Wednesday , April 24 2019
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लेख

सिन्धु जल संधि पर पाकिस्तान हमें छलता रहेगा

डॉ. भरत झुनझुनवाला पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने अधिकारियों को कहा है कि भारत एवं विश्व बैंक के साथ सिन्धु जलसन्धि के मुद्दे को जोर शोर से उठाएं। अर्थ हुआ कि इमरान खान पाकिस्तान की पूर्व में ही लागू पॉलिसी को और जोर शोर से लागू करना ...

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इमरान के साथ कितना बदल पाएगा पाकिस्तान!

राजेश माहेश्वरी क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले चुके हैं। मीडिया के मार्फत आ रही खबरों के अनुसार पाकिस्तान भारत से मधुर व बेहतर रिशते चाहता है। लेकिन आजादी के बाद अब तक जिस तरह पाकिस्तान ने शरारती पड़ोसी की भूमिका निभाई ...

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अगस्त माह में तीन महारथी विदा

एल.एस. हरदेनिया वर्ष 2018 का अगस्त माह देश के लिए त्रासद माह के रूप में याद किया जाएगा। अगस्त में हमने अपने देश के तीन महारथियों को खोया है। ये तीन हैं- अटलबिहारी वाजपेयी, सोमनाथ चटर्जी और एम करूणानिधि। भौगोलिक दृष्टि से ये तीनों अलग-अलग क्षेत्रों के थे। वाजपेयी उत्तर ...

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राजनीति नाम परिवर्तन की….

अपनी नैनीताल यात्रा के दौरान एक बार हल्द्वानी से पहले एक स्थान पर रुकने का मौ$का मिला। उस जगह का नाम था गोरा पड़ाव। गोरा पड़ाव नाम के विषय में कुछ स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार जब अंग्रज़ों ने काठगोदाम-नैनीताल मार्ग पर सड़क निर्माण का काम शुरु किया ...

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अटल बिहारी वाजपेयी की जीवन यात्रा

डा.राधेश्याम द्विवेदी भारतीय राजनीति के अजातशत्रु,प्रखर वक्ता , कवि हृदय राजनीतिज्ञ एवं भारत रत्न पण्डित अटल बिहारी वाजपेयी की पूरी जीवन यात्रा के मूल्यांकन के लिए कुछ आधार बनाना ही होगा। वे भारतीय राजनीति के शलाका पुरुष माने जाते है । राजनीति में इतना लंबा दौर गुजारने के बावजूद वैचारिक ...

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क्या चार राज्यों में एक साथ होंगे लोकसभा चुनाव

उपेन्द्र प्रसाद भारत के निर्वाचन आयोग ने कहा है कि वह राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ इस साल के दिसंबर में लोकसभा चुनाव करवाने को तैयार है। यह कुछ अटपटा लगता है, क्योंकि अभी तक सरकार ने आयोग से आधिकारिक तौर पर लोकसभा चुनाव समय से पहले करवाने ...

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और हम कितना गिरेंगे

डा. राधेश्याम द्विवेदी भारतीय संस्कृति में नारी को कितना महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है जितना अन्य किसी देश की संस्कृति में नहीं । इसके विपरीत भारतीय इतिहास के मध्यकाल तथा आधुनिक काल में नारी की वह पवित्र स्थिति देखने को नहीं मिलती है। राजपूतकाल में युद्ध का कारण भी नारी ...

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ज्ञान के दरवाजे खुले रहें

अनुज लुगुन पाब्लो नेरुदा की कविता है- ‘अगर पीला रंग खत्म हो जाये ध् तो हम किससे बनायेंगे रोटी?’ यह कविता बाल सुलभ मासूमियत से लिखी गयी है. अपने जीवन के अंतिम समय में लिखी गयी नेरुदा की इस तरह की कविताएं न तो काव्यशास्त्रीय मानकों को स्थापित करने के ...

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गड़करी जी का सत्य वचन, नौकरी है कहाॅ

प्रेम शर्मा निश्चित तौर पर यह बाॅत सौ फीसदी सत्य है कि अब नौकरी जनसंख्या के अनुपात में ऊट के मुंह में जीरा की तरह है। इसी लिए नौकरी की मारामारी मची है। यह स्थिति मोदी सरकार के कार्यकाल की देन नही बल्कि पिछले तीस सालों से नौकरी की मारामारी ...

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हां! यह अघोषित इमरजेंसी है

राजेंद्र शर्मा हिंदी के एक प्रमुख खबरिया चैनल, एबीपी न्यूज में जो कुछ हुआ है, उसे तख्तापलट कहा जा सकता है या नहीं इस पर तो बहस हो सकती है। लेकिन, इतना तय है कि जो हुआ है और जिस तरह से हुआ है, न सिर्फ असाधारण है बल्कि डराने ...

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