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VoterListUpdate – पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव

VoterListUpdate – पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में हुए व्यापक संशोधन ने राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद लगभग 90 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिससे राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर करीब 6.77 करोड़ रह गई है। यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके असर चुनावी रणनीतियों और नतीजों पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकते हैं।

प्रभावित जिलों में बदला राजनीतिक संतुलन

इस संशोधन का सबसे अधिक असर उन जिलों में देखने को मिला है, जहां अब तक तृणमूल कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मुर्शिदाबाद, नदिया, मालदा, हुगली, हावड़ा, उत्तर दिनाजपुर और पूर्व बर्दवान जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटे हैं। इन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक और महिला मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में मतदाता संख्या में आई गिरावट ने तृणमूल कांग्रेस के लिए रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

भाजपा के लिए भी स्थिति पूरी तरह सहज नहीं

दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी को भी इस बदलाव से पूरी तरह राहत नहीं मिली है। खासकर मातुआ समुदाय से जुड़े इलाकों में मतदाता सूची से नाम हटने की घटनाएं सामने आई हैं। करीब 55 सीटों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिनमें नदिया जिला प्रमुख है। यहां बड़ी संख्या में मतदाता सूची से बाहर हो गए हैं, जिससे पार्टी की संभावित बढ़त प्रभावित हो सकती है। हालांकि, उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्रों में भाजपा को अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति की उम्मीद है।

मातुआ समुदाय को लेकर भरोसा दिलाने की कोशिश

इस स्थिति को देखते हुए बोंगांव से सांसद और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने सार्वजनिक रूप से भरोसा जताया है कि किसी भी हिंदू शरणार्थी को देश छोड़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम सूची से हटे हैं, उन्हें दोबारा जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए पार्टी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है, जो फॉर्म भरने और ऑनलाइन आवेदन में लोगों की मदद कर रहे हैं।

महिला मतदाताओं में गिरावट से बढ़ी चिंता

मतदाता सूची में संशोधन के बाद महिला मतदाताओं का अनुपात भी थोड़ा कम हुआ है। पहले जहां प्रति हजार पुरुषों पर 959 महिलाएं दर्ज थीं, वहीं अब यह संख्या घटकर 950 रह गई है। यह बदलाव तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंता का कारण बन सकता है, क्योंकि महिला मतदाता लंबे समय से पार्टी के समर्थन का महत्वपूर्ण आधार रही हैं।

अल्पसंख्यक इलाकों में बढ़ी संवेदनशीलता

अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में इस पूरी प्रक्रिया को लेकर असहजता देखी जा रही है। कुछ इलाकों में मतदाता सूची से नाम हटने के कारण असुरक्षा की भावना बढ़ी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट कर सकती है, जिससे चुनावी रुझानों पर असर पड़ सकता है।

करीबी मुकाबलों वाली सीटों पर बढ़ी अनिश्चितता

सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर पड़ने की संभावना है, जहां पिछली बार जीत का अंतर बहुत कम था। 120 से अधिक ऐसी सीटें हैं, जहां हटाए गए मतदाताओं की संख्या पिछले चुनाव के जीत के अंतर से ज्यादा बताई जा रही है। ऐसे में इन सीटों पर परिणाम पूरी तरह बदल सकते हैं और मुकाबला और अधिक कड़ा हो सकता है।

दो चरणों में चुनाव, आंकड़ों में बड़ा अंतर

राज्य में दो चरणों में मतदान होना है। पहले चरण में 23 अप्रैल को होने वाले चुनाव में 152 सीटों पर मतदान होगा, जहां करीब 39 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। दूसरे चरण में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोटिंग होगी, जहां लगभग 49 लाख नाम हटे हैं। कुल मिलाकर यह स्पष्ट है कि इस बार चुनाव केवल मतदान प्रतिशत पर नहीं, बल्कि मतदाता सूची में हुए बदलावों पर भी काफी हद तक निर्भर करेगा।

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