Monday , May 27 2019
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लेख

वैश्विक नेता के रुप में मोदी जी उभरे

डा. राधेश्याम द्विवेदी आज के राजनैतिक हालात में मोदी अजेय है, अपराजेय हैं ! मोदी को हराना है तो मोदी बनना पड़ेगा, मोदी की तरह सोचना पड़ेगा और मोदी की तरह ही चालें चलनी पड़ेंगी। मोदी को हराने के ख्वाब देखने वालों को अपनी लकीर मोदी की खींची गई लकीर ...

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लाल त्रिलोकीनाथ सिंह ‘भुवनेश’

डा. राधेश्याम द्विवेदी ‘नवीन’ डा. मुनिलाल उपाध्याय सरस जी कृत “बस्ती के छन्दकार”दो खण्डों में प्रकाशित हुआ है। इसके प्रकाशित अंशों के आधार पर बस्ती के साहित्याकाश में अनेक नक्षत्र दिखलाई पड़ते हैं। डा. मुनिलाल उपाध्याय सरसजी लगभग 250 वर्षों का साहित्यिक इतिहास अपने 5 प्रमुख अध्यायों में समेटने का ...

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राम जन्मभूमि मन्दिर पर कपटपूर्ण ढ़ंग से मस्ज्दि का निर्माण

डा. राधेश्याम द्विवेदी वैदिक नगर वास्तु-परम्परा कालिदास के रघुवंश में चतुर्मुखी तोरण-धारिणी ब्रह्मा के रूप में प्राप्त है। ब्रिटिश और मुसलमानी अभिलेखों में भी इस स्थान को ‘रामजन्मभूमि’ या ‘जन्मभूमि’ या जन्मस्थान के रूप में उल्लेख है। इस स्थान के विवादित ढाँचे की रचना पूर्वकालिक विष्णु-हरि मन्दिर के ध्वंसावशेष का ...

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राजा शीतला बक्श सिंह ‘महेश’

डा. राधेश्याम द्विवेदी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :- अवध के नबाब सआदत खां के समय सितम्बर 1722 ई. में बस्ती राज्य का राजा जयसिंह बने। वह बहुत दिनों तक जीवित रहे। उसके बाद उनका पौत्र पृथ्वीपाल उत्तराधिकारी बने। उनके पुत्र राजा जयपाल सिंह बस्ती के राजा बने। इस समय यह राज्य अंग्रजों ...

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महसों रियासत का इतिहास

डा. राधेश्याम द्विवेदी पूर्वज एवं एतिहासिकता.:- महसों भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के बस्ती जिले में कुवानों नदी के तटपर स्थित एक एतिहासिक गाँव है। इस गांव का तप्पा कपरी महसों विकास क्षेत्र व तहसील भी बस्ती ही है। इसे महाश्रम तथा महातीर्थ भी कहा गया है। यहां कपिल नामक ...

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लोकसभा क्षेत्र बस्ती (61) का इतिहास

 डा. राधेश्याम द्विवेदी लोकसभा क्षेत्र बस्ती जनपद के बारे में कभी भारतेंदु हरिश्चंद्र ने कहा था कि ” बस्ती को बस्ती कहूं तो काको कहूं उजाड़। “आज भी इस क्षेत्र की स्थिति ऐसी ही है। बस्ती, यूपी के पुराने शहरों में से एक है, इसका नाम वशिष्ठ मुनि के नाम ...

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बांसी राजघराने का इतिहास

डा. राधेश्याम द्विवेदी इतिहास एवं विस्तार :- बांसी भारत के मानचित्र पर 27040‘ उत्तरी अक्षांस तथा 820 56‘ पश्चिमी देशान्तर पर स्थित है। यह राप्ती नदी के किनारे बसा हुआ है जिसके इस पार मेंहदावल व डुमरियागंज तथा उस पार विस्कोहर , चिल्हिया तथा उस्का बाजार है। नदी के तट ...

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बस्ती का राजघराना

डा. राधेश्याम द्विवेदी तत्कालीन परिस्थिति :- राजपूतों के आगमन से पहले बस्ती – गोरखपुर जिले में हिंदुओं का राज्य था। यह क्षेत्र  स्थानीय हिंदू और हिंदू राजाओं के अधीन था। इन शासको द्वारा भार, थारू, दोमे और दोमेकातर जैसे आदिवासी जनजातियों को अपने अधीन कर उनके सामान्य परम्पराओ को खत्म ...

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आसान नहीं आरक्षण की राह

प्रो फैजान मुस्तफा पिछले दिनों आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को 10 प्रति-रु39यात आरक्षण प्रदान करने हेतु संसद के दोनों सदनों में पारित 124वें संविधान सं-रु39याोधन विधेयक के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 16 में एक नया उपबंध जोड़ा गया है, जो राज्यों को ऐसे प्रावधान करने में समर्थ बनाता है. ...

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बच्चों द्वारा बुजुर्ग माता-पिता की उपेक्षा समाज के लिए शुभ नहीं

डा. राधेश्याम द्विवेदी आधुनिक युग में जितनी तेजी से भौतिक और वैज्ञानिक जीवन में विकास हुआ है ,उतनी ही तेजी से व्यक्ति का नैतिक और सांस्कारिक पतन भी हुआ है। दूसरों ,गुरुओं ,बड़ों ,बुजुर्गों की तो बात ही क्या अब तो माता -पिता तक के प्रति समर्पित ,सम्मान करने वाले ...

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