेकिन उन्होंने कंपनी की स्थिरता और व्यावसायिक विस्तार पर विशेष ध्यान दिया।
नई भूमिका में बने रहेंगे टिम कुक
सीईओ पद छोड़ने के बाद भी टिम कुक कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं होंगे। उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष की भूमिका में रखा जाएगा, जहां वे रणनीतिक फैसलों और मार्गदर्शन में योगदान देते रहेंगे। यह मॉडल पहले भी कई बड़ी टेक कंपनियों में देखा गया है, जहां पूर्व सीईओ सीमित भूमिका में संगठन से जुड़े रहते हैं। इससे कंपनी को अनुभव और निरंतरता दोनों का लाभ मिलता है।
जॉन टर्नस के सामने नई चुनौतियां
जॉन टर्नस के लिए यह जिम्मेदारी एक बड़े अवसर के साथ-साथ चुनौती भी होगी। उन्हें एक ऐसी कंपनी की कमान संभालनी होगी, जो पहले से ही वैश्विक बाजार में अग्रणी स्थिति में है। नई तकनीकों, प्रतिस्पर्धा और बदलते उपभोक्ता रुझानों के बीच कंपनी को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि नेतृत्व परिवर्तन के बाद कंपनी की रणनीतियों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
भारत में बढ़ी नियामकीय जांच
इसी बीच भारत में एपल को एक अन्य मोर्चे पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने एपल के खिलाफ एंटीट्रस्ट मामले में जांच को तेज कर दिया है और अंतिम सुनवाई की तारीख 21 मई तय की है। यह मामला ऐप मार्केट में कंपनी की प्रमुख स्थिति के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि एपल ने डेवलपर्स को अपने इन-एप पेमेंट सिस्टम का उपयोग करने के लिए बाध्य किया, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई।
संभावित जुर्माना और कानूनी प्रक्रिया
यदि जांच में आरोप साबित होते हैं, तो एपल पर करीब 38 अरब डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 3.56 लाख करोड़ रुपये के बराबर होगा। आयोग का कहना है कि कंपनी से कई बार वित्तीय जानकारी मांगी गई, लेकिन वह समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। इस बीच एपल ने इस कानून को अदालत में चुनौती भी दी है, जिससे मामला और जटिल हो गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद वर्ष 2021 में शुरू हुआ था, जब कुछ अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कंपनियों ने एपल की नीतियों पर सवाल उठाए थे। जांच के बाद सामने आया कि कंपनी की नीतियां प्रतिस्पर्धा को सीमित कर सकती हैं। अब अंतिम सुनवाई की तारीख तय होने के बाद यह मामला निर्णायक चरण में पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर पूरे डिजिटल बाजार पर पड़ सकता है।