GasCrisis – लखनऊ में व्यावसायिक गैस संकट से होटल और ढाबे प्रभावित
GasCrisis – लखनऊ में व्यावसायिक गैस की कमी ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे खाद्य कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शहर के बड़ी संख्या में कारोबारियों के पास वैध व्यावसायिक गैस कनेक्शन नहीं होने के कारण उन्हें सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अब नए कनेक्शन भी आसानी से जारी नहीं हो रहे, जिससे दुकानदार वैकल्पिक साधनों पर निर्भर होने को मजबूर हैं।

आंकड़े बता रहे हैं समस्या की गंभीरता
राजधानी में हजारों की संख्या में होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानें संचालित हो रही हैं, जहां नियमित रूप से व्यावसायिक एलपीजी की जरूरत होती है। अनुमान के मुताबिक शहर में 1000 से अधिक होटल और करीब 5000 खाद्य प्रतिष्ठान हैं, लेकिन वैध व्यावसायिक कनेक्शनों की संख्या केवल लगभग 3500 के आसपास है। मौजूदा समय में गैस की आपूर्ति सामान्य दिनों के मुकाबले काफी घटकर रह गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है।
आपूर्ति में कमी से बढ़ी परेशानी
तेल कंपनियों ने फिलहाल अस्पताल, रेलवे और रक्षा जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी है। इसके चलते सामान्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों को गैस की आपूर्ति सीमित हो गई है। कई दुकानदारों का कहना है कि अब जुगाड़ से भी सिलिंडर मिलना मुश्किल हो गया है। इसका असर करीब 50 हजार से अधिक रेहड़ी-पटरी दुकानदारों पर भी पड़ा है, जिनका कामकाज गैस की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
दुकानदारों के अनुभव में झलक रही मजबूरी
शहर के अलग-अलग इलाकों से सामने आ रहे उदाहरण इस संकट की तस्वीर साफ करते हैं। राणा प्रताप मार्ग पर एक दुकानदार ने बताया कि उसके पास व्यावसायिक कनेक्शन नहीं है, इसलिए घरेलू गैस और पारंपरिक भट्ठी के सहारे काम चलाना पड़ रहा है। अमीनाबाद के एक ढाबा संचालक ने भी बताया कि पहले किसी तरह काम चल जाता था, लेकिन अब गैस की कमी के चलते उन्हें भी भट्ठी का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं निशातगंज और डालीबाग क्षेत्रों के दुकानदारों ने बताया कि गैस न मिलने पर उन्हें हीटर और इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं।
वैकल्पिक सिलिंडर विकल्प की जानकारी
छोटे कारोबारियों की जरूरत को देखते हुए इंडियन ऑयल ने 5 किलो का छोटा सिलिंडर उपलब्ध कराया है। इसके जरिए सीमित स्तर पर राहत देने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह कनेक्शन निर्धारित शुल्क पर आसानी से लिया जा सकता है और कम लागत में रिफिल भी कराया जा सकता है। हालांकि, बड़े स्तर पर काम करने वाले व्यापारियों के लिए यह विकल्प पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
व्यापारियों ने जताई चिंता
व्यापार से जुड़े संगठनों का कहना है कि मौजूदा आपूर्ति वास्तविक जरूरत के मुकाबले काफी कम है। उनका दावा है कि व्यावसायिक गैस की उपलब्धता 30 प्रतिशत के आसपास ही रह गई है। नई व्यवस्था के तहत घरेलू गैस की आपूर्ति को प्राथमिकता मिलने से छोटे कारोबारियों के सामने आने वाले समय में और चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
स्थिति पर बनी हुई नजर
फिलहाल प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि जल्द ही आपूर्ति में सुधार होगा और उन्हें राहत मिलेगी। लेकिन जब तक हालात सामान्य नहीं होते, तब तक शहर के खाद्य व्यवसाय पर इसका असर जारी रहने की संभावना है।



