बिहार

BiharPolitics – प्रशांत किशोर का दावा, दिल्ली तय करेगी बिहार का अगला मुख्यमंत्री

BiharPolitics – बिहार की राजनीति को लेकर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। भागलपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री का चेहरा अब स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि केंद्र की राजनीतिक नेतृत्व द्वारा तय किया जाएगा। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका निर्णायक होगी।

केंद्र के प्रभाव पर उठाए सवाल
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार की राजनीति में फैसले लेने का अधिकार धीरे-धीरे राज्य से बाहर चला गया है। उनका कहना था कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री कौन होगा, यह पटना नहीं बल्कि दिल्ली में तय होगा। इस बयान के जरिए उन्होंने राज्य की स्वायत्तता पर सवाल उठाए और संकेत दिया कि राजनीतिक नियंत्रण अब केंद्र के हाथ में सिमटता जा रहा है।

नीतीश कुमार को लेकर कही बड़ी बात
किशोर ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्हें धीरे-धीरे सक्रिय भूमिका से दूर किया जा रहा है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया अचानक नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से हो रही है। हालांकि इस पर सरकार या संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

युवाओं और रोजगार के मुद्दे उठाए
अपने बयान के दौरान प्रशांत किशोर ने रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सवाल किया कि राज्य के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार देने के वादों का क्या हुआ। उनके मुताबिक, राजनीतिक समीकरणों में उलझने के बजाय सरकार को युवाओं और विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

नीतीश कुमार के हालिया कदमों की चर्चा
यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार ने हाल ही में विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया है और राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हैं। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भी दाखिल किया है और नई सरकार के प्रति समर्थन जताया है। साथ ही, उन्हें जनता दल (यू) का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी चुना गया है।

लंबा राजनीतिक सफर और बदलते गठबंधन
नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन कई उतार-चढ़ाव और गठबंधन बदलावों से भरा रहा है। 1985 में विधायक बनने से लेकर केंद्र सरकार में मंत्री और फिर कई बार मुख्यमंत्री बनने तक उनका सफर काफी लंबा रहा है। खास तौर पर पिछले एक दशक में उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों के साथ काम किया है, जिससे उनकी राजनीति की शैली पर लगातार चर्चा होती रही है।

बढ़ती राजनीतिक हलचल के बीच नजरें भविष्य पर
प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। आने वाले समय में राज्य की सत्ता और नेतृत्व को लेकर क्या निर्णय होते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल यह स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में बदलाव की आहट तेज होती जा रही है।

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